महाराज पंकज के कार्यक्रम में शामिल हुए सैकड़ो भक्त
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जैदपुर, बाराबंकी। ग्राम जराहरा में मथुरा नगरी के विश्व विख्यात सन्त
बाबा जयगुरू देव के उत्तराधिकारी पूज्य पंकज जी महाराज के सत्संग
कार्यक्रम में सैकड़ो भक्त शामिल हुए। जैदपुर क्षेत्र के ग्राम जराहरा
स्थित गुरूवार की सुबह से हजारो की सख्ंया में भक्तो की भीड़ जमा होनी
शुरू हो गई। गाड़ियो बसो व टैªक्टर-टाली से भक्त पहंुचे। 11 बजे के बाद
शुरू हुए सत्ंसग में पंकज जी महाराज ने कहा कि मानव तन बेशकीमती हैं। वह
चौरासी लाख योनियो में भटकने के बाद प्रभु को पाने के लिये मिलता हैं। यह
स्थायी नही, सब कुछ मिट जाने वाला हैं। मौत निश्चित हैं। सब कुछ यहंा छोड़
कर जाना होगा। मौत की असहनीय पीड़ा सबको रूलाती हैं। जागने का समय अभी
हैं। जागकर भगवान का भजन कर लो। वर्ना समय निकल जाने पर बहुत पछतावा
होगा। उन्होने प्रभु प्राप्ति के लिये नाम योग साधना को कलयुग की एक
मात्र साधना करार देते हुए सबके भजन करने की सलाह दी। उन्होने गाना गाने
व बाजा बजाने को भजन की नकल कहा। मानव शरीर में उतरने वाली आकाशवाणियो को
असली भजन बताया। भजन करने से ही कष्ट कलेश जाएगे। पंकज महाराज जी ने जय
गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था को पूर्ण धार्मिक एंव शुद्व आध्यात्मिक
संस्था बताते हुए उसके द्वारा निरन्तर किये जा रहे चैरिटेबुल कार्यो की
तरफ इशारा किया और कहा जय गुरूदेव नाम किसी साधारण मनुष्य का नही, प्रभु
परमेंश्वर का रक्त का जागृत एंव सिद्ध किया हुआ नाम हैं। मुझे जयगुरूदेव
नाम की अपने गुरू महाराज की पूजा करवानी हैं। वह इतना बड़ा नाम का जहाज
लगाकर गये कि सृष्टि के सभी जीव चढ़ जाए तो भी खाली जाएगा। उन्होने
उपद्रवी और हिंसक घटना को अंजाम देने वाले तथाकथित सत्याग्रहियो के सरगना
का नाम जयगुरू देव आश्रम से जोड़ने पर गहरी आपत्ति की। इस अवसर पर यात्रा
में शामिल डा. राम कृष्ण यादव, डा. केके मिश्रा, बाबूराम सहित हजारो की
संख्या में भक्त मौजूद थे।
बाबा जयगुरू देव के उत्तराधिकारी पूज्य पंकज जी महाराज के सत्संग
कार्यक्रम में सैकड़ो भक्त शामिल हुए। जैदपुर क्षेत्र के ग्राम जराहरा
स्थित गुरूवार की सुबह से हजारो की सख्ंया में भक्तो की भीड़ जमा होनी
शुरू हो गई। गाड़ियो बसो व टैªक्टर-टाली से भक्त पहंुचे। 11 बजे के बाद
शुरू हुए सत्ंसग में पंकज जी महाराज ने कहा कि मानव तन बेशकीमती हैं। वह
चौरासी लाख योनियो में भटकने के बाद प्रभु को पाने के लिये मिलता हैं। यह
स्थायी नही, सब कुछ मिट जाने वाला हैं। मौत निश्चित हैं। सब कुछ यहंा छोड़
कर जाना होगा। मौत की असहनीय पीड़ा सबको रूलाती हैं। जागने का समय अभी
हैं। जागकर भगवान का भजन कर लो। वर्ना समय निकल जाने पर बहुत पछतावा
होगा। उन्होने प्रभु प्राप्ति के लिये नाम योग साधना को कलयुग की एक
मात्र साधना करार देते हुए सबके भजन करने की सलाह दी। उन्होने गाना गाने
व बाजा बजाने को भजन की नकल कहा। मानव शरीर में उतरने वाली आकाशवाणियो को
असली भजन बताया। भजन करने से ही कष्ट कलेश जाएगे। पंकज महाराज जी ने जय
गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था को पूर्ण धार्मिक एंव शुद्व आध्यात्मिक
संस्था बताते हुए उसके द्वारा निरन्तर किये जा रहे चैरिटेबुल कार्यो की
तरफ इशारा किया और कहा जय गुरूदेव नाम किसी साधारण मनुष्य का नही, प्रभु
परमेंश्वर का रक्त का जागृत एंव सिद्ध किया हुआ नाम हैं। मुझे जयगुरूदेव
नाम की अपने गुरू महाराज की पूजा करवानी हैं। वह इतना बड़ा नाम का जहाज
लगाकर गये कि सृष्टि के सभी जीव चढ़ जाए तो भी खाली जाएगा। उन्होने
उपद्रवी और हिंसक घटना को अंजाम देने वाले तथाकथित सत्याग्रहियो के सरगना
का नाम जयगुरू देव आश्रम से जोड़ने पर गहरी आपत्ति की। इस अवसर पर यात्रा
में शामिल डा. राम कृष्ण यादव, डा. केके मिश्रा, बाबूराम सहित हजारो की
संख्या में भक्त मौजूद थे।

