मोदी जी ! होमगार्ड जवानों के खून से लिखे पत्र पर तो इंसाफ दे देते
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🌕वेतन-भत्ता और नियमित किये जाने की मांग को लेकर दूसरे दिन होमगार्ड जवानों ने निकाला शहर में शांति मार्च
🌕शासन-प्रशासन को कराया ताकत का अंदाज़ा
असगर नकी/मेहनाज़ अहमद
सुल्तानपुर । "सबका साथ-सबका विकास" इस नारे के साथ भाजपा सत्ता में आई, अब सत्ता के नशे में भाजपा ऐसी मदहोश हुई कि दिये हुए नारे को ताक पर रख दिया, इसलिए के अपनी जायज़ लड़ाई लड़ते हुए बीते दिनों उ.प्र. होमगार्ड अवैतनिक अधिकारी व कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपने खून से लिखा पत्र प्रधानमंत्री को भेजा लेकिन एक माह बाद भी उनको इंसाफ नहीं मिला, जवानों की मांग ज्यों की त्यों है, आखिर प्रधानमंत्री किसका विकास कर रहे?
मंगलवार को दूसरे दिन भी अपनी मांगो के न मानें जाने से आक्रोशित क़रीब 700 होमगार्ड जवान कार्य का बहिष्कार कर तिकोनिया पार्क के प्रांगण में डटे रहे, जहां राज्य कर्मचारी संगठन के कई नेता भी होमगार्ड जवानों के समर्थन में उतर आये,इस बीच करीब 2 बजे सैकडों से ज्यादा की संख्या में होमगार्ड जवानों ने शहर भर में शांति मार्च निकाल कर शासन-प्रशासन को अपनी ताकत का ऐहसास करवाया।
होमगार्ड जवानों की मांग है कि "12 महीने की ड्यूटी, पुलिस के समान वेतन और पुलिस कर्मियों को मिलने वाली अन्य सुविधाएँ मुहैया कराई जायें"! बताते चलें कि बीती 2 जुलाई को इस आशय से सम्बंधित पत्र होमगार्ड जवानों ने अपने खून से लिखे प्रधानमंत्री को भेजा था, पूरे एक माह बीतने के बाद भी "सबका साथ-सबका विकास" का दम भरने वाले पी.एम. मोदी ने पत्र का संज्ञान लेकर कार्यवाही कर लाभ पहुँचाना मुनासिब नहीं समझा, ऐसी स्थित में होमगार्ड का आक्रोश कभी भी उबाल खा सकता है।
मंगलवार को दूसरे दिन भी अपनी मांगो के न मानें जाने से आक्रोशित क़रीब 700 होमगार्ड जवान कार्य का बहिष्कार कर तिकोनिया पार्क के प्रांगण में डटे रहे, जहां राज्य कर्मचारी संगठन के कई नेता भी होमगार्ड जवानों के समर्थन में उतर आये,इस बीच करीब 2 बजे सैकडों से ज्यादा की संख्या में होमगार्ड जवानों ने शहर भर में शांति मार्च निकाल कर शासन-प्रशासन को अपनी ताकत का ऐहसास करवाया।
होमगार्ड जवानों की मांग है कि "12 महीने की ड्यूटी, पुलिस के समान वेतन और पुलिस कर्मियों को मिलने वाली अन्य सुविधाएँ मुहैया कराई जायें"! बताते चलें कि बीती 2 जुलाई को इस आशय से सम्बंधित पत्र होमगार्ड जवानों ने अपने खून से लिखे प्रधानमंत्री को भेजा था, पूरे एक माह बीतने के बाद भी "सबका साथ-सबका विकास" का दम भरने वाले पी.एम. मोदी ने पत्र का संज्ञान लेकर कार्यवाही कर लाभ पहुँचाना मुनासिब नहीं समझा, ऐसी स्थित में होमगार्ड का आक्रोश कभी भी उबाल खा सकता है।


