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खेल ही खेल में गयी थी राजकुमार की जान

अजमी रिज़वी
बाराबंकी। थाना कोठी अन्तर्गत एक सप्ताह पूर्व बसपा नेता राजकुमार रावत
की हत्या उनके अपने दोस्तों ने ही की थी। पुलिस ने इस सम्बन्ध में तीन
व्यक्तियों को अवैध असलहे के साथ गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। अपर पुलिस
अधीक्षक ने इस गुडवर्क से खुश होकर पुलिस टीम को पांच हजार रुपये नकद
ईनाम देने की घोषणा की। जानकारी के अनुसार बीते 1 जुलाई की रात 11 बजे
थाना कोठी क्षेत्र के ग्राम अजमल पट्टी निवासी राजकुमार रावत पुत्र
पूर्णमासी की मोटर साइकिल से घर वापस लौटते समय गोली मार दी गयी थी।
जिसकी इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गयी थी। चूंकि मृतक बसपा का
क्षेत्रीय नेता था। इसलिये पुलिस ने तत्काल मृतक के पिता की तहरीर पर
गांव के ही बद्री प्रसाद, किशोर कुमार और काली प्रसाद को नामजद किया था।
मुकदमा दर्ज करने के बाद थाना प्रभारी कोठी ने रात को ही दबिश देकर घर
में सो रहे तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और थाने ले आयी।
लेकिन काफी पूछताछ के बाद भी कोठी पुलिस को लगा कि जिन लोगों को इस घटना
में नामजद किया गया है। वह लोग निर्दोष हैं। इसके बाद पुलिस ने नये सिरे
से जब छानबीन शुरु की तो पुलिस के हाथ कई सूत्र लगे। आज सुबह जब पुलिस ने
सदरपुर चौराहे के पास ननकऊ रावत पुत्र फन्ने निवासी मलौली थाना सतरिख को
गिरफ्तार किया तो सारी हकीकत सामने आ गयी। कोठी पुलिस ने इस घटना के अन्य
आरोपी महेश पुत्र रामफेर निवासी अजमल पट्टी और राजू पुत्र शुकई निवासी
मलौली को भी गिरफ्तार कर लिया। इनकी निशा देही पर पुलिस ने हत्या में
प्रयोग किया गया तमंचा भी बरामद कर लियां घटना के बारे में प्रेस वार्ता
के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि महेश कुमार और काली प्रसाद के
बीच कीमती जमीन पर कब्जेदारी को लेकर विवाद चल रहा था। बसपा नेता
राजकुमार ने महेश से तीस हजार रुपये नकद लेकर जमीन महेश को दिलाने का
वादा किया था। लेकिन काफी दौड़ भाग के बाद भी जब महेश को जमीन नही मिली तो
घटना के चार दिन पूर्व राजकुमार ने महेश उनके साले ननकऊ और राजू के साथ
एक रणनीति तेयार की और यह कहा कि अगर मेरे हाथ में तुम लोग गोली मार देना
जिसके बाद मैं इस मुकदमें में काली प्रसाद और उनके अन्य साथियों को जेल
भिजवा दूंगा। जेल जाने के बाद सारी जमीन पर मैं कब्जा कर लूंगा। घटना
वाली रात जब राजकुमार मोटर साइकिल से घर के लिये चला तो पीछे मोटर साइकिल
पर सवार ननकऊ और राजू भी पीछे साथ में चल दिये। अजमल पट्टी के पास ननकऊ
ने हाथ को निशाना बनाकर गोली चलायी लेकिन गोली हाथ पर न लगकर पीठ पर जा
लगी। जो राजकुमार के मौत का कारण बनी। पुलिस अधीक्षक ने इस गुडवर्क में
शामिल थाना प्रभारी बृजेश कुमार सिंह, उप निरीक्षक शिवनेत्र सिंह व अन्य
पुलिसकर्मियों को पांच हजार रुपये ईनाम देने की घोषणा की।
सर्विलांस सेल से लगा सुराग
बाराबंकी। मृतक राजकुमार ने अपने विरोधियों को फसाने की योजना तो सही
बनायी थी लेकिन निशाना चूकने के कारण उसको जान से हाथ धोना पड़ा। उसकी मौत
के बाद उसके पिता ने मृतक के विरोधी काली, बद्री और रामकिशोर को हत्या के
मुकदमें में नामजद भी कर दिया था। लेकिन जब पुलिस ने कई दिनो तक हिरासत
में रखने के बाद कड़ाई से पूछताछ भी की। लेकिन इन तीनों आरोपियों से पुलिस
को कोई ठोस सबूत नही मिला तो उसके बाद सर्विलांस सेल से पुलिस ने जांच
पड़ताल शुरु की और जैसे ही ननकऊ पुलिस की हिरासत में आया सारी कहानी ही
साफ हो गयी और पुलिस ने दो दिनों के अन्दर दूध का दूध और पानी का पानी
अलग कर दिया। शायद इसी वजह से असली मुल्जिम जेल भेज दिये गये और निर्दोष
बरी हो गये। जिस किसी ने भी इस घटना के बारे में सुना तो सभी ने पुलिस
टीम की तारीफ ही की।

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