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5 दिवसीय मजलिस सम्पन्न, अलम की जियारत को पहुंचे जायरीन

जौनपुर। मौलाना सैय्यद मकबूल अहमद मरहूम की याद में आयोजित आल इण्डिया 5 दिवसीय सालाना मजालिसे अजा (100वां साल) का समापन हो गया। अन्तिम दिन मकबूल मंजिल बलुआघाट इमामबाड़े में आयोजित मजलिस को खेताब करते हुये दिल्ली से आये मौलाना डा. कल्बे रुशेद ने कहा कि शैतान को मानने वालों को अड्डा आईएसआईएस व अलकायदा है। इस्लाम ने कुर्बानी देना सिखाया है, न कि किसी की जान लेना। इसके पहले मजलिस को ग्वालियर से आये डा. कल्बे रजा व कमर सुल्तान दिल्ली ने कहा कि करबला ने हमें राहे हक का रास्ता दिखाया है। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत अलम व झूला बरामद हुआ। अंजुमन सिपाहे हुसैनी भनौली, सादात अमेठी ने अपने दर्द भरे नौहे पढ़कर माहौल को गमगीन कर दिया। सोजखानी मुजफ्फरनगर से आये असगर मेंहदी व उनके हमनवा ने किया तथा पेशानी शोहरत व कमर जौनपुरी ने किया। इस अवसर पर मो. हसन नसीम, मीसम मेंहदी, अहमद अली, खुर्शीद मेंहदी, मोहम्मद हैदर, तनवीर हसन, तौकीर हसन, मेंहदी अब्बास रुमी, हसनैन कमर दीपू, मो. इरफान हैदर, फैसल हसन तबरेज, रिजवान हैदर राजा, मो. हैदर, आजम जैदी, बाकर हसन, कैफी रिजवी मौजूद रहे। संचालन डा. इन्तेजार मेंहदी व आभार सादिक मेहदी व शाहिद मेंहदी ने ज्ञापित किया।

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