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क्या स्मृति बदल पाएंगी टेक्सटाइल की पुरानी तस्वीर?

नई दिल्ली: मानव संसाधन विकास मंत्रालय से निकलकर टेक्सटाइल मंत्रालय पहुंची भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी का आगे का सफर काफी मुश्किल लग रहा है। जिसके चलते स्मृति को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वैसे भी आजकल स्मृति ईरानी को मोदी सरकार की ओर से लगातार झटके मिल रहे हैं। टेक्सटाइल मंत्रालय में सुधार के लिए स्मृति को काफी मेहनत करनी होगी। अब यहां सवाल यह खड़ा होता है कि क्या स्मृति ईरानी अपनी चुनौतियों को पूरा कर पाएंगी।
 साल 2014-15 की टेक्सटाइल की तस्वीर
- 2014-15 के आंकड़ों के मुताबिक देश में टेक्सटाइल उद्योग का आकार लगभग 95 अरब डॉलर  है जिसमें कुल 45 अरब डॉलर का निर्यात है।
-  अन्य वर्षों की तुलना में साल 2014-15 में टेक्सटाइल के निर्यात में काफी कमी दर्ज की गई।
- टेक्सटाइल का जीडीपी में मात्र 4% योगदान है।
- टेक्सटाइल उद्योग अन्य उद्योगों के मामलों में अधिक रोजगार प्रदान करता है।
- देश में टेक्सटाइल के 1413 मिल हैं जिसमें देश की लगभग 4.5 करोड़ लोग कार्य करते हैं।
- टेक्सटाइल सेक्टर में भारत का मुकाबला बांग्लादेश और वियतनामा से काफी है। ये दोनों ही देश निर्या के क्षेत्र में भारत को पीछे छोड़ रहे हैं।
- भारत में निर्यात की इजाफे की दर केवल 8% है जबकि वियतनामा और बांग्लादेश के निर्यात के इजाफे की दर 12% है।
- साल दर साल टेक्सटाइल मंत्रालय से मिलने वाले धन में गिरावट आ रही है।
- निर्यात न होने के कारण मिले भी बंद हो रही हैं। 586 मिलें साल 2014-15 के बीच में बंद हुई हैं।
 क्या बदल सकते हैं हालात?
- मोदी सरकार ने टेक्सटाइल मंत्रालय को 6 हजार करोड़ रुपये देने का निश्चय किया है ताकि टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा मिल सके।
- मोदी सरकार चाहती है कि आने वाले तीन सालों में इस उद्योग में 1 करोड़ नौकरियों का जन्म हो।
- मोदी सरकार का कहना है कि 11 अरब डॉलर का निवेश मिलने की संभावना।
- जिससे 30 अरब डॉलर का निर्यात संभव हो सकता है।

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