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सीएचसी रामसनेहीघाट में आशा संगिनी चयन प्रक्रिया में उठे सवाल

बाराबंकी। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रामसनेहीघाट में आशा संगिनी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। एक तरफ जहां दर्जनों ग्राम प्रधानों ने सीएचसी के प्रभारी के ऊपर सुविधा शुल्क लेकर अपने हचेतों को चयन करने का आरोप लगाया है और दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पूरी तरह से इस मामले पर पर्दा डाल रहे हैं। ग्राम प्रधानों व क्षेेत्र पंचायत सदस्यों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वस्थ्य मिशन योजना के अन्तर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनीकोडर में दस आशा संगिनियों का चयन किया जाना था। जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी की भूमिका प्रमुख थी। चयन प्रक्रिया का जैसे ही काम शुरु हुआ तो चिकित्सा प्रभारी ने सारे नियम कानून को दरकिनार रखकर मनमाने ढंग से अपने चहेते लोगों का चयन करके उसकी सूची मुख्य चिकित्सा प्रभारी और एडीएम बाराबंकी को भेज दी। जब इस घाोटाले की जानकारी उन आशा बहुओं और ग्राम प्रधानों को हुई तो उन्होने इसका विरोध शुरु किया। बनीकोडर ब्लाक के ग्राम प्रधान गिल्लापुर हरिश्चन्द्र रावत, ग्राम प्रधान सिल्हौर स्नेह लता, क्षेत्र पंचायत सदस्य रीता मिश्रा, प्रधान भवनियापुर लालमती सिंह, संतोष कुमार सहित दर्जनों ग्राम प्रधानों व क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने जिलाधिकारी अजय यादव को पत्र लिखकर यह आरोप लगाया था कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी ने आशा संगिनी के चयन में जमकर मनमानी की है। उन्होने बताया कि कलेस्टर नम्बर 4 में बनीकोडर से अमहिया की दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर है और बनीकोडर से अमहिया के बीच कल्याणी नदी भी पड़ती है। इन लोगों ने आगे बताया कि कलेस्टर नम्बर 6 में किठहिया से चौरी की दूरी 12 से 14 किलोमीटर की दूरी पर है और टिकरा और चौरीअलादासपुर के बीच रारी नदी पड़ती है। जबकि कलेस्टर नंम्बर 8 के निर्माण में सम्मिलित क्षेत्रों के बीच की दूरी लगभग 12 किलोमीटर है। जबकि नियम यह था कि अगर बगल के क्षेत्रों को जोड़ा जाना था। इतना ही नही इन जन प्रतिनिधियों का आरोप था कि आशा संगिनी का फार्म भर जाने के बाद कलेस्टर का चयन किया गया। जबकि यह कार्य फार्म जमा होने के पहले कर लिया जाना चाहिये। इन लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि इस चयन प्रक्रिया में साइकिल चलाना अनिवार्य था। जिसमें एक आशा बहू को साइकिल चलाने का ज्ञान ही नही है। लेकिन उसको भी चयन सूची में वरीयता दी गयी। इन आरोपों की जांच का आदेश जब डीएम ने सीएमओं बाराबंकी को दिया तो उन्होने अपने सीएचसी प्रभारी का ही साथ दिया। इन लोगों ने जो रिपोर्ट डीएम को भेजी है। उसको देखने के बाद यह साफ पता चल जायेगा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बनीकोडर क्षेत्र का कितना ज्ञान है। इस सम्बन्ध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी से वार्ता की गयी तो उन्होने कहा कि जो भी चयन प्रक्रिया आशा संगिनी के लिये की गयी है। वह पूरी तरह से साफ सुथरी है। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह का कोई भी गलत कार्य नही किया गया है। उन्होने आगे बताया हम लोगों ने ब्लाक बनीकोडर की दस आशा संगिनी का चयन करके सूची सीएमओ और एडीएम को भेज दी है। अब वहां से ही निर्णय होगा। कुल मिलाकर आशा संगिनी की चयन प्रक्रिया को लेकर क्षेत्र के ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। इन लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर तत्काल नये सिरे से पारदर्शिता पूर्वक चयन करने की मांग की है। 

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