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बेघर हुए बाढ़ पीड़ित, आश्वासन के पिटारे में झूल रही आशाएं

बाराबंकी। घाघरा नदी की बाढ़ से सरदहा, परसा, बबुरी, कोठीडीहा,
सिरौलीगुंग, भयाराम पुरवा, सनावा, भौरीकोल, कोठरी गौरिया, इटहुआ पश्चिम
आदि गांवों में दुश्वारियां बढ़ गयी हैं। बाढ़ पीड़ित गांव छोड़कर अलीनगर,
रानीमऊ, तटबंध पर अपने गांवों के सामने आकर रुके हुए है। तहसील प्रशासन
की ओर से नायब तहसीलदार मो. हारून राजस्व कर्मियों के साथ पर बांध पर
पहुंच कर लंच पैकेट, त्रिपाल, पन्नी का वितरण किया। वहीं भाजपा नेता
विशाल सिंह ने पत्रकारों से कहा है कि बाढ़ राहत के नाम पर प्रशासन मात्र
औचारिकता निभा रहा है। अधिकांश गरीब बाढ़ पीड़ितों को तिरपाल, पन्नी व लंच
पैकेट नही मिलें हैं। जिसकी शिकायत युवा भाजपा नेता ने जिलाधिकारी से
किया है। नायब तहसीलदार मो. हारुन ने बताया है कि जिनको तिरपाल, पन्नी की
आवश्यकता है वह गांवों से निकल कर बांध पर आकर टिकें हैं। उन्हे
प्राथमिकता दी जा रही है। शेष लोग भी जब बांध पर आ जायेंगें। उन्हे भी
बाढ़ राहत सामग्री मुहैय्या करायी जायेगी। लंच पैकेट उनके पास पर्याप्त
मात्रा में है जितने भी लोग बांध पर मिले उन सभी को भोजन दिया गया है।
उधर भैयाराम पुरवा, सनावा, भौरीकोल, कोठरी गौरिया, इटहुवा पश्चिम में बाढ़
के पानी से ग्रामीणों की दुश्वारियों मुश्किलें बढ़ गयी हैं। किसी प्रकार
लोगों को भोजन तो मिल जाता है किन्तु पशुओं के चारों की गम्भीर समस्या
है। बांध पर पशु भूखंे भों-भों चिल्ला रहे हैं। एसडीएम प्रभाकान्त अवस्थी
व तहसीलदार ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया है।

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