व्यवसाइयों के विरुद्ध ई.ओ. को हमवार कर पालिकाध्यक्ष ने चली दोहरी नीति
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_572.html
🌕वर्ग-विशेष को कर में राहत तो आम व्यवसाइयों पर कामर्शियल कर की कारवाई
असगर नकी/मेहनाज़ अहमद
सुल्तानपुर । "सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का"! ये कहावत नगरपालिका प्रशासन द्वारा भवनों से सम्बंधित की गई कारवाई पर चरितार्थ हो रही है, यहां पालिकाध्यक्ष ने पालिका के प्रशासनिक अधिकारी को हमवार कर दोहरी नीति अपनाते हुए व्यवसाइयों पर भवन कर की कारवाई की है।
गौरतलब रहे कि नगरपालिका में वित्तीय अनिमियताओं के चलते अकसर चर्चाओं में रहने वाले नगरपालिका के अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता है, क़रीब 8-9 वर्षों से इस पद पर आसीन श्री अग्रवाल के विरुद्ध कई बार लोग न्यायालय की शरण में जा चुके हैं और दर्जनों बार से अधिक सभासद इनके खिलाफ़ सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन श्री अग्रवाल अपनी विवादित कार्य पद्धति से बाज़ नहीं आ रहे।
श्री अध्यक्ष से जुड़ा ताज़ा मामला एक बार फिर प्रकाश में आया है जहां अध्यक्ष की शह पर ई.ओ. मुशीर अहमद ने घरनुमा भवनों में चल रहे व्यवसाइयों को कामर्शियल कर की नोटिस भेजी है, सूत्रों की मानें तो ई.ओ. द्वारा की गई इस कारवाई में दोहरी नीति अपनाई गई है, एक ओर जहां अधिकांशतर व्यवसाइयों को कामर्शियल नोटिस भेजी गई है तो अध्यक्ष के वर्ग-विशेष के व्यवसाइयों को पूर्ण रूप से लाभ देते हुए साधारण नोटिस भेज सरकारी खज़ाने को घाटा पहुँचाया गया है, सूत्रों के अनुसार शहर के चौक आदि के व्यवसाई जो की पालिकाध्यक्ष के ख़ास मतदाता हैं उन पर नज़रें करम की गई है।
उधर भरोसेमंद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वयं पालिकाध्यक्ष के भवन में खाद का बड़े पैमाने पर व्यवसाय होता है और इनकी राइस मिल भी शहरी इलाके में है जो रिहायशी भी है, ऐसे में मुख्य सवाल ये है कि क्या ई.ओ. मुशीर अहमद ने इन भवनों का कर कामर्शियल करते हुए पालिकाध्यक्ष को भी इसी रेट से ही नोटिस भेजा है? अगर जवाब हां में है तो आम व्यवसाइयों के विरुद्ध की गई कारवाई जाएज़ है लेकिन अगर जवाब नहीं है तो ये आम व्यवसाइयों के साथ विश्वासघात है, ये वो मुद्दा है जिस पर ज़िला प्रशासन को गम्भीरता से कारवाई करना चाहिए।
सुल्तानपुर । "सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का"! ये कहावत नगरपालिका प्रशासन द्वारा भवनों से सम्बंधित की गई कारवाई पर चरितार्थ हो रही है, यहां पालिकाध्यक्ष ने पालिका के प्रशासनिक अधिकारी को हमवार कर दोहरी नीति अपनाते हुए व्यवसाइयों पर भवन कर की कारवाई की है।
गौरतलब रहे कि नगरपालिका में वित्तीय अनिमियताओं के चलते अकसर चर्चाओं में रहने वाले नगरपालिका के अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता है, क़रीब 8-9 वर्षों से इस पद पर आसीन श्री अग्रवाल के विरुद्ध कई बार लोग न्यायालय की शरण में जा चुके हैं और दर्जनों बार से अधिक सभासद इनके खिलाफ़ सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन श्री अग्रवाल अपनी विवादित कार्य पद्धति से बाज़ नहीं आ रहे।
श्री अध्यक्ष से जुड़ा ताज़ा मामला एक बार फिर प्रकाश में आया है जहां अध्यक्ष की शह पर ई.ओ. मुशीर अहमद ने घरनुमा भवनों में चल रहे व्यवसाइयों को कामर्शियल कर की नोटिस भेजी है, सूत्रों की मानें तो ई.ओ. द्वारा की गई इस कारवाई में दोहरी नीति अपनाई गई है, एक ओर जहां अधिकांशतर व्यवसाइयों को कामर्शियल नोटिस भेजी गई है तो अध्यक्ष के वर्ग-विशेष के व्यवसाइयों को पूर्ण रूप से लाभ देते हुए साधारण नोटिस भेज सरकारी खज़ाने को घाटा पहुँचाया गया है, सूत्रों के अनुसार शहर के चौक आदि के व्यवसाई जो की पालिकाध्यक्ष के ख़ास मतदाता हैं उन पर नज़रें करम की गई है।
उधर भरोसेमंद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वयं पालिकाध्यक्ष के भवन में खाद का बड़े पैमाने पर व्यवसाय होता है और इनकी राइस मिल भी शहरी इलाके में है जो रिहायशी भी है, ऐसे में मुख्य सवाल ये है कि क्या ई.ओ. मुशीर अहमद ने इन भवनों का कर कामर्शियल करते हुए पालिकाध्यक्ष को भी इसी रेट से ही नोटिस भेजा है? अगर जवाब हां में है तो आम व्यवसाइयों के विरुद्ध की गई कारवाई जाएज़ है लेकिन अगर जवाब नहीं है तो ये आम व्यवसाइयों के साथ विश्वासघात है, ये वो मुद्दा है जिस पर ज़िला प्रशासन को गम्भीरता से कारवाई करना चाहिए।

