संकल्प पदयात्रा का नेतृत्व करते समाजवादी चिंतक
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बाराबंकी। ’अंग्रेजो भारत छोड़ो’ आन्दोलन की हीरक जयन्ती (75वीं वर्षगांठ)
पर गांधीवादी विचारक एवं समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा के नेतृत्व में
विभिन्न जनहित के मुद्दों पर आधारित ’संकल्प पदयात्रा’ का आह्वान किया
गया। इस पदयात्रा में रानी लक्ष्मीबाई इण्टर कालेज कुरौली के छात्रों,
युवाओं और नौजवानों में देशभक्ति का जज्बा देखने को मिला। ’देश की जनता
भूखी है, ये आजादी झूठी है, ’इंकलाब जिन्दाबाद’ के गगनभेदी नारों से लोगो
का उत्साह बढ रहा था। यह पदयात्रा श्री नागेश्वरनाथ मंदिर से सिटी इण्टर
कालेज, कटरा मोहल्ला, घंटाघर, धनोखर, नेबलेट तिराहा, छाया चौराहा,
कम्पनीबाग, पुलिस लाइन चौराहा होते हुए गांधी भवन पर समाप्त हुई। इस
संकल्प पदयात्रा के बाद गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा जनहित के
विभिन्न मुद्दों पर आधारित दस सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की संस्तुति पर पूर्व रक्षामंत्री एवं
सांसद मुलायम सिेह यादव द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजा गया।
गांधी भवन में अगस्त क्रान्ति दिवस की हीरक जयन्ती पर आयोजित विचार
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए श्री शर्मा ने बताया कि 8 अगस्त 1942 को
कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन से पूर्व ही महात्मा गांधी सहित देश के
सभी कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को अंग्रेजो ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जिसके बाद 9 अगस्त 1942 को मुम्बई के ग्वालिया टैंक के अगस्त क्रान्ति
मैदान में अरूणा आसफ अली ने बड़ी बहादुरी से तिरंगा लहरा कर अंग्रेजो के
विरूद्ध आजादी की अन्तिम लड़ाई का बिगुल बजाया। जिस लड़ाई में हजारों की
संख्या में देशभक्त शहीद हुए। श्री शर्मा ने कहा कि आजादी के सात दशक
पूरे होने के बाद भी केन्द्र व राज्य की सरकारें गरीबों, किसानो, नौजवानो
और बेराजगारों के लिए कोई जनहित की योजना नहीं चला रही हैं। जिससे जनता
को सीधा लाभ मिले। आय और खर्च की सीमा निर्धारित होनी चाहिए, जो छः हजार
से कम नहीं और साठ हजार से ज्यादा न हो। अंग्रेजी भाषा के वर्चस्व को
समाप्त कर सरकारी, न्यायिक एवं शिक्षा के क्षेत्र में हिन्दी भाषा को
पूर्णतया स्थापित किया जाना चाहिए। श्री शर्मा ने कहा कि सरकारी स्कूलों
की शिक्षा मानवतापरक, सुलभ एंव आधुनिक हो। सभी क्षेत्रो में गन्ने की
खेती का विकास हो, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिल सके। सभी बंद पड़ी
चीनी मिलों को आधुनिकीकरण पर पुनः शुरू कराया जाए। सरकारी दस्तावेजों में
जाति, वर्ग के उल्लेख की बाध्यता को समाप्त किया जाए। विदेशी पूंजी एवं
वस्तुओं का पूर्णतया बहिष्कार किया जाए। खाद्य वस्तुओं के दामों का
निर्धारण किया जाए ताकि लागत खर्च से डेवढ़ा इस फसल से अगली फसल तक न लिया
जाए। किसानों और गरीब जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए खाद्य वस्तुओं
एवं कृषि उपयोग व जनसामान्य की वस्तुओं के मूल्य निर्धारण प्रणाली
स्थापित की जाए, ताकि अधिक मुनाफे की प्रवृत्ति पर रोक लगायी जा सके।
छोटे कृषकों को पशुओं से खेती के लिए नवीनतम् तकनीकी एवं प्रोत्साहन
अनुदान दिया जाए। हिमालय एवं सीमा सुरक्षा को बचाने के लिए सरकारों को
उचित कदम उठाना चाहिए। संगोष्ठी की अध्यक्षता जिला बार एसोशिएसन के पूर्व
अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने किया। कार्यक्रम का संचालन हुमायूं नईम खां ने
किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से वरिष्ठ समाजसेवी अशोक शुक्ला, मृत्युंजय
शर्मा, राजेश प्रताप सिंह ’राजू प्रधान’, समीर सिंह, विनय कुमार सिंह,
रवि प्रताप सिंह, एहतिशाम खान ’बब्लू’, सलाउद्दीन किदवई, इजहार हुसैन,
विजयपाल गौतम, विश्वनाथ सोनी, सादिक हुसैन, अनुपम सिंह राठौर, देवेन्द्र
प्रताप सिंह, आसिफ हुसैन, सुमंगलदीप त्रिवेदी, मनीष सिंह दिनेश कुमार
निषाद, आदित्य यादव, पाटेश्वरी प्रसाद, कपिल यादव, सहित सैकड़ों की संख्या
में लोग मौजूद रहे।
