बाहुबली कोतवाल ने न्यूज चैनल पत्रकार को धुना
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बाराबंकी। कोतवाली नगर अन्तर्गत आज दोपहर मामूली विवाद में सुलह समझौता
करवाने की बात को लेकर एक इलेक्ट्रानिक चैनल के पत्रकार को प्रभारी
निरीक्षक ने कोतवाली में बुलाया और उसके बाद जब पत्रकार ने सुलह करने से
इंकार कर दिया तो कोतवाली परिसर के अन्दर ही कोतवाल ने पत्रकार से जमकर
अभद्रता की और वहीं पर मौजूद एक चौकी इंचार्ज व आधा दर्जन सिपाहियों ने
पत्रकार को दौड़ा-दौड़ाकर कोतवाली के अन्दर जमकर पीटा। बाद में उसको हवालात
में डालने और जेल में सड़ा देने की धमकी भी दी गयी। इस घटना से आक्रोशित
सैकड़ो पत्रकारों ने आरोपी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की
मांग को लेकर पहले कोतवाली में हंगामा काटा और बाद में लखनऊ-फैजाबाद
मार्ग जाम करके अपना विरोध प्रकट किया। खबर लिखे जाने तक जिलाधिकारी से
लेकर पुलिस अधीक्षक तक जांच के बाद कार्यवाही करने की बात करते रहे।
जानकारी के अनुसार कोतवाली नगर क्षेत्र के नगर पंचायत बंकी के निवासी
सतीश कश्यप राजधानी लखनऊ के एक इलेक्ट्रानिक चैनल में जिला संवाददाता के
पद पर कार्यरत हैं। दो दिन पूर्व जल निकासी की बात को लेकर सतीश का विवाद
उसके पड़ोसी अतुल यादव से हो गया था। सतीश ने इसकी शिकायत उसी दिन शाम को
कोतवाली प्रभारी नगर भगवती प्रसाद यादव से की। लेकिन उस शिकायत पर
प्रभारी निरीक्षक ने कोई खास तव्वजो नही दी। आज दोपहर 11 बजे कोतवाली
प्रभारी ने पत्रकार सतीश कश्यप को फोन करके बुलाया और यह कहा कि आईये
आपके विपक्षी को बुलाया है। आईये देखते हैं मामला क्या है। कोतवाल के
बुलाने पर सतीश कश्यप अपने एक सहयोगी पत्रकार सरफराज वारसी के साथ में
कोतवाली पहुंचे। वहां पर कोतवाली प्रभारी ने सतीश पर दबाव बनाया कि अतुल
के साथ में सुलह कर लो। तो सतीश ने कहा कि मेरे विपक्षी ने मेरे साथ
बदसलूकी की है। पहले मेरा मुकदमा दर्ज करो। इतना जैसे ही सतीश ने कहा
वहीं पर खड़े सत्तामद में चूर प्रभारी निरीक्षक भगवती प्रसाद यादव ने सतीश
को गालियां देनी शुरु कर दी और पस में खड़े चौकी इंचार्ज शिवनाथ यादव व
वर्दी में खड़े आधा दर्जन पुलिस कर्मियों को लल्कारा और कहा कि इसकी
पत्रकारिता निकाल दो। इतना मारो की सारी जिंदगी पत्रकारिता करना भूल
जाये। अपने अधिकारी का आदेश सुनते ही चौकी इंचार्ज व सिपाहियों ने सतीश
को पकड़कर कोतवाली परिसर के अन्दर ही दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरु कर दिया।
सतीश चिल्लाता रहा। लेकिन वर्दी के नशे में चूर पुलिस कर्मियों को जरा सा
भी तरस नही आया। इसी बीच सतीश के साथ गये पत्रकार सरफराज वारसी ने जब मना
किया तो कोतवाल ने यह धमकी दी कि जो हालत सतीश की जा रही है। अभी
तुम्हारे साथ भी करवाता हूं। उसके बाद सरफराज बाहर आया और मोबाइल फोन से
अपने साथी पत्रकारों को सूचना दी। कोतवाली परिसर के अन्दर ही पत्रकार की
पिटाई की बात सुनकर सैकड़ो पत्रकार कोतवाली में आ गये और कोतवाल व चौकी
