मो. नियाज को सौंपी गयी हाफिज की डिग्री
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बाराबंकी। महज 15 साल की उम्र में कुरान पाक को कन्ठस्थ करने वाले
मो. नियाज ने हाफिज बनने का गौरव हासिल कर लिया है। सम्मान में आयोजित
प्रोग्राम में पगड़ी बांध कर डिग्री सौंपी गयी तो मां बाप का सर फख्र से
उंचा हो गया। मैला रायगंज निवासी जुबेर अहमद के होनहार बेटे मो. नियाज ने
जैदपुर स्थिित मदरसा हदादुल उलूम में पवित्र कुरान को जुबानी याद करने की
तालीम हासिल कर रहे थे। 15 साल की उम्र अमूमन पढ़ने और खेलने की उम्र होती
है ऐसे में अरबी भासा में लिखी पूरी कुरान पाक को जुबानी याद करके सीने
में उतार लेना बड़ी और कमाल की बात है। मगरिब की नमाज के बाद समारोह
पूर्वक मौलाना सलीम काष्मी ने व कारी वषी अहमद अंसारी ने छात्र के सर पर
पगड़ी बांध कर हाफिज होने का प्रमाण दिया तो बच्चे के वालिद और वालिदा के
साथ पूरे गांव के लोगो ने खुद को गौरावान्वित महसूस किया। इषा की नमाज के
बाद तकरीर का कार्यक्रम हुआ। जिसमें वक्ताओ ने कहा की इस्लाम में हाफिज
का दर्जा बहुत उंचा है बताया की जिसका बेटा ये उपलब्धि हासिल कर लेता है
उसकी सिफारिस अल्लाह ताअला मानता है वह 10 लोगो के गुनाह माफ करा कर
जन्नत ले जा सकता है। कहा इतनी कम उम्र में हाफिज बनना अल्लाह की नियामत
है। इस मौके पर कई उलेमाओ ने तकरीर के जरिये धार्मिक बयान बाजी की। इस

