उच्चाधिकारियों से की पीड़ित ने शिकायत
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रामसनेहीघाट, बाराबंकी। तहसील दिवसो में की जाने वाली शिकायतो के
निस्तारण में झूठी रिर्पोट देकर फरियादी व अधिकारियों को बेवकूफ बनाया जा
रहा है। अफसरशाही के सामने तहसीलदार से लेकर प्रधानमंत्री तक सब असहाय
हैं तथा समस्याओं का निदान मौके पर नहीं हो पाता रहा है ऐसा ही एक मामला
तहसील रामसनेहीघाट क्षेत्र का सामने आया है जहां पर की गई शिकायत में
समस्या का निस्तारण हुए विना ही निस्तारण दिखाकर उच्चाधिकारियेां को
गुमराह किया गया जिसकी शिकायत भी की गई लेकिन सुनवाई न होने पर ग्रामीणों
ने गत 3 मई को सचिव विद्युत विभाग सहित प्रमुख सचिव उ प्र शासन,
मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, व प्रधानमंत्री आदि से की है। ज्ञात हो कि लोगो
की समस्याओं को सुनकर उनका शत प्रतिशत निस्तारण कराने के लिए प्रदेश भर
में सरकार द्वारा तहसील व थाना दिवस का आयोजन किया जा रहा है
उच्चाधिकारियों के सक्त निर्देश है कि इन दिवसो में आने वाले लोगो को एक
एक समस्याओं के लिए दर्जनो चक्कर न लगाना पडे फिर भी जमीनी हकीकत इन
दिवसो की कुछ और है तथा लोगो को एक एक समस्या के लिए दर्जनो चक्कर लगाने
पड रहे है फिर भी समस्या का निदान नही हो पाता है आखिर में जांच अधिकारी
समस्या का निस्तारण की जूठी रिर्पोट उच्चाधिकारियों को भेज कर उनको
गुमराह कर अपना पिंड शिकायत कर्ता से छडाया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला
तहसील रामसनेहीघाट के सरसा राठौर गांव में देखने को मिला जहां पर की गई
शिकायत का निस्तारण भी नही हुआ और अधिकारी ने समस्या का निस्तारित दिखाते
हुए उच्चाधिकारियेां को झूठी रिर्पोट भेज दी है। सभी जगह फरियाद करने के
बाद जब कही समस्या का समाधान नही हुआ तो ग्रामीणों ने गत 3 मई को सचिव
विद्युत विभाग सहित प्रमुख सचिव उ प्र शासन, मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, व
प्रधानमंत्री आदि से की गयी की है। इस गाँव के ग्रामीणों का आरोप है कि
गांव का विद्युतीकरण राजीव गांधी परियोजना के तहत पिछले छः माह पहले पूरा
किया जा चुका है। गाँव में विद्युतीकरण करने के लिये आये पोलो को बेचकर
अचयनित गाँव में लगा दिया गया है। गाँव के लोगों को कनेक्शन पोल की जगह
बबलू के पेड़ के सहारे दिया गया है। पेड़ के सहारे खीची गयी लाइन कभी भी
जानलेवा हो सकती है लेकिन इसकी जरा भी परवाह लाइन बनाने वालों को नहीं
है। गाँव के रहने वाले डाक प्रभारी शिवकुमार सिंह ने इसकी शिकायत जनवरी
में ही अधिशाषी अभियंता से कर दी थी। जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 29
मार्च को उपखंड अधिकारी द्वारा समस्या का समाधान करके रिपोर्ट भेज दी गयी
थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि विद्युतीकरण का कार्य राजीव गांधी
परियोजना से कराया जा रहा है। उसके बाद भी समस्या का समाधान नही हुआ तो त
16 अप्रैल में पुनः तहसील दिवस में श्किायत की गयी तब भी 29 अप्रैल को यह
कहकर समस्या निक्षेपित करवा दिया गया कि कार्य प्रगति पर है उसके बाद भी
जब गांव में पोल नहीं गड़ा तो 3 मई को इसकी शिकायत सचिव विद्युत विभाग
सहित प्रमुख सचिव उ प्र शासन मुख्यमंत्री लोकायुक्त व प्रधानमंत्री आदि
से की गयी । प्रधानमंत्री ने शिकायत को प्रदेश के मुख्य सचिव के पास भेजा
तो मुख्य सचिव ने फोन करके शिकायत करने वाले से बातचीत की गयी और पूरी
समस्या सुनने के बाद एक टीम गठित करके मौके पर भेजने की बात बताई गयी।
तीसरी बार फोन करके टीम के गाँव जाने की जानकारी ली गयी और जब बताया गया
कि कोई टीम नहीं आयी है तो चुप्प हो गये। इसके बाद फिर न कोई फोन उनका
आया और न ही टीम ही मौके पर आ सकी।गाँव के देशराज सिंह, राम अचल सिंह,
तेजनारायन सिंह, शिवम् सिंह, आशुतोष सिंह, राजकुमार सिंह, राजकरन सिंह,
दुर्गेश सिंह आदि बताते हैं कि अधिकारी समस्या का समाधान नहीं कराते हैं