इंचार्ज व पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करके निलम्बन की मांग को
लेकर हंगामा करना शुरु कर दिया। पत्रकारों ने करीब दो घण्टे तक हंगामा
किया। इसके बाद कोतवाली में अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह, सीओ सिटी
विशाल विक्रम सिंह आदि लोग आये। उन लोगों ने पत्रकारों को समझाने का
प्रयास किया और कहा कि जांच के बाद ही कार्यवाही की जायेगी। लेकिन सभी
पत्रकार अपनी जिद पर अड़े रहे। कहा कि जब तक आरोपी पुलिस कर्मियों के
विरुद्ध मुकदमा नही दर्ज किया जायेगा। तब तक हम लोग कोतवाली में ही जमे
रहेंगे। शाम 5 बजे जब जिलाधिकारी अजय यादव ने पत्रकारांे को वार्ता के
लिये डीआरडीए कार्यायल में बुलाया तो वहां जाते समय पत्रकारों ने कचेहरी
के सामने लखनऊ फैजाबाद मार्ग को जाम कर दिया और अपना विरोध प्रकट किया।
करीब आधा घण्टा जाम लगाने के बाद जब दोनो तरफ के वाहनों का आवागमन बंद हो
गया तो उसके बाद पत्रकारों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जाकर उनसे मुलाकात
की। जिलाधिकारी ने कहा कि मुझे दो दिन का समय चाहिये। दो दिन के अन्दर
जांच करवाकर आरोपी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी। डीएम
के आश्वासन पर आक्रोशित पत्रकारों का आक्रोश कुछ ठण्डा पड़ा और वहां से
वापस चले आये। कुल मिलाकर दिन दहाड़े कोतवाली परिसर में पत्रकार की पिटाई
से जबरदस्त तनाव व्यसाप्त है।
राजनैतिक दलों ने की घटना की निन्दा
बाराबंकी। कोतवाली परिसर में ही दिन दहाड़े एक पत्रकार की पिटाई पर
कांग्रेस नेता विजय पाल गौतम ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की
कोई चीज नही है। थानों पर पुलिस अधिकारी नही सपा सरकार के गुण्डे तैनात
किये गये हैं। उन्होने आगे कहा कि कोतवाली पुलिस द्वारा पत्रकार के साथ
की गयी इस घटना के विरोध में जनपद के कांग्रेसी एकजुट हैं और आर पार की
लड़ाई लड़ेंगे। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष अवधेश श्रीवास्तव ने कहा है कि
प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नही रह गयी है। कानून के
रखवाले जो थानों पर तैनात है। वह सपा पार्टी के एजेण्ट बनकर काम कर रहे
हैं। उन्होने कहा कि पत्रकार उत्पीड़न के मामले में पूरी भाजपा पत्रकारों
के साथ खड़ी है और इस मुद्दे को लेकर आर पार की लड़ाई लड़ी जायेगी। वहीं
भाजपा के युवा नेता सतीश शर्मा ने कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा सरकार बनी
है। उनके कार्यकाल में हमेशा से ही पत्रकार निशाने पर रहा है। क्योंकि
सपा चाहती है। उसके गलत कामों को पत्रकार न उजागर करे। वह सिर्फ सरकारी
लेखनी बनकर उनकी हां में हां मिलाती रहे। वहीं इस मुद्दे पर सपा के
विधायक व अन्य नेता बयान देने में कन्नी काटते रहे। बसपा के पूर्व सांसद
कमला प्रसाद रावत ने कहा कि सपा की सरकार नही है। ये गुण्डो और मवालियों
की सरकार है। इसमें एक विशेष जाति के वर्ग के लोगों को थानों पर तैनात
