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बेनी समर्थकों ने जमकर की आतिशबाजी, बांटी मिठाईयां, मनाया जश्न

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। जिले के कद्दावर नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद
वर्मा ने आज अपनी पुरानी पार्टी सपा में वापसी कर ली। राष्ट्रीय अध्यक्ष
मुलायम सिंह यादव ने आज प्रदेश की राजधानी में इस बात की घोषणा की। उनके
साथ में सपा के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। बेनी की सपा में वापसी की खबर
जैसे ही जिला मुख्यालय पर पहुंची। उनके समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी की और
मिठाईयां बाटकर खुशी का इजहार किया। वहीं बेनी के विरोधियांे को जब इस
बात की खबर लगी तो उनके चेहरे लटक गये।
जिले में पिछले चार दशक से राजनीति में छाये बेनी प्रसाद वर्मा ने हमेशा
से ही समाजवादी विचारधारा की सोच वाली राजनीति की है। हमेशा से जिले में
छाये रहने वाले बेनी बाबू की समाजवादी पार्टी मंे तूंती बोलती थी और जब
मुलायम सिंह यादव ने पार्टी का गठन किया था। उस समय भी बेनी बाबू की
पार्टी में बड़ी अहमियत थी। उनके इशारे पर ही बाराबंकी जिले से कई जनपदों
के टिकट दिये जाते थ। लेकिन दस वर्ष पूर्व सपा के कुछ प्रदेश स्तरीय
नेताओं को लेकर जब विवाद हुआ तो इससे नाराज होकर बेनी बाबू ने सपा से
किनारा कर लिया था। किनारा करने के बाद उन्होने राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम
सिंह यादव को नीचा दिखाने के खातिर वर्ष 2006 में अपनी नई पार्टी एसकेडी
का गठन किया था और वर्ष 2007 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ था तो उन्होने
प्रदेश के अधिकांश स्थानो पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन
कहीं पर भी उनके उम्मीदवारों को सफलता हासिल नही हुई थी। हद तो तब हो गयी
थी जब बेनी बाबू अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। जिसमें उनकी
जमानत तक जब्त हो गयी थी। उस समय सभी लोगों ने यह मान लिया था कि बेनी
बाबू की राजनीति खत्म हो गयी है। लेकिन उसके बाद जब वर्ष 2009 में लोकसभा
चुनाव होने वाले थे तो उस समय बेनी बाबू ने अपने पूरे कुनबे सहित
कांग्रेस में शामिल हो गये थे। कांग्रेस पार्टी में भी बेनी बाबू की तूती
बोली और उस लोकसभा चुनाव में बेनी बाबू सहित आस पास जनपदों के सभी सांसद
कांग्रेस के हुए थे। जिसका सारा श्रेय बेनी बाबू को ही गया था। इसी बात
से खुश होकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी ने उनको
केन्द्रीय इस्पात मंत्री का पद देकर उनका कद बढ़ा दिया था। बेनी बाबू ने
पांच साल तक कांग्रेस में जमकर मेहनत की। लेकिन जब विधानसभा चुनाव 2012
में हुआ तो उन्होने अपनी मर्जी से बाराबंकी जनपद सहित अन्य जनपदों में भी
टिकट बाटे थे। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस की काफी दुर्गत हुई थी। यहां
तक की विधानसभा दरियाबाद क्षेत्र से उनका लड़का राकेश वर्मा चुनाव हार गया
था और रही सही कसर इस लोकसभा चुनाव में पूरी हो गयी। जब बेनी वर्मा
गोण्डा से चुनाव हार गये। इसके बाद बेनी बाबू हासिये पर चले गये थे। और
धीरे-धीरे उनकी राजनीति प्रदेश से लेकर जिले में ही आकर सिमट गयी थी। इधर
पिछले एक साल से यह कयास लगाये जा रहे थे कि बेनी बाबू की कभी भाजपा में
जाने की तो कभी सपा में जाने की चर्चा हो रही थी। लेकिन उनकी एक यह भी
मजबूरी थी कि उनकी वापसी सम्मान पूर्वक हो और उनके लड़के को भी सेट किया
जाये। आखिरकार आज दोपहर जब जिला मुख्यालय पर प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष
मुलायम सिंह यादव ने बेनी बाबू को साथ में लेकर यह घोषणा की कि बेनी बाबू
पार्टी मंे आ गये हैं। तो इसकी गूंज जिला मुख्यालय पहुंची। सूचना मिलते
ही बेनी बाबू के हजारो समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गयी और कई स्थानो पर
जमकर आतिशबाजी हुई और मिठाईयां बाटी गयी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री बेनी
प्रसाद जहां सूबा राजधानी में सपा के दिग्गजों के साथ मशगूल थे, वहीं
बाराबंकी में उनके आवास पर मौजूद उनके पुत्र राकेश वर्मा को बधाई देने
वालों को तांता लगा हुआ था। समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह अपने
सहयोगियों के साथ उनके आवास पर बधाई देने पहुंचे।

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