बल्कि उसे टालकर उच्चाधिकारियो को बेवकूफ बना रहे हैं।
निस्तारण में झूठी रिर्पोट देकर फरियादी व अधिकारियों को बेवकूफ बनाया जा
रहा है। अफसरशाही के सामने तहसीलदार से लेकर प्रधानमंत्री तक सब असहाय
हैं तथा समस्याओं का निदान मौके पर नहीं हो पाता रहा है ऐसा ही एक मामला
तहसील रामसनेहीघाट क्षेत्र का सामने आया है जहां पर की गई शिकायत में
समस्या का निस्तारण हुए विना ही निस्तारण दिखाकर उच्चाधिकारियेां को
गुमराह किया गया जिसकी शिकायत भी की गई लेकिन सुनवाई न होने पर ग्रामीणों
ने गत 3 मई को सचिव विद्युत विभाग सहित प्रमुख सचिव उ प्र शासन,
मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, व प्रधानमंत्री आदि से की है। ज्ञात हो कि लोगो
की समस्याओं को सुनकर उनका शत प्रतिशत निस्तारण कराने के लिए प्रदेश भर
में सरकार द्वारा तहसील व थाना दिवस का आयोजन किया जा रहा है
उच्चाधिकारियों के सक्त निर्देश है कि इन दिवसो में आने वाले लोगो को एक
एक समस्याओं के लिए दर्जनो चक्कर न लगाना पडे फिर भी जमीनी हकीकत इन
दिवसो की कुछ और है तथा लोगो को एक एक समस्या के लिए दर्जनो चक्कर लगाने
पड रहे है फिर भी समस्या का निदान नही हो पाता है आखिर में जांच अधिकारी
समस्या का निस्तारण की जूठी रिर्पोट उच्चाधिकारियों को भेज कर उनको
गुमराह कर अपना पिंड शिकायत कर्ता से छडाया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला
तहसील रामसनेहीघाट के सरसा राठौर गांव में देखने को मिला जहां पर की गई
शिकायत का निस्तारण भी नही हुआ और अधिकारी ने समस्या का निस्तारित दिखाते
हुए उच्चाधिकारियेां को झूठी रिर्पोट भेज दी है। सभी जगह फरियाद करने के
बाद जब कही समस्या का समाधान नही हुआ तो ग्रामीणों ने गत 3 मई को सचिव
विद्युत विभाग सहित प्रमुख सचिव उ प्र शासन, मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, व
प्रधानमंत्री आदि से की गयी की है। इस गाँव के ग्रामीणों का आरोप है कि
गांव का विद्युतीकरण राजीव गांधी परियोजना के तहत पिछले छः माह पहले पूरा
किया जा चुका है। गाँव में विद्युतीकरण करने के लिये आये पोलो को बेचकर
अचयनित गाँव में लगा दिया गया है। गाँव के लोगों को कनेक्शन पोल की जगह
बबलू के पेड़ के सहारे दिया गया है। पेड़ के सहारे खीची गयी लाइन कभी भी
जानलेवा हो सकती है लेकिन इसकी जरा भी परवाह लाइन बनाने वालों को नहीं
है। गाँव के रहने वाले डाक प्रभारी शिवकुमार सिंह ने इसकी शिकायत जनवरी
में ही अधिशाषी अभियंता से कर दी थी। जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 29
मार्च को उपखंड अधिकारी द्वारा समस्या का समाधान करके रिपोर्ट भेज दी गयी
थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि विद्युतीकरण का कार्य राजीव गांधी
परियोजना से कराया जा रहा है। उसके बाद भी समस्या का समाधान नही हुआ तो त
16 अप्रैल में पुनः तहसील दिवस में श्किायत की गयी तब भी 29 अप्रैल को यह
कहकर समस्या निक्षेपित करवा दिया गया कि कार्य प्रगति पर है उसके बाद भी
जब गांव में पोल नहीं गड़ा तो 3 मई को इसकी शिकायत सचिव विद्युत विभाग
सहित प्रमुख सचिव उ प्र शासन मुख्यमंत्री लोकायुक्त व प्रधानमंत्री आदि
से की गयी । प्रधानमंत्री ने शिकायत को प्रदेश के मुख्य सचिव के पास भेजा
तो मुख्य सचिव ने फोन करके शिकायत करने वाले से बातचीत की गयी और पूरी
समस्या सुनने के बाद एक टीम गठित करके मौके पर भेजने की बात बताई गयी।
तीसरी बार फोन करके टीम के गाँव जाने की जानकारी ली गयी और जब बताया गया
कि कोई टीम नहीं आयी है तो चुप्प हो गये। इसके बाद फिर न कोई फोन उनका
आया और न ही टीम ही मौके पर आ सकी।गाँव के देशराज सिंह, राम अचल सिंह,
तेजनारायन सिंह, शिवम् सिंह, आशुतोष सिंह, राजकुमार सिंह, राजकरन सिंह,
दुर्गेश सिंह आदि बताते हैं कि अधिकारी समस्या का समाधान नहीं कराते हैं
बल्कि उसे टालकर उच्चाधिकारियो को बेवकूफ बना रहे हैं।

