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Exclusive : तो प्रियंका गांधी कांग्रेस की हो सकती हैं संकटमोचन !

असगर नकी
सुल्तानपुर । शीशे के बर्तन की तरह बिखरी कांग्रेस पार्टी सूबे में तीन दशकों से खुद को जोड़कर पहले की तरह दिखने की जुगत लगा रही है लेकिन अबतक कहीं न कहीं कमी रह गई, इस कमी को 2017 में दूर करने के लिये पार्टी उस चेहरे को चुना जिसका नामकरण पी.के. के रूप में हुआ है, जिसने  कमियों को ढ़ूंढ़कर भाजपा को फ़र्श से अर्श पर पहुंचा दिया, इन्हीं की राय पर गुलाम नबी आज़ाद, शीला दीक्षित और राजबब्बर की कंधा अज़माई शुरु हुई और अब इनके साथ स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी के कांधे का सहारा लिया जा रहा है।
गौरतलब रहे की पी.के. कोई मामूली हस्ती नहीं ये सभी जान चुके हैं, 2014 के लोकसभा चुनाव में न सिर्फ़ "यूपीए सरकार" का रिएक्शन चला बल्कि सर मैनेजिंग ने मीडिया का इस्तेमाल खूब जमकर किया जिसमें सोशल मीडिया तो पी.के. के हाथों की कठपुतली था, "जो चाहा, जैसे चाहा वो लिखाया और पढ़ाया गया, यही नहीं अकसर मोबाइल पर 'एक छोटी सी बेल होती' "कभी काल की शक्ल में कभी एसएमएस के रूप में" शब्द एक होता "भाजपा से जुड़े" ये कार्यक्रम चुनाव बाद तक चला, खैर नतीजा सामने है।
लेकिन इस बार थोड़ा मामला अलग है अबकी देश का नहीं प्रदेश का चुनाव है लेकिन हाइटेक युग में हो रहे चुनाव का "रिमोट-कंट्रोल" यानी सर पी.के. कांग्रेस की मुठठी में हैं, उन्हीं के कहे अनुसार सूबे की रूप-रेखा तैयार कर गुलाम नबी आज़ाद, शीला दीक्षित और राजबब्बर को कमान सौंपी गई, सूत्रों के अनुसार स्टार प्रचारक के रूप में कांग्रेस एक बार फिर प्रियंका पर दांव खेलेगी, इसकी एक बानगी पी.के. पूर्व के कामों के अनुसार देखने को मिली है।
सोशल मीडिया पर 'राजदेव समाधान समिति के नाम की आई.डी. से कांग्रेस के सुल्तानपुर का आर.टी.आई. सेल का पेज जुड़ा मिला', जिसमें ख़ास बात ये रही कि सुल्तानपुर के पुराने कांग्रेसियों के साथ हाल ही में 'इसी दरवाज़े से विधान परिषद का सफर तय करने वाले' "दीपक सिंह" की तस्वीर वायरल हुई है, इस मुद्दे से ज़ादा अहम मुद्दा ये रहा की उक्त पेज पर जो संदेश लिखा है वो ये कि....
8090180901 पर काल करें और टीम प्रियंका का हिस्सा बनें, ये संदेश यहीं ख़त्म नहीं हुआ आगे लिखा था "यूपी कांग्रेस के साथ जुड़कर इस महा अभियान के भागीदार बनें"! इससे साफ ज़ाहिर है कि ये दिमाग़ पी.के. का है, जो सूबे में नया गुल खिला सकता है, एक सवाल जो शायद इस संदेश में छिपा हुआ है कि जिस प्रकार भाजपा के लिये पी.के. के दिमाग़ के साथ अमित शाह का नाम हर संदेश में गया और आज भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी पर श्री शाह बैठे हैं वैसा ही जादू अगर सूबे में प्रियंका का चल गया तो कुछ ऐसी ही ज़िम्मेदारी उन्हें भी सौंपी जायेगी? इसका जवाब शायद चुनाव बाद ही मिल सके।

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