खुमार बाराबंकवी की याद में मुशायरा आयोजित
https://husainijnp.blogspot.com/2016/05/blog-post_592.html
अजमी रिज़वी
बाराबंकी। खुमार मेमोरियल एकेडमी के तत्वाधान में एकेडमी हाल में खुमार
मेमोरियल का तीमाही मुशायरा आयोजित हुआ। मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे
निहाल रिजवी ने खुमार बाराबंकवी की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि
खुमार साहब ने बाराबंकी न बल्कि पूरी दुनिया में अपनी गजलो के बादशाह
बने। कार्यक्रम का संचालन शायर सगीर नूरी ने किया। मुशायरे में आये
एकेडमी अध्यक्ष निहाल रिजवी ने पढ़ा- दिल चुरा ले गया क्या छीन के मुझसे
कोई, कल्ब सीने में नही जिस्म के बाहर है क्या। उस्मान मिनाई ने पढ़ा-अब
तो नैजे भी नही होते हैं नैजो जैसे, अब कहां सर भी मेरे सर की तरह होते
हैं। कलीम आजर ने कहा अब जो पाला पड़ा तो कहता हूं, जिंदगी और मुख्तसर
होती है। इरशाद बाराबंकवी ने कहा था जो मूरत चुराने में शामिल, वह मंदिर
का पुजारी हो गया है। शमीम बाराबंकवी ने अपने खास अंदाज में पढ़ा सोचता
रहता है दुनिया में तखरीबी मिजाज, हश्र कोई हश्र से पहले उठाना चाहिये।
आदर्श बाराबंकवी ने पढ़ा- न जाने क्यों मुझे बढ़कर सलाम करता है, अजब हरीफ
है जो एहतेराम करता है के अलावा असलम बड़ेलवी, सुहैल बड़ेलवी, मकसूद पैयामी
मैलारायगंज, शुएब अनवर, डा. फिदा हुसैन, वकार बाराबंकवी, फैज आतिश ने
अपने कलाम से लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। अन्त में वकार बाराबंकवी ने
आये हुए तमाम शायरों व श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
बाराबंकी। खुमार मेमोरियल एकेडमी के तत्वाधान में एकेडमी हाल में खुमार
मेमोरियल का तीमाही मुशायरा आयोजित हुआ। मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे
निहाल रिजवी ने खुमार बाराबंकवी की जिंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि
खुमार साहब ने बाराबंकी न बल्कि पूरी दुनिया में अपनी गजलो के बादशाह
बने। कार्यक्रम का संचालन शायर सगीर नूरी ने किया। मुशायरे में आये
एकेडमी अध्यक्ष निहाल रिजवी ने पढ़ा- दिल चुरा ले गया क्या छीन के मुझसे
कोई, कल्ब सीने में नही जिस्म के बाहर है क्या। उस्मान मिनाई ने पढ़ा-अब
तो नैजे भी नही होते हैं नैजो जैसे, अब कहां सर भी मेरे सर की तरह होते
हैं। कलीम आजर ने कहा अब जो पाला पड़ा तो कहता हूं, जिंदगी और मुख्तसर
होती है। इरशाद बाराबंकवी ने कहा था जो मूरत चुराने में शामिल, वह मंदिर
का पुजारी हो गया है। शमीम बाराबंकवी ने अपने खास अंदाज में पढ़ा सोचता
रहता है दुनिया में तखरीबी मिजाज, हश्र कोई हश्र से पहले उठाना चाहिये।
आदर्श बाराबंकवी ने पढ़ा- न जाने क्यों मुझे बढ़कर सलाम करता है, अजब हरीफ
है जो एहतेराम करता है के अलावा असलम बड़ेलवी, सुहैल बड़ेलवी, मकसूद पैयामी
मैलारायगंज, शुएब अनवर, डा. फिदा हुसैन, वकार बाराबंकवी, फैज आतिश ने
अपने कलाम से लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। अन्त में वकार बाराबंकवी ने
आये हुए तमाम शायरों व श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

