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केन्द्रीय कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग से होगा नुकसान: पुनिया

बाराबंकी। 70सालों के केन्द्रीय वेतन आयोग के इतिहास में सांतवे वेतन
आयोग की सिफारिश सबसे निराशाजनक हैं और सरकार द्वारा सांतवे वेतन आयोग की
सिफारिशों को बिना किसी संशोधन के स्वीकार किये जाने से सशस्त्र बल सहित
केन्द्र सरकार के कर्मचारी सरकार के फैसले से हताश एवं परेशान हैं। बड़े
दुख की बात हैं कि जिन कर्मचारियों को कांग्रेस की यूपीए सरकार के दौरान
वेतन में 40 प्रतिशत की वृद्धि मिली थी, उन्हें अब केवल 14.27 प्रतिशत की
वृद्धि दी जा रही हैं। सरकार का यह निर्णय सशस्त्र बलों सहित सभी
कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों के लिये अपमान एवं अन्याय हैं। उक्त
प्रतिक्रिया राज्यसभा सदस्य डा. पीएल पुनिया ने केन्द्रीय मंत्रिमण्डल
द्वारा सांतवें वेतन आयोग की सिफारिशों को 29 जून 2016 को अपना अनुमोदन
देने पर व्यक्त किया। राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री पुनिया ने कहा कि उम्मीद
की जा रही थी कि केन्द्र की मोदी सरकार खासकर कम वेतन पाने वाले
कर्मचारियों के लिये आयोग द्वारा सुझाये गये फायदों में वृद्धि करेंगी
लेकिन सरकार द्वारा रिपोर्ट का आकलन कर अपने सुझाव देने वाली गठित कमेटी
ने अपने राजनैतिकआकाओं के दबाव में वेतन आयोग द्वारा दी गयी सिफारिशों
में किसी सुधार की सलाह नही दी जिसके कारण सातवां वेतन आयोग सशस्त्र बलों
सहित सभी शासकीय कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति सुधारने में बुरी तरह फेल
हो गया हैं। इन सिफारिशों को कर्मचारियों के लिये उपयोगी बनाने एवं उनकी
जरूरतों को पूरा करने के लिये इसमें भारी परिवर्तन की जरूरत हैं क्योंकि
कर्मचारी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद अपने वेतन में वृद्धि और
जीवन शैली में सुधार की उम्मीद कर रहे थे। इन सिफारिशों से उनके सारे
सपनें बिखर गये हैं और कर्मचारी बुरी तरह टूट गया हैं उसके पास आक्रोशित
होने और आन्दोलन के सिवाय कोई विकल्प शेष नही बचा हैं।

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