सावन के पहले दिन ही शिव मंदिरो पर लाखो भक्तों ने चढ़ाया जल
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रामनगर, बाराबंकी। सावन माह एवं भगवान शिव का आपस में एक अद्भुत संगम
है।सावन आरम्भ होते ही भक्त जन काँवर लेकर नंगे पैर,शरीर पर गेरुआ वस्त्र
धारण कर बोल बम का उदघोष करते हुए अपने आराध्य देव भगवान शिव के रूप में
स्थापित ज्योतिर्लिंगों को जल चढ़ाने के लिए निकल पड़ते है।भारतीय एवं
हिन्दू संस्कृति में सावन माह को भगवान शंकर का माह माना जाता है।सावन
में शिव उपासना को विशेष महत्व दिया गया है। सावन आते ही सारा वातावरण
शिवमय हो जाता है तथा सभी दिशाए हर हर महादेव ,जय शिव के ध्वनियों से
गुंजायमान हो जाती है। इस वर्ष सावन का महीना 20 जुलाई से आरम्भ हुवा
है।सावन के नजदीक आते ही शिवभक्त काँवर यात्रा की तैयारियों में जी जान
से जुट गए है।भगवान शिव के बारे में कहा गया है कि वे
देवत्व,मानवता,रौंद्रता,सुंदरता,निर्माण,संहार,सत् असत् आदि गुणों के मेल
है।शिव अखण्ड है।शिव दिव्य विभूति है।शिव ज्योति है।शिव सच्चिदानन्द
है।शिव को कल्याण के रूप में भी माना गया है।क्षेत्र के महुलारा गांव
निवासी समाजसेवी भोलानाथ मिश्रा, तेजनारायण सुक्ल, अजय तिवारी, भिटरिया
निवासी रामबाबू मिश्र, सचिन श्रीवास्तव, कन्हैयालाल पाल, सवाई निवासी शिव
शंकर वर्मा, राजकुमार के अनुसार शिव अर्थात कल्याण,शिव के बिना सम्भव नही
है।शक्ति के अनेक रूप है।प्रतिकात्मक दृष्टि से धैर्य वीरत्व जिज्ञासा
सत्य क्षमा ज्ञान तथा अन्य आचरणों का प्रतिनिधित्व करते है।बताया जाता है
कि वेदों में शिव रूद्र है वही पुराणों में उनकी व्याख्या अर्धनारीश्वर
के रूप में है। परिवार सञ्चालन का गुण भगवान शिव से सीखना चाहिए। भगवान
शिव के परिवार में माता पार्वती पुत्र कार्तिकेय एवं विघ्नहरण गणेश जी
है।भगवान शिव के गले में नाग देवता है जो गणेश के वाहन मुस के दुश्मन
है।इसी तरह माता पार्वती की सवारी सिंह और भोलेनाथ की सवारी बसहा बैल में
जातीय दुश्मनी है। भगवान कार्तिकेय की सवारी मयूर का नाग से जातीय कटुता
है।भगवान शिव के परिवार के सदस्यों के वाहन एक दूसरे के कट्टर दुश्मन
है।कोई किसी को फूटी आँख देखना नही चाहता है लेकिन भगवान भोलेनाथ की कृपा
से सब एक साथ ही निवास करते है।वहाँ किसी के अंदर एक दूसरे से डर भय नही
है। इस लिए भगवान शिव को मानने वाले भक्तो को अपने अंदर के सभी दुर्गुणों
को त्यागकर तथा एक दूसरे के अंदर परस्पर प्रेम सद्भाव उत्पन्न कर कर्तव्य
निष्ठा एवं ईमानदारी से रहना चाहिए।तभी भगवान भोले भंडारी की पूजा सफल
होगी।सावन के महीने में शिव के साथ पार्वती का पूजन अर्चन करना काफी
लाभप्रद होता है। भगवान शिव को आशुतोष भी कहा गया है। आशुतोष का अर्थ