किया जाता है और उनसे मन चाहा काम लिया जाता है। उन्होने कहा कि बसपा इस
मुद्दे पर पत्रकारों के साथ है।
पत्रकारों ने किया पुलिस प्रेस कांफ्रेंस का बहिष्कार
पत्रकार की पिटाई से आक्रोशित जब उनके साथी पत्रकार कोतवाली में प्रदर्शन
कर रहे थे उस समय कप्तान के पीआरओ राजकुमार तिवारी का पत्रकारों के पास
फोन आया कि एसपी साहब कि प्रेस वार्ता 2ः30 बुलायी गयी है। आप लोग आने का
कष्ट करें। करीब एक घण्टा बीत गया। जब कोई भी पत्रकार प्रेस वार्ता में
नही पहुंचा तो पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद को करारा झटका लगा। पत्रकारों
ने प्रेस वार्ता के बहिष्कार के बाद यह ऐलान किया कि किसी भी सत्ता पक्ष
के नेता पुलिस का गुडवर्क और जिलाधिकारी की प्रेस विज्ञप्ति का तब तक
बहिष्कार किया जायेगा। जब तक दोषी पुलिस कर्मियों को निलम्बित करके उनके
खिलाफ मुकदमा नही पंजीकृत किया जाता।
बाक्स
पत्रकारों की बैठक आज
बाराबंकी। प्रेस क्लब बाराबंकी के अध्यक्ष ठाकुर की अध्यक्षता में
पत्रकारों की आपात बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें पत्रकार सतीश कश्यप के ऊपर
कोतवाली परिसर में जानलेवा हमले की कड़े शब्दों में निन्दा की गयी। इस
मौके पर बोलते हुए पत्रकार कामरान अल्वी ने कहा कि जब तक दोषी पुलिस
कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही नही की जाती है तब तक हम लोग आर पार की
लड़ाई लड़ेंगे। इसके लिये चाहे विधानसभा ही क्यों न घेरनी पड़े। वहीं
अध्यक्ष अखिलेश ठाकुर ने बताया कि 23 जून की दोपहर 12 बजे जिला पंचायत के
सभागार में पत्रकारों की बैठक बुलायी गयी है। बैठक में इस मुद्दे को लेकर
योजना बनायी जायेगी और अपने हक की लड़ाई लड़ी जायेगी। बैठक में मुख्य रुप
से रिजवान मुस्तफा, मो.अतहर, प्रदीप सारंग, मो. आमिर, आसिफ हुसैन, संतोष
शुक्ला, सुमंगल दीप त्रिवेदी, आरके पाण्डेय, पाटेश्वरी प्रसाद मनीष सिंह,
विश्वनाथ सोनी, कपिल यादव, आदित्य, आनन्द सहित सैकड़ो पत्रकार मौजूद रहे।
डीएम ने मांगा दो दिन का समय
बाराबंकी। पत्रकार सतीश कश्यप के मुद्दे पर जब जिलाधिकारी अजय यादव ने
वरिष्ठ पत्रकारों को फोन करके वार्ता के लिये अपने कार्यालय पर बुलाया तो
सैकड़ो पत्रकार कार्यालय के बाहर पहुंच गये। जिसमें जिलाधिकारी ने पांच
पत्रकारांे को प्रतिनिधि मण्डल के रुप में अपने पास बुलाकर करीब आधे
घण्टे तक पत्रकारों से वार्ता की। सभी पत्रकार इसी मुद्दे पर अड़े रहे कि
दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही की जाये। हमेशा
कार्यवाही करने के नाम पर चर्चित जिलाधिकारी पूरी तरह से कूल डाउन रहे।
उन्होने बार-बार यही कहा कि मुझे दो दिन का समय चाहिये। दो दिन में जांच
करवाकर कार्यवाही करुंगा। जिलाधिकारी के इस टालू रवैये से पत्रकारांे में
आक्रोश व्याप्त है। पत्रकारों का कहना था कि अगर यही वारदात किसी सत्ता
पक्ष के नेता या विधायक के साथ घटी होती तो उस घटना पर भी पुलिस का यही
रवैया होता। कुल मिलाकर जिलाधिकारी के आश्वासन पर पत्रकार मान तो गये।
