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पुलिस का वज्र अभियान पीड़ित के लिए ही बना मुसीबत

एक हत्याकांड में कुख्यात के खिलाफ गवाही देना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया है। पहले दो उस पर हुए हमले में उसने दो सगे संबंधियों को खो दिया। इसके बाद बचा खुचा दनकौर पुलिस उसे प्रताड़ित करने में लगी है।
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दनकौर पुलिस अब गवाह के भतीजे को अवैध हिरासत में रखा है। पीड़ित ने परेशान होकर आरोपियों से समझौता कर लिया। हद तो यह है कि फरवरी में दर्ज मामले में पुलिस नए पुलिस कप्तान धर्मेंद्र सिंह के वज्र अभियान के तहत वारंटियों को पकडने के बजाए पीड़ित पक्ष के लोगों को ही अवैध हिरासत में रखने में जुट गई है।
बिलासपुर में छह लोगों ने 16 जून 2010 को दिल्ली की रहने वाली महिला अफरोज की हत्या कर दी थी। बिलासपुर निवासी अब्दुल रउफ  अपने खेत पर काम कर रहे थे और वह इस घटना को देखा था। पुलिस ने इस मामले में इनको गवाह बना लिया था।
आरोपी पक्ष ने बदला लेने की नियत से अब्दुल के दो भाई कदीर और आबिद की 24 जून 2010 में हमला कर हत्या कर दी थी। कदीर बिलासपुर के नगर पंचायत चेयरमैन थे। इस मामले में भी अब्दुल गवाह बने। दो मामलों में गवाह होने की वजह से उनको सुरक्षा भी दी गई।
इस मामले में उनको अमित कसाना से फोन करवा कर आरोपियों ने धमकी भी दिलवाई थीं। अब्दुल की गवाही की वजह से ही आरोपी पक्ष के छह लोगों को आजीवन कारावास की सजा मिली। इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से प्रशस्ति पत्र भी मिला।
इसके बाद आरोपी पक्ष की महिलाओं ने अब्दुल उसके बेटे और भतीजे पर छेड़छाड़ की शिकायत दी। आरोप है कि तहरीर देने के आठ दिन बाद पुलिस ने दबाव में मामला दर्ज किया।
दो फरवरी 2016 को दर्ज हुए मामले में दनकौर पुलिस ने बृहस्पतिवार रात उनके भतीजे सोहेल को हिरासत में ले रखा है। शुक्रवार को पीड़ित अब्दुल ने एसपीआरए अभिषेक यादव से दनकौर पुलिस की शिकायत की है।
वज्र अभियान के तहत सूची बनाकर अपराधियों की गिरफतारी के निर्देश हें।किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा। मामले में यविद दनकौर पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। -अभिषेक यादव, एसपीआरए

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