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मास्टरी तो नही मिली अब आजमायेंगे सफाईकर्मी में किस्मत

बाराबंकी। जनपद में बेरोजगारी का आलम देखिए, जिन्हें गुरु बनकर बच्चों का
भविष्य संवारना था वह गलियों का कूड़ा उठाने का मन बना चुके हैं। रोजी की
खातिर गंदगी से पटी नालियों को साफ करने में भी उन्हें संकोच नहीं। इन
दिनों सफाई कर्मचारियों की भर्ती को लेकर निकले आवेदन फार्म भरने के
दौरान डिग्रीधारियों की भीड़ आसानी से देखी जा सकती है। कुछ ऐसा ही नजारा
डाकघर रामनगर में देखने को मिल रहा है। बुजुर्ग एक कहावत कहा करते हैं
पढ़े फारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल पुराने लोगों के मुंह से यह
कहावत खूब सुनने को मिलती है, लेकिन यह कहावत अब केवल सुनने को नहीं
बल्कि चरितार्थ भी हो रही है। एमए, बीएड डिग्रीधारी अरुण कुमार की पीड़ा
उनकी जुबान पर उस समय छलक गई। जब उनसे उनकी योग्यता जाननी चाही। उनका दो
टूक जवाब था कि दो बार टीईटी पास किया। शिक्षक बनने की तमन्ना थी लेकिन
सरकार के वादों ने हम योग्यताधारियों को कहीं का नहीं छोड़ा। कई प्रयासों
के बाद भी नौकरी नहीं मिलती तो क्या करें, झाड़ू लगाने का काम ही मिल
जाएगा तो कौन सा बुरा है, सरकारी नौकरी तो होगी। सुरेश ही क्यों, आवेदन
करने आए सचिन, कृष्ण कुमार, मो. मतीन, रामशंकर और न जाने कितने ऐसे युवा
हैं जो बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। समाज, परिवार ही नहीं अब तो स्वयं
पर से ही विश्वास उठने लगा है। अपनी प्रतिभा पर शक हो इससे पहले ही आज
युवा कुछ हासिल करने की जुगाड़ में आखिर जो हाथ लगे उसे ही पाने को तैयार
हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से निवास प्रमाण पत्र के लिए जनसेवा
केंद्रों पर भारी भीड़ हो रही है। तहसील के प्रमाण पत्र पटल के लिपिक आरपी
सिंह ने बताया कि प्रमाणपत्र के लिए पिछले दो दिनों में 4000 से अधिक
आवेदन आए हैं। अब पर्याप्त हैं डाक टिकट डाकघर में लिपिक अर्पित सोनी ने
बताया कि पिछले कई दिनों से हजारों के डाक टिकट प्रतिदिन बिक रहे थे। इसी
वजह से कल खत्म हो गए थे, लेकिन आज लगभग 21000 के डाक टिकट आ गए हैं। अब
आवेदकों को टिकट संबंधी समस्या नहीं होगी। इसी तरह का नजारा तहसील
हैदरगढ़, नवाबगंज, जैदपुर, सिद्धौर, सतरिख, दरियाबाद, टिकैतनगर, सुबेहा,
फतेहपुर, देवा, बंकी में भी देखा जा सकता है। क्योंकि जिले की सभी नगर
पंचायतों में सफाईकर्मियों की जगह हजारों में निकली है और अच्छे घराने के
लोग भी सफाईकर्मी की नौकरी पाने के खातिर आवेदन कर रहे हैं।

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