सम्मान के लड़ाई में हार बर्दास्त नही: अभिषेक
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बाराबंकी। उत्तर प्रदेश प्राथमिक मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ
की एक जिला स्तरीय बैठक का आयोजन गांधी भवन में किया गया। बैठक की
अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अभिषेक श्रीवास्तव ने की। उन्होने समस्त
कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस तरह का रवैया शासन हमारे
लिए रखे हुए है। उसको देखते हुए हमें अपने संगठन को और मजबूत करने की
जरूरत है। जब प्रदेश से लड़ाई का ऐलान हो जायेगा। उस लड़ाई में सबको कूद
पकड़ना है। क्योंकि ये हमारे सम्मान की लड़ाई है। इस लड़ाई में हम हार
बर्दास्त नहीं करेगें। प्रदेश अध्यक्ष जुबेर अहमद ने सभा को सम्बोधित
करते हुए कहा कि संगठन अपनी 70 प्रतिशत की लड़ाई जीत चुका है। आज संगठन
अपने अस्तित्व को मजबूत कर चुका है। मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर कर्मचारी
संघ की एक-एक खबर आज हर बेसिक शिक्षा परिवार का कर्मचारी और शिक्षक संगठन
को पता है। जैसा कि प्रमुख सचिव अजय सिंह ने दो माह का समय मांगा था।
शासनादेश जारी करने के लिए। लगभग वो समय पूरा होने वाला है। अगर इस समय
के बीच में हमारा शासनादेश नहीं आता है तो मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर
कर्मचारी अपनी विभाग की उदासीनता के कारण भूख हड़ताल व आमरण अनशन पर चला
जायेगा। इस बार कर्मचारी कुछ लेकर आयेगा या अपने प्राणों की आहुति देकर
आयेगा। उन्होने सभी कर्मचारियों को संगठन से जुड़ने के लिए और तैयार रहने
के लिए कहा। जल्द ही सबको अपनी परीक्षा में गुजरना होगा। प्रदेश
उपाध्यक्ष एवं संघ लेखाकार कुलदीप द्विवेदी ने कड़क लहजे में कर्मचारियों
से कहा कि कब तक शासन प्रशासन की गलत नीतियों को स्वीकार करते रहेगें।
कभी तो इसके खिलाफ आवाज उठायी जायेगी। अब वो समय आ चुका है। कि हम लोग को
एक जोर दार आवाज इस अन्याय के खिलाफ उठाना है। ये विभागीय तंत्र की
नाकामी है कि एक उच्च स्तरीय डिग्री रखते हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और
एक इण्टर की योग्यता रखते हुए अध्यापक हो जाता है। इन दोनों के बीच क्या
अन्तर है। ये विभाग समझ नहीं पा रहा है। प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष
हरिश्चन्द्र वर्मा ने कर्मचारियों को चेताया कि हमारी लड़ाई शासन से है जब
तक हम एकजुट है तब तक हमें कोई हरा न पायेगा। बैठक के मुख्य रूप से पंकज
बाजपेई प्रदेश सचिव, कुलदीप वर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष, सफीर अहमद, नितिन
श्रीवास्तव, रामराज, अनुपम अवस्थी, अशोक, रामकेश, उदयराज, पावेलराज, पवन
आदि लोग भारी संख्या में उपस्थित रहें।

