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जमीन की बाजीगरी में चकबन्दी विभाग लाजवाब

अजमी रिज़वी
सरौलीगौसपुर बाराबंकी। चकबन्दी विभाग तेरी बाजीगरी का कोई जवाब नहीए जो
आये दिन किसी न किसी  किसान की जमीन को अपनी बाजीगरी के बल पर उसे बेदखल
करके दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर कर देता है। भुक्त भेागी न्याय की आस
लिए अधिकारियो की गणेश परिक्रमा करते करते विभाग की कर गुजारियो को कोसते
हुए नजर आते है।
जी हॉ चौकिए नही यह कहावत चकबन्दी विभाग पर विल्कुल सटीक बैठ रही है।
चकबन्दी विभाग ने काफी अर्सा पूर्व एक किसान की जमीन को दूसरे किसान के
नाम करके उसे जमीन से बेदखल कर दिया हैैं जो अपनी सोयी हुई जमीन केा पुनः
प्राप्त करने के लिए दर दर भटक रहा है बताते चले कि कस्बा बदोसरांय
निवासी दिलावर हुसैन पुत्र मुस्तफा हुसैन की गाटा संख्या 89 की रकबा संण्
0ण्0180 हेक्टेयर भूमि जो ग्राम टिकुरी में थी उसे तत्कालीन चकबन्दी
लेखपाल ने ग्राम वासी दिलदार हुसैन के गाटा संण् 90 रकबा 0ण्0190
हेक्टेयर के साथ नाप दिया था। इस गोरख धन्धे की जानकारी तब दिलावर के
पुत्रो  यावर हुसैनए अबरार हुसैनए तजम्मुल हुसैन राहत हुसैनए आदि को हुई
तो उनके पैरो तले से जमीन खिसक गयी अपनी जमीन को पुनः प्राप्त करने के
लिए उन्होने चकबन्दी न्यायलय में अपना वाद दायर करके न्याय की गुहार
लगायी है। इसी क्रम में ग्राम घौखरिया निवासी दुर्गा प्रसाद शंकर दयालए
राजेश कुमारए बृजेश कुमार पुत्र गण स्व0 कन्हैया लाल की जमीन चकबन्दी
आकार 23 में गाटा सं0 1015ए1024ए1072ए1073ए को सम्मिलत नही किया गया
जिसमें गांटा सं0 1025ए की 0ण्683 हेक्टयर भूमि को पर्चा 23 में कम
दर्शाया गया है। वही स्वर्गीय कन्हैया लाल की मृतक पत्नी सरस्वती देवी की
भूमि की गाटा सं0 1227 की मालियत 80 पैसे से सम्लित करके 100 पैसे की
मालियत पर रकबा रख दिया जिससे जमीन काफी कम हो गयी। इसके  सम्बन्ध में
चकबन्दी लेखपाल विभाग  में बाद दायर करने कके उपरान्त की इस समस्या का
समाधान हो सकता है।

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