लेकिन इन दो दिनों के अन्दर पत्रकारों ने आगे की रणनीति बनाने की योजना
भी बना रखी है।
करवाने की बात को लेकर एक इलेक्ट्रानिक चैनल के पत्रकार को प्रभारी
निरीक्षक ने कोतवाली में बुलाया और उसके बाद जब पत्रकार ने सुलह करने से
इंकार कर दिया तो कोतवाली परिसर के अन्दर ही कोतवाल ने पत्रकार से जमकर
अभद्रता की और वहीं पर मौजूद एक चौकी इंचार्ज व आधा दर्जन सिपाहियों ने
पत्रकार को दौड़ा-दौड़ाकर कोतवाली के अन्दर जमकर पीटा। बाद में उसको हवालात
में डालने और जेल में सड़ा देने की धमकी भी दी गयी। इस घटना से आक्रोशित
सैकड़ो पत्रकारों ने आरोपी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की
मांग को लेकर पहले कोतवाली में हंगामा काटा और बाद में लखनऊ-फैजाबाद
मार्ग जाम करके अपना विरोध प्रकट किया। खबर लिखे जाने तक जिलाधिकारी से
लेकर पुलिस अधीक्षक तक जांच के बाद कार्यवाही करने की बात करते रहे।
जानकारी के अनुसार कोतवाली नगर क्षेत्र के नगर पंचायत बंकी के निवासी
सतीश कश्यप राजधानी लखनऊ के एक इलेक्ट्रानिक चैनल में जिला संवाददाता के
पद पर कार्यरत हैं। दो दिन पूर्व जल निकासी की बात को लेकर सतीश का विवाद
उसके पड़ोसी अतुल यादव से हो गया था। सतीश ने इसकी शिकायत उसी दिन शाम को
कोतवाली प्रभारी नगर भगवती प्रसाद यादव से की। लेकिन उस शिकायत पर
प्रभारी निरीक्षक ने कोई खास तव्वजो नही दी। आज दोपहर 11 बजे कोतवाली
प्रभारी ने पत्रकार सतीश कश्यप को फोन करके बुलाया और यह कहा कि आईये
आपके विपक्षी को बुलाया है। आईये देखते हैं मामला क्या है। कोतवाल के
बुलाने पर सतीश कश्यप अपने एक सहयोगी पत्रकार सरफराज वारसी के साथ में
कोतवाली पहुंचे। वहां पर कोतवाली प्रभारी ने सतीश पर दबाव बनाया कि अतुल
के साथ में सुलह कर लो। तो सतीश ने कहा कि मेरे विपक्षी ने मेरे साथ
बदसलूकी की है। पहले मेरा मुकदमा दर्ज करो। इतना जैसे ही सतीश ने कहा
वहीं पर खड़े सत्तामद में चूर प्रभारी निरीक्षक भगवती प्रसाद यादव ने सतीश
को गालियां देनी शुरु कर दी और पस में खड़े चौकी इंचार्ज शिवनाथ यादव व
वर्दी में खड़े आधा दर्जन पुलिस कर्मियों को लल्कारा और कहा कि इसकी
पत्रकारिता निकाल दो। इतना मारो की सारी जिंदगी पत्रकारिता करना भूल
जाये। अपने अधिकारी का आदेश सुनते ही चौकी इंचार्ज व सिपाहियों ने सतीश
को पकड़कर कोतवाली परिसर के अन्दर ही दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरु कर दिया।
सतीश चिल्लाता रहा। लेकिन वर्दी के नशे में चूर पुलिस कर्मियों को जरा सा
भी तरस नही आया। इसी बीच सतीश के साथ गये पत्रकार सरफराज वारसी ने जब मना
किया तो कोतवाल ने यह धमकी दी कि जो हालत सतीश की जा रही है। अभी
तुम्हारे साथ भी करवाता हूं। उसके बाद सरफराज बाहर आया और मोबाइल फोन से
अपने साथी पत्रकारों को सूचना दी। कोतवाली परिसर के अन्दर ही पत्रकार की
पिटाई की बात सुनकर सैकड़ो पत्रकार कोतवाली में आ गये और कोतवाल व चौकी
इंचार्ज व पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करके निलम्बन की मांग को
