35 संविदा कर्मियों की नियुक्ति डीएम ने की निरस्त
https://husainijnp.blogspot.com/2016/06/35_29.html
सिरौलीगौसपुर, बाराबंकी। पैंतीस चतुर्थ श्रेणी संविदा कर्मियों की
नियुक्ति के निरस्त होने की सी.एम.ओ. कार्यालय से मेल पहुंचने के बाद
हड़कम्प मच गया है । इस प्रकरण में लाखों रुपये वसूलने वाली संस्था व
अधिकारी इसका रास्ता निकालने की जुगत में लग गये हैं। 100 सैय्या वाले
सिरौलीगौसपुर संयुक्त चिकित्सालय में अवनी परिधि एनजीओ एण्ड कम्युनिकेशन
प्रा. लि. द्वारा की गयी पैंतीस नियुक्तियों को जिलाधिकारी अजय यादव ने
डा. जेता सिंह मुख्य चिकित्साधिक्षक सिरौलीगौसपुर की जांच आख्या मिलने के
बाद निरस्त कर दिया है। इसकी सूचना मेल द्वारा सीएचसी सिरौलीगौसपुर 27
जून 2016 को पहुंचने के बाद लाखों रुपये खर्च करने वाले संविदा कर्मियों
के होश उड़ गये हैं। इन नियुक्तियों में करीब प्रति पद ड़ेढ लाख की वसूली
की गयी। उक्त मामले को जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी ने गम्भीरता से लिया
और प्रकरण की जांच डा. जेता सिंह को सौंप दी गयी। जिलाधिकारी के आदेश के
क्रम में गत् सप्ताह इन नियुक्तियों को संदिग्ध मानते हुए निरस्त कर
दिया। आदेश में यह कहा गया है कि यदि संविदा कर्मियों पर सरकारी व्यय हुआ
है तो उसकी रिकवरी करायी जाये। अब बाजी हाथ से निकलता देख संस्था के
प्रभावशाली लोग पुनः जांच करवाने की जुगत में लग गये है। डॉ. जेता सिंह
ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नही अपनायी गयी। संस्था के
नियमों व नियुक्त कर्मचारियों के बयान अलग-अलग मिले हैं।
नियुक्ति के निरस्त होने की सी.एम.ओ. कार्यालय से मेल पहुंचने के बाद
हड़कम्प मच गया है । इस प्रकरण में लाखों रुपये वसूलने वाली संस्था व
अधिकारी इसका रास्ता निकालने की जुगत में लग गये हैं। 100 सैय्या वाले
सिरौलीगौसपुर संयुक्त चिकित्सालय में अवनी परिधि एनजीओ एण्ड कम्युनिकेशन
प्रा. लि. द्वारा की गयी पैंतीस नियुक्तियों को जिलाधिकारी अजय यादव ने
डा. जेता सिंह मुख्य चिकित्साधिक्षक सिरौलीगौसपुर की जांच आख्या मिलने के
बाद निरस्त कर दिया है। इसकी सूचना मेल द्वारा सीएचसी सिरौलीगौसपुर 27
जून 2016 को पहुंचने के बाद लाखों रुपये खर्च करने वाले संविदा कर्मियों
के होश उड़ गये हैं। इन नियुक्तियों में करीब प्रति पद ड़ेढ लाख की वसूली
की गयी। उक्त मामले को जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी ने गम्भीरता से लिया
और प्रकरण की जांच डा. जेता सिंह को सौंप दी गयी। जिलाधिकारी के आदेश के
क्रम में गत् सप्ताह इन नियुक्तियों को संदिग्ध मानते हुए निरस्त कर
दिया। आदेश में यह कहा गया है कि यदि संविदा कर्मियों पर सरकारी व्यय हुआ
है तो उसकी रिकवरी करायी जाये। अब बाजी हाथ से निकलता देख संस्था के
प्रभावशाली लोग पुनः जांच करवाने की जुगत में लग गये है। डॉ. जेता सिंह
ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नही अपनायी गयी। संस्था के
नियमों व नियुक्त कर्मचारियों के बयान अलग-अलग मिले हैं।

