इसौली विधायक, विपरण अधिकारी व कोटेदार के खिलाफ ग्रामीण हुए मुखर
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🌕बल्दीराय के ग्राम नन्दौली के सैकड़ो की तादाद में जमा ग्रामीणों ने घेरा ज़िला पूर्ति कार्यालय
असगर नकी
सुल्तानपुर । राशन ग्रामीणों का, लाभ उठा रहे अधिकारी व कोटेदार , जनप्रतिनिधि से न्याय की उम्मीद तो वो भी कालाबाज़ारी करने वालों के हाथों में खेल रहे, इस पर ग्रामीणों का सड़कों पर उतरना जायज़ है, इसी व्यथा के साथ तहसील बल्दीराय के ग्राम नन्दौली के ग्रामीणों ने ज़िला पूर्ति अधिकारी का कार्यालय घेरा था।
सोमवार को बल्दीराय तहसील के नन्दौली गांव के क़रीब सैकड़ा भर महिला-पुरुष ज़िलापूर्ति अधिकारी के दफ्तर पर आ धमके थे, इन गांव वालों का आरोप था कि कोटेदार अंसरी बेगम ने कोटे में अनिमियता एवं कालाबाज़ारी बरती थी जिसको लेकर 3 जून को डीएम की मौजूदगी में तत्कालीन एसडीएम को समस्या से औगत कराया गया था, जिस पर तत्कालीन एसडीएम की निगरानी में विपरण अधिकारी अजय कुमार सिंह ने कुल ग्रामीणों में से 80 का बयान दर्ज किया था, इसी बयान के अनुरूप कोटेदार अंसरी को दोषी पाते हुए एसडीएम ने 4 जून को कार्यवाही करते हुए कोटा निलम्बित कर दिया था, लेकिन ग्रामवासियों के खामोश बैठे ही विपरण अधिकारी अजय सिंह की मिली भगत से 30 जुलाई को कोटा बहाल कर दिया गया, ग्रामीणों की मानें तो बहाली आदेश में 80 ग्रामीणों के लिये गये बयान का समायोजन नहीं किया गया है जिससे स्पष्ट है कहीं न कहीं विभागीय कारवाई में माया रस मिला है, उधर ग्रामीणों की मानें तो कोटेदार असगरी बेगम खुद राशन का वितरण करती ही नहीं बल्कि इसके लिये एकराम उल्ला नाम के व्यक्ति को रख छोड़ा है जो मानक के विपरीत रक़म व तौल करता है। इन तमाम जायज़ शिकायत के बाद अधिकारियों द्वारा मिली मार करने की ख़बर पाने के बाद ग्रामवासियों का मुखर होना लाज़मी था, सोमवार को ज़िला पूर्ति अधिकारी के दफ्तर पर वो नज़ारा देखने को भी मिला, जहां ग्रामीणों ने कोटेदार से लेकर अधिकारियों और इसौली विधायक अबरार अहमद के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की, ग्रामीण अपने छले जाने से इस तरह आहत दिखे कि जहां उन्होंने अधिकारियों को सबक सिखाने का मन बना लिया था वहीं विधायक अबरार को इस बार चुनाव में मज़ा चखाने भी बात कहते सुने गये।
सुल्तानपुर । राशन ग्रामीणों का, लाभ उठा रहे अधिकारी व कोटेदार , जनप्रतिनिधि से न्याय की उम्मीद तो वो भी कालाबाज़ारी करने वालों के हाथों में खेल रहे, इस पर ग्रामीणों का सड़कों पर उतरना जायज़ है, इसी व्यथा के साथ तहसील बल्दीराय के ग्राम नन्दौली के ग्रामीणों ने ज़िला पूर्ति अधिकारी का कार्यालय घेरा था।
सोमवार को बल्दीराय तहसील के नन्दौली गांव के क़रीब सैकड़ा भर महिला-पुरुष ज़िलापूर्ति अधिकारी के दफ्तर पर आ धमके थे, इन गांव वालों का आरोप था कि कोटेदार अंसरी बेगम ने कोटे में अनिमियता एवं कालाबाज़ारी बरती थी जिसको लेकर 3 जून को डीएम की मौजूदगी में तत्कालीन एसडीएम को समस्या से औगत कराया गया था, जिस पर तत्कालीन एसडीएम की निगरानी में विपरण अधिकारी अजय कुमार सिंह ने कुल ग्रामीणों में से 80 का बयान दर्ज किया था, इसी बयान के अनुरूप कोटेदार अंसरी को दोषी पाते हुए एसडीएम ने 4 जून को कार्यवाही करते हुए कोटा निलम्बित कर दिया था, लेकिन ग्रामवासियों के खामोश बैठे ही विपरण अधिकारी अजय सिंह की मिली भगत से 30 जुलाई को कोटा बहाल कर दिया गया, ग्रामीणों की मानें तो बहाली आदेश में 80 ग्रामीणों के लिये गये बयान का समायोजन नहीं किया गया है जिससे स्पष्ट है कहीं न कहीं विभागीय कारवाई में माया रस मिला है, उधर ग्रामीणों की मानें तो कोटेदार असगरी बेगम खुद राशन का वितरण करती ही नहीं बल्कि इसके लिये एकराम उल्ला नाम के व्यक्ति को रख छोड़ा है जो मानक के विपरीत रक़म व तौल करता है। इन तमाम जायज़ शिकायत के बाद अधिकारियों द्वारा मिली मार करने की ख़बर पाने के बाद ग्रामवासियों का मुखर होना लाज़मी था, सोमवार को ज़िला पूर्ति अधिकारी के दफ्तर पर वो नज़ारा देखने को भी मिला, जहां ग्रामीणों ने कोटेदार से लेकर अधिकारियों और इसौली विधायक अबरार अहमद के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की, ग्रामीण अपने छले जाने से इस तरह आहत दिखे कि जहां उन्होंने अधिकारियों को सबक सिखाने का मन बना लिया था वहीं विधायक अबरार को इस बार चुनाव में मज़ा चखाने भी बात कहते सुने गये।