लेकर हंगामा करना शुरु कर दिया। पत्रकारों ने करीब दो घण्टे तक हंगामा
किया। इसके बाद कोतवाली में अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह, सीओ सिटी
विशाल विक्रम सिंह आदि लोग आये। उन लोगों ने पत्रकारों को समझाने का
प्रयास किया और कहा कि जांच के बाद ही कार्यवाही की जायेगी। लेकिन सभी
पत्रकार अपनी जिद पर अड़े रहे। कहा कि जब तक आरोपी पुलिस कर्मियों के
विरुद्ध मुकदमा नही दर्ज किया जायेगा। तब तक हम लोग कोतवाली में ही जमे
रहेंगे। शाम 5 बजे जब जिलाधिकारी अजय यादव ने पत्रकारांे को वार्ता के
लिये डीआरडीए कार्यायल में बुलाया तो वहां जाते समय पत्रकारों ने कचेहरी
के सामने लखनऊ फैजाबाद मार्ग को जाम कर दिया और अपना विरोध प्रकट किया।
करीब आधा घण्टा जाम लगाने के बाद जब दोनो तरफ के वाहनों का आवागमन बंद हो
गया तो उसके बाद पत्रकारों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जाकर उनसे मुलाकात
की। जिलाधिकारी ने कहा कि मुझे दो दिन का समय चाहिये। दो दिन के अन्दर
जांच करवाकर आरोपी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी। डीएम
के आश्वासन पर आक्रोशित पत्रकारों का आक्रोश कुछ ठण्डा पड़ा और वहां से
वापस चले आये। कुल मिलाकर दिन दहाड़े कोतवाली परिसर में पत्रकार की पिटाई
से जबरदस्त तनाव व्यसाप्त है।
राजनैतिक दलों ने की घटना की निन्दा
बाराबंकी। कोतवाली परिसर में ही दिन दहाड़े एक पत्रकार की पिटाई पर
कांग्रेस नेता विजय पाल गौतम ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की
कोई चीज नही है। थानों पर पुलिस अधिकारी नही सपा सरकार के गुण्डे तैनात
किये गये हैं। उन्होने आगे कहा कि कोतवाली पुलिस द्वारा पत्रकार के साथ
की गयी इस घटना के विरोध में जनपद के कांग्रेसी एकजुट हैं और आर पार की
लड़ाई लड़ेंगे। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष अवधेश श्रीवास्तव ने कहा है कि
प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नही रह गयी है। कानून के
रखवाले जो थानों पर तैनात है। वह सपा पार्टी के एजेण्ट बनकर काम कर रहे
हैं। उन्होने कहा कि पत्रकार उत्पीड़न के मामले में पूरी भाजपा पत्रकारों
के साथ खड़ी है और इस मुद्दे को लेकर आर पार की लड़ाई लड़ी जायेगी। वहीं
भाजपा के युवा नेता सतीश शर्मा ने कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा सरकार बनी
है। उनके कार्यकाल में हमेशा से ही पत्रकार निशाने पर रहा है। क्योंकि
सपा चाहती है। उसके गलत कामों को पत्रकार न उजागर करे। वह सिर्फ सरकारी
लेखनी बनकर उनकी हां में हां मिलाती रहे। वहीं इस मुद्दे पर सपा के
विधायक व अन्य नेता बयान देने में कन्नी काटते रहे। बसपा के पूर्व सांसद
कमला प्रसाद रावत ने कहा कि सपा की सरकार नही है। ये गुण्डो और मवालियों
की सरकार है। इसमें एक विशेष जाति के वर्ग के लोगों को थानों पर तैनात
किया जाता है और उनसे मन चाहा काम लिया जाता है। उन्होने कहा कि बसपा इस
मुद्दे पर पत्रकारों के साथ है।
