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उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए शीला दीक्षित कांग्रेस की CM उम्मीदवार घोषित

लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को यूपी सीएम कैंडिडेट घोषित किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विेदी ने इसकी पुष्टि की है। सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शीला दीक्षित ने कांग्रेस हाईकमान का शुक्रिया अदा किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जो जिम्मेदारी दी है उसे वह निभाएंगी। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती हूं प्रियंका गांधी चुनाव में कैंपन करें।’
किसको मिला कौन सा पद? 
ऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरमैन-प्रमोद तिवारी
प्रचार समिति के अध्यक्ष-संजय सिंह, प्रियंका, शीला दीक्षित, गुलाम नबी आजाद
संयोजक- जफर अली नकवी
वाइस चेयरमैन-अब्दुल मन्नान अंसारी, चौधरी विजेंद्र सिंह, जितेंद्र प्रसाद, गयादीन अनुरागी।
यूपी की पुत्रवधू के रूप में जानी जाती हैं शीला
तीन बार दिल्ली की सीएम रहीं शीला दीक्षित का उन्नाव और कन्नौज से गहरा नाता रहा है। वह पहली बार यूपी से ही संसद के लिए चुनी गई थीं। 1984 में यूपी के कन्‍नौज सीट से सांसद बनकर संसद पहुंची थी। सासंद का चुनाव जीतने के बाद वह राजीव गांधी के मंत्रीमंडल में पीएम ऑफि‍स की मिनिस्टर बनी थीं। दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने के बाद वह यूपी की राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रहीं। लेकिन शीला अपने आप को यूपी की पुत्रवधू बताने से नहीं चूकतीं।
ब्राह्मण वोट साधने में जुटी कांग्रेस
जहां विपक्षी पार्टियां ओबीसी और दलित चेहरे को प्रोजेक्ट करने में बिजी हैं वैसे में कांग्रेस प्रदेश के 14 फ़ीसदी ब्राह्मण वोट को अपने खेमे में करना चाहती है। दरअसल ब्राह्मण कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक रहा है, लेकिन पिछले 26 सालों में वह बीजेपी, बसपा और सपा में बंट गया है। इसी को साधने के लिए कांग्रेस शीला पर दांव लगा सकती है। दूसरी तरफ कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी कांग्रेस हाई कमांड को सुझाव दिया था कि दलित मायावती को नहीं छोड़ेंगे। इसलिए उसे अपने परम्परागत वोट बैंक ब्राह्मण और मुस्लिम पर फोकस करना चाहिए।
इस सुझाव को मानते हुए गुलाम नबी आजाद को प्रदेश कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया। जिसके बाद उम्मीद थी कि कोई ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष बन सकता है। लेकिन कांग्रेस ने जातीय समीकरण को ध्यान रखते हुए गैर दलित यानी पिछड़ा वर्ग से राज बब्बर को अध्यक्ष बनाया। इससे पार्टी ने ओबीसी वोट को अपने पाले में लाने का प्लान बनाया है। अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस भीड़ से अलग एक ब्राह्मण चेहरे को सीएम कैंडिडेट बनाकर प्रदेश के 14 फ़ीसदी वोट बैंक को यह संदेश देना चाहती है कि वह ही उनकी सच्ची नुमाईंदगी कर रही है। इसके लिए शीला दीक्षित पर कांग्रेस दांव लगा सकती है। हालांकि राजेश मिश्र, प्रमोद तिवारी और जीतीं प्रसाद भी ब्राह्मण मुख्यमंत्री के रूप में चुने जा सकते हैं। क्योंकि शीला की उम्र ज्यादा है और ये अभी युवा हैं।

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