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गरीबों के दिलों में पड़ रही एमएलसी राजू की अनूठी छाप

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। इंसान की फितरत होती है कि जब वह फर्श से अर्श पर पहुंचता है
तो इंसानियत खो बैठता है। लेकिन इस जहान में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो फर्श
की कीमत भी समझते हैं और अर्श की भी। जिंदगी जीने का सलीका उन्ही को आता
है जो कभी गरीब और अमीर में फर्क नही करते। खास कर वो लोग जिन्होने गरीबो
को भी बहुत नजदीकी से देखा है। यही कारण है कि गरीब आवाम भी ऐसे इंसानो
पर अपनी जान छिड़कती है। आज ऐसा ही कुछ वाक्या देखने को मिला। मन किया कि
यूं टहलते.टहलते जरा एमएलसी साहब से मिल लें। भाई चुनाव जीते हैं।
जगह.जगह स्वागत हो रहा है। लोगों के मुंह से काफी तारीफ भी सुनी। तो मन
किया कि चंद पल उनके पास बैठेंए जाने और देखें। वक्त सुबह का करीब 10ः30
बजे। जगह भी जानी पहचानी अपना पीडब्लू का डाक बंगला। सदस्य विधान परिषद
;एमएलसीद्ध राजेश यादव बाहर बरामदे में दो चार लोगों के साथ खड़े बातें कर
रहे थे। जैसे ही पहुंचते हैं खुले दिल से इस्तेकबाल करते हैं एमएलसी
साहब। बाते शुरु होती है बातो बातों में कमरे की ओर बढ़ चलते हैं। लेकिन
बार बार उनकी नजर मोबाइल की ओर जा रही थी। तभी कहते हैं कुछ कार्यक्रम है
 जल्दी पहुंचना है। यह सोचकर की कहीं देर न हो जाये। चल दिया जाता है।
लेकिन जैसे ही कमरे के बाहर निकलते हैं। तो पीछे से एक आवाज आती है साहब
का जात हो। कदम वहीं रुक जाते हैं। पीछे मुड़कर देखते हैं। तो करीब 50 साल
की एक अधेड़ महिला हाथ में डण्डा लिये। पैर में ंप्लास्टर चढ़ाए माथे पर
पट्टी बंधीए दरवाजे के किनारे खड़ी थी। एमएलसी श्री यादव सबसे पहले कहते
हैं अम्मा चलौ पहिले अन्दर बइठौ। बड़ा सहज अंदाज था। एक पल को लगा नेता है
कि घर का मनई। सोफे पर जब वह अधेड़ औरत जैसे तैसे बैठती है। तो सवाल उठता
है अरे यो पैर में प्लास्टर कैसे चढा। एक अजीब से अपने पन का एहसास पाकर
उस औरत का गला रुंध जाता है। जिले के सबसे दूर स्थित तराई क्षेत्र तहसील
फतेहपुर के थाना मोहम्मदपुर खाला अर्न्तगत सूरतगंज चौकी के ग्राम
बसंतापुर निवासिनी चन्द्रावती पत्नी राजेश अपनी आप बीती एमएलसी साहब को
सुनाती है। आवाज थोड़ी धीरे थी। एमएलसी साहब बकायदा झुक कर उसका दर्द
सुनते हैं। बीते प्राकृतिक आपदा में छत गिरी तो सिर फूटा पैर टूटा। उस पर
दरोगा साहब का कहर। जैसे करेला वो भी नीम चढ़ा। चन्द्रावती एमएलसी श्री
यादव से बताती है कि मोहम्मदपुर खाला पुलिस किस तरह एक नाबालिग बच्चे को
शातिर अपराधी बनाने में जुटी है। सात मुकदमे बताती है वो भी गैंगेस्टर
सहित। चन्द्रावती की आंखे आंसुओं से डब डबा रही  थी और एमएलसी राजेश यादव
उस अधेड़ पीड़ित महिला के दर्द को न सिर्फ सुन रहे थे बल्कि समझ रहे थे।
जैसे ही अधेड़ महिला ने अपनी आप बीती खत्म की। एमएलसी साहब तुरन्त एसओ
मोहम्मदपुर खाला रिजवान अब्बास को फोन लगा देते हैं। फोन उठता है जय
हिन्द सुनायी पड़ता है और उसके बाद सिर्फ यस सरए यस सर। चंद मिनटो में
पूरी थ्योरी समझने वाले एमएलसी राजेश यादव ने चंद सेकेण्डो में उस अधेड़
औरत की तकलीफ दूर कर दी। काफी अच्छा लगा यह देखकर। कि जो औरत अपने विधायक
के पास भी जा सकती थीए सूबे के कबीना मंत्री के घर भी जा सकती थी। आखिर
वह एमएलसी से मिलने क्यों आयी। इस सवाल का जवाब इस वाक्ये ने अपने आप साफ
कर दिया। जनाब हर कोई तुरंत राहत चाहता है और दर्द से तुरंत वही राहत दे
सकता है जिसने दर्द झेला हो। आज बाराबंकी जिस राजेश यादव को  एमएलसी के
रुप में सर आंखों पर बैठा रही है। उस राजू ने भी ऐसे दर्द झेले हैं। जो
शायद बहुत कम लोग झेलते हैं। बाराबंकी नगर से 45 किलोमीटर दूर का गरीब
इंसान अगर एमएलसी साहब से मिलने आया तो जनाब यह तय है कि साहब का रुतबा
गरीब आवाम के दिलों में काफी बुलंद है। जब तक तकलीफ दूर हो गयी। तो
एमएलसी फिर मुड़ते हैं और बड़े प्यार से कहते हैं अच्छा तो अब हम जाई। कुछ
औरो काम निपटावेक है। एक सरल हृदयए सरल व्यक्तित्व और सबसे महत्वपूर्ण
लोगों को सम्मान देने वाला एमएलसी कहीं अगर विधायक हो जाता तो यह तय है
कि बाराबंकी नगर भी फर्श से अर्श पर चमकता।

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