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प्रियंका को यूपी चुनाव में कांग्रेस की कमान सौंपने से क्या बदलेगी पार्टी की किस्मत?

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने आस्तीनें चढ़ा ली हैं। बिसात पर मोहरे बिछाए जा रहे हैं। महारथी अपनी जगह तैनात हो रहे हैं। सभी पार्टियों के लिए ये चुनाव सत्ता की लड़ाई है, सिवाय कांग्रेस के। कांग्रेस के लिए तो ये अस्तित्व बचाए रखने की चुनौती है। इसीलिए कांग्रेस का हरेक कदम उसके भविष्य की नींव माना जा रहा है।
इस चुनाव में प्रशांत किशोर कांग्रेस के सारथी बने हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वो जो काम हाथ में लेते हैं उसे पूरा कर दिखाते हैं। इन प्रशांत किशोर का ही सुझाव है कि कांग्रेस को अपनी इस बाजी में जान फूंकना है तो प्रियंका गांधी को मैदान में उतारना होगा। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रियंका चुनाव मैदान में उतरेंगीं? अगर हां, तो किस रूप में।
प्रियंका अबतक चुनावी मैदान में उतरती रही हैं, पर अपनी मां और भाई की सारथी बनकर। लेकिन इस बार क्या वो कांग्रेस के अस्तित्व को बचाने के लिए चुनाव मैदान में उतरेंगी? इसी सवाल के जवाब का सभी को इंतजार है। इसके बाद का सवाल ये है कि प्रियंका गांधी अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरती हैं, तो कांग्रेस को कितना फायदा होगा?
प्रियंका की शख्सियत को देखें तो यकीनन कांग्रेस उनके मैदान में आने से बड़ा मैदान मार सकती है। इसकी दो वजहें हैं। पहला तो खुद प्रियंका का वजूद ही है, जिसमें लोग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अक्स देखते हैं। दूसरी वजह उनका व्यक्तित्व है। राहुल के उलट, वे लोगों से जुड़ने की कला में माहिर हैं। राजनीतिक विरोधियों को उन्हीं की शैली में जवाब देना जानती हैं।
प्रियंका ने जब भी रायबरेली और अमेठी में मां सोनिया गांधी व भाई राहुल गांधी के चुनाव प्रचार की कमान संभाली है, उन्हें कामयाबी मिली है। उनकी चुनावी व्यवस्था के आगे दिग्गज पस्त होते रहे हैं। ऐसे में अगर प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस का चेहरा बनती हैं या चुनाव प्रचार की कमान संभालती हैं तो वो कांग्रेस को वो संजीवनी दे पाएंगी जिसका पार्टी को लंबे समय से इंतजार है।

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