शीघ्र प्रसन्न होना है देवाधिदेव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते है और अपने
भक्तो के दुःख को दूर करते है।
है।सावन आरम्भ होते ही भक्त जन काँवर लेकर नंगे पैर,शरीर पर गेरुआ वस्त्र
धारण कर बोल बम का उदघोष करते हुए अपने आराध्य देव भगवान शिव के रूप में
स्थापित ज्योतिर्लिंगों को जल चढ़ाने के लिए निकल पड़ते है।भारतीय एवं
हिन्दू संस्कृति में सावन माह को भगवान शंकर का माह माना जाता है।सावन
में शिव उपासना को विशेष महत्व दिया गया है। सावन आते ही सारा वातावरण
शिवमय हो जाता है तथा सभी दिशाए हर हर महादेव ,जय शिव के ध्वनियों से
गुंजायमान हो जाती है। इस वर्ष सावन का महीना 20 जुलाई से आरम्भ हुवा
है।सावन के नजदीक आते ही शिवभक्त काँवर यात्रा की तैयारियों में जी जान
से जुट गए है।भगवान शिव के बारे में कहा गया है कि वे
देवत्व,मानवता,रौंद्रता,सुंदरता,निर्माण,संहार,सत् असत् आदि गुणों के मेल
है।शिव अखण्ड है।शिव दिव्य विभूति है।शिव ज्योति है।शिव सच्चिदानन्द
है।शिव को कल्याण के रूप में भी माना गया है।क्षेत्र के महुलारा गांव
निवासी समाजसेवी भोलानाथ मिश्रा, तेजनारायण सुक्ल, अजय तिवारी, भिटरिया
निवासी रामबाबू मिश्र, सचिन श्रीवास्तव, कन्हैयालाल पाल, सवाई निवासी शिव
शंकर वर्मा, राजकुमार के अनुसार शिव अर्थात कल्याण,शिव के बिना सम्भव नही
है।शक्ति के अनेक रूप है।प्रतिकात्मक दृष्टि से धैर्य वीरत्व जिज्ञासा
सत्य क्षमा ज्ञान तथा अन्य आचरणों का प्रतिनिधित्व करते है।बताया जाता है
कि वेदों में शिव रूद्र है वही पुराणों में उनकी व्याख्या अर्धनारीश्वर
के रूप में है। परिवार सञ्चालन का गुण भगवान शिव से सीखना चाहिए। भगवान
शिव के परिवार में माता पार्वती पुत्र कार्तिकेय एवं विघ्नहरण गणेश जी
है।भगवान शिव के गले में नाग देवता है जो गणेश के वाहन मुस के दुश्मन
है।इसी तरह माता पार्वती की सवारी सिंह और भोलेनाथ की सवारी बसहा बैल में
जातीय दुश्मनी है। भगवान कार्तिकेय की सवारी मयूर का नाग से जातीय कटुता
है।भगवान शिव के परिवार के सदस्यों के वाहन एक दूसरे के कट्टर दुश्मन
है।कोई किसी को फूटी आँख देखना नही चाहता है लेकिन भगवान भोलेनाथ की कृपा
से सब एक साथ ही निवास करते है।वहाँ किसी के अंदर एक दूसरे से डर भय नही
है। इस लिए भगवान शिव को मानने वाले भक्तो को अपने अंदर के सभी दुर्गुणों
को त्यागकर तथा एक दूसरे के अंदर परस्पर प्रेम सद्भाव उत्पन्न कर कर्तव्य
निष्ठा एवं ईमानदारी से रहना चाहिए।तभी भगवान भोले भंडारी की पूजा सफल
होगी।सावन के महीने में शिव के साथ पार्वती का पूजन अर्चन करना काफी
लाभप्रद होता है। भगवान शिव को आशुतोष भी कहा गया है। आशुतोष का अर्थ
शीघ्र प्रसन्न होना है देवाधिदेव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते है और अपने
भक्तो के दुःख को दूर करते है।