पत्रकारों ने किया पुलिस प्रेस कांफ्रेंस का बहिष्कार
पत्रकार की पिटाई से आक्रोशित जब उनके साथी पत्रकार कोतवाली में प्रदर्शन
कर रहे थे उस समय कप्तान के पीआरओ राजकुमार तिवारी का पत्रकारों के पास
फोन आया कि एसपी साहब कि प्रेस वार्ता 2ः30 बुलायी गयी है। आप लोग आने का
कष्ट करें। करीब एक घण्टा बीत गया। जब कोई भी पत्रकार प्रेस वार्ता में
नही पहुंचा तो पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद को करारा झटका लगा। पत्रकारों
ने प्रेस वार्ता के बहिष्कार के बाद यह ऐलान किया कि किसी भी सत्ता पक्ष
के नेता पुलिस का गुडवर्क और जिलाधिकारी की प्रेस विज्ञप्ति का तब तक
बहिष्कार किया जायेगा। जब तक दोषी पुलिस कर्मियों को निलम्बित करके उनके
खिलाफ मुकदमा नही पंजीकृत किया जाता।
बाक्स
पत्रकारों की बैठक आज
बाराबंकी। प्रेस क्लब बाराबंकी के अध्यक्ष ठाकुर की अध्यक्षता में
पत्रकारों की आपात बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें पत्रकार सतीश कश्यप के ऊपर
कोतवाली परिसर में जानलेवा हमले की कड़े शब्दों में निन्दा की गयी। इस
मौके पर बोलते हुए पत्रकार कामरान अल्वी ने कहा कि जब तक दोषी पुलिस
कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही नही की जाती है तब तक हम लोग आर पार की
लड़ाई लड़ेंगे। इसके लिये चाहे विधानसभा ही क्यों न घेरनी पड़े। वहीं
अध्यक्ष अखिलेश ठाकुर ने बताया कि 23 जून की दोपहर 12 बजे जिला पंचायत के
सभागार में पत्रकारों की बैठक बुलायी गयी है। बैठक में इस मुद्दे को लेकर
योजना बनायी जायेगी और अपने हक की लड़ाई लड़ी जायेगी। बैठक में मुख्य रुप
से रिजवान मुस्तफा, मो.अतहर, प्रदीप सारंग, मो. आमिर, आसिफ हुसैन, संतोष
शुक्ला, सुमंगल दीप त्रिवेदी, आरके पाण्डेय, पाटेश्वरी प्रसाद मनीष सिंह,
विश्वनाथ सोनी, कपिल यादव, आदित्य, आनन्द सहित सैकड़ो पत्रकार मौजूद रहे।
डीएम ने मांगा दो दिन का समय
बाराबंकी। पत्रकार सतीश कश्यप के मुद्दे पर जब जिलाधिकारी अजय यादव ने
वरिष्ठ पत्रकारों को फोन करके वार्ता के लिये अपने कार्यालय पर बुलाया तो
सैकड़ो पत्रकार कार्यालय के बाहर पहुंच गये। जिसमें जिलाधिकारी ने पांच
पत्रकारांे को प्रतिनिधि मण्डल के रुप में अपने पास बुलाकर करीब आधे
घण्टे तक पत्रकारों से वार्ता की। सभी पत्रकार इसी मुद्दे पर अड़े रहे कि
दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही की जाये। हमेशा
कार्यवाही करने के नाम पर चर्चित जिलाधिकारी पूरी तरह से कूल डाउन रहे।
उन्होने बार-बार यही कहा कि मुझे दो दिन का समय चाहिये। दो दिन में जांच
करवाकर कार्यवाही करुंगा। जिलाधिकारी के इस टालू रवैये से पत्रकारांे में
आक्रोश व्याप्त है। पत्रकारों का कहना था कि अगर यही वारदात किसी सत्ता
पक्ष के नेता या विधायक के साथ घटी होती तो उस घटना पर भी पुलिस का यही
रवैया होता। कुल मिलाकर जिलाधिकारी के आश्वासन पर पत्रकार मान तो गये।
लेकिन इन दो दिनों के अन्दर पत्रकारों ने आगे की रणनीति बनाने की योजना
भी बना रखी है।
