मनाया गया भू-जल सप्ताह समारोह
https://husainijnp.blogspot.com/2016/07/blog-post_711.html
बाराबंकी। राम सेवक यादव स्मारक इण्टर कालेज, बड़ेल, बाराबंकी में भू-जल
जागरूकता कार्यक्रम के अन्तर्गत भू-जल सप्ताह समारोह के अवसर पर विचार
गोष्ठी का आयोजन भू-गर्भ जल विभाग उत्तर प्रदेश एवं आंचलिक विज्ञान नगरी
के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष मुख्य
अतिथि भूगर्भ जल विभाग के सलाहकार मुख्य अभियंता शिवमंगल यादव वैज्ञानिक
अनूप मिश्रा एवं विद्यालय प्रबन्धक डा. विकास यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर
किया। विचार गोष्ठी का संचालन आंचलिक विज्ञान नगरी के षिक्षाधिकारी राम
कुमार ने किया। भूगर्भ जल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक अनूप
मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि पानी के अतिरिक्त दोहन से जल स्तर
निरंतर गिरता जा रहा हैं जिसके लिये हम सबको सचेत होने की आवश्यकता हैं
हमे अपने दैनिक जीवन में पानी का दुरूपयोग करने से बचना चाहिए। यदि हम
छोटी-छोटी बातो पर ध्यान दें तो जल के अतिरिक्त दोहन से बच सकते हैं।
सरकार का दायित्व है पेयजल की सुविधा प्रदान करना किन्तु उसके प्रयोग को
सीमित और संरक्षित करना हमारा दायित्व हैं। उन्होने छात्र, छात्राओं को
रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी समुचित जानकारी दी, और छात्र, छा़त्राओं से
पानी का दुरूपयोग न करने का संकल्प कराया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि
शिवमंगल यादव ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज जल स्तर में कमी एक चिंतनीय
विषय हैं पहले तालाबो की अधिकता थी जिनमें वर्षा का पानी इकठ्ठा हुआ करता
था, जो भूगर्भ जल की पूर्ति करता था, किन्तु आज तालाबों की कमी से जल
संकट उत्पन्न हो गया है। उत्तर प्रदेष में 820 ब्लाक हैं जिसमें से 68
क्रिटिकल घोषित हो चुके हैं अर्थात वहां बोरिंग नही की जा सकती हैं।
उन्होने जल संरक्षण के अनेक उपाय बताते हुए अपने घरेलू उपयोग में पानी की
बचत करने का संदेष दिया। डा. विकास यादव ने विचार गोष्ठी में पधारे हुए
अतिथिगणो का आभार व्यक्त किया और कहा कि आज सावन का पहला दिन हैं सावन के
महीने में जल का विशेष महत्व है। यह हमारा सौभाग्य हैं कि सावन के पहले
दिन हम जल संरक्षण पर चर्चा कर रहे है। जिस प्रकार सागर पर सेतु निर्माण
के समय वानर सेना के साथ गिलहरी के योगदान को नही भुलाया जा सकता हैं,
इसी प्रकार जल संरक्षण जैसे महान कार्य में आपका छोटा सा प्रयास भी कम
महत्व का नही होगा। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आज की संगोष्ठी को
सार्थक करना आपका दायित्व हैं।
जागरूकता कार्यक्रम के अन्तर्गत भू-जल सप्ताह समारोह के अवसर पर विचार
गोष्ठी का आयोजन भू-गर्भ जल विभाग उत्तर प्रदेश एवं आंचलिक विज्ञान नगरी
के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष मुख्य
अतिथि भूगर्भ जल विभाग के सलाहकार मुख्य अभियंता शिवमंगल यादव वैज्ञानिक
अनूप मिश्रा एवं विद्यालय प्रबन्धक डा. विकास यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर
किया। विचार गोष्ठी का संचालन आंचलिक विज्ञान नगरी के षिक्षाधिकारी राम
कुमार ने किया। भूगर्भ जल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक अनूप
मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि पानी के अतिरिक्त दोहन से जल स्तर
निरंतर गिरता जा रहा हैं जिसके लिये हम सबको सचेत होने की आवश्यकता हैं
हमे अपने दैनिक जीवन में पानी का दुरूपयोग करने से बचना चाहिए। यदि हम
छोटी-छोटी बातो पर ध्यान दें तो जल के अतिरिक्त दोहन से बच सकते हैं।
सरकार का दायित्व है पेयजल की सुविधा प्रदान करना किन्तु उसके प्रयोग को
सीमित और संरक्षित करना हमारा दायित्व हैं। उन्होने छात्र, छात्राओं को
रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी समुचित जानकारी दी, और छात्र, छा़त्राओं से
पानी का दुरूपयोग न करने का संकल्प कराया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि
शिवमंगल यादव ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज जल स्तर में कमी एक चिंतनीय
विषय हैं पहले तालाबो की अधिकता थी जिनमें वर्षा का पानी इकठ्ठा हुआ करता
था, जो भूगर्भ जल की पूर्ति करता था, किन्तु आज तालाबों की कमी से जल
संकट उत्पन्न हो गया है। उत्तर प्रदेष में 820 ब्लाक हैं जिसमें से 68
क्रिटिकल घोषित हो चुके हैं अर्थात वहां बोरिंग नही की जा सकती हैं।
उन्होने जल संरक्षण के अनेक उपाय बताते हुए अपने घरेलू उपयोग में पानी की
बचत करने का संदेष दिया। डा. विकास यादव ने विचार गोष्ठी में पधारे हुए
अतिथिगणो का आभार व्यक्त किया और कहा कि आज सावन का पहला दिन हैं सावन के
महीने में जल का विशेष महत्व है। यह हमारा सौभाग्य हैं कि सावन के पहले
दिन हम जल संरक्षण पर चर्चा कर रहे है। जिस प्रकार सागर पर सेतु निर्माण
के समय वानर सेना के साथ गिलहरी के योगदान को नही भुलाया जा सकता हैं,
इसी प्रकार जल संरक्षण जैसे महान कार्य में आपका छोटा सा प्रयास भी कम
महत्व का नही होगा। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आज की संगोष्ठी को
सार्थक करना आपका दायित्व हैं।

