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...आखिर रामवृक्ष यादव की कहां से होती थी फंडिंग

मथुरा:  दो जांबाज पुलिस अधिकारियों की शहादत के साथ 24 अन्य लोगों की जान लेने वाले धार्मिक नगरी मथुरा के जवाहर बाग में हुई हिंसक घटना के बाद अब लाख टके का सवाल यह है कि इस समूचे प्रकरण के लिए जिम्मेदार रामवृक्ष यादव की ‘फंडिंग’ कहां से होती थी। जवाहर बाग में औसतन 3,000 लोग प्रतिदिन रहते थे, उनके दोनों समय के खाने का खर्च 55-55 हजार हो जाता था, इस तरह कम से कम 15 लाख रुपए प्रति माह रसोई का खर्च अनुमानित है।
जानकार मानते हैं कि इसके अलावा करीब 10 लाख रुपए और खर्च रहा होगा। ऐसे में बडा सवाल है कि रामवृक्ष यादव 25-30 लाख रुपए का इंतजाम प्रति माह कैसे करता था। स्थानीय प्रशासन को शक था कि बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकार के लिए लड़ रहे उमाशंकर तिवारी उसे फंडिंग करते थे, लेकिन बाद में यह आकलन सही नहीं निकला। उमाशंकर तिवारी व पंकज यादव जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी की प्रतिस्पर्धा में थे, लेकिन बाजी पंकज यादव ने मारी। उमाशंकर तिवारी व पंकज यादव में छत्तीस का आंकड़ा बताया जाता है।
प्रशासन के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि दोनों के खराब संबंधों की वजह से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि रामवृक्ष को पंकज के खिलाफ उमाशंकर तिवारी से मदद मिल रही थी, लेकिन छानबीन में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। रामवृक्ष यादव जवाहर बाग में बाजार भी लगवाता था। वह सस्ते दामों पर गेहूं, चावल, दाल, सब्जियां और फल बिकवाता था, लेकिन कुछ ही दिनों में पुलिस ने उसकी आय का यह साधन भी बंद करवा दिया था। बाजार में बाहर से आने वाली रसद पर रोक लगा दी थी।
यह अलग बात है कि पुलिस को वहां जमा हो रहे असलहों व विस्फोटकों के जखीरे का पता नहीं चल सका था। इस बीच पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि रामवृक्ष यादव को मध्य प्रदेश में सिंधी के हरअमोल सिंह तथा बदायूं के राकेश यादव फंडिंग करते थे, दोनों ही बाबा जयगुरुदेव से जुड़े रहे हैं।

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