दुनिया में विश्व बंधुत्व की यदि कोई बात करता है तो वह हिन्दुस्तान : अम्मार रिज़वी
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लखनऊ। गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश का महासंघ बनाओ अभियान के अर्न्तगत नगर निगम स्थित त्रिलोकनाथ सभागार में सम्मेलन का आयोजन किया गया। महासंघ बनाओ अभियान के संयोजक राजनाथ शर्मा सन् 1965 से निरन्तर जनमत तैयार करने का प्रयास कर रहे है। जिस स्वर्ण शताब्दी के मौके पर राजधानी में कार्यक्रम का आयोजन किया। सम्मेलन का उद्घाटन स्वामी सच्चिदानंद भारती ने दीप प्रज्वलित कर किया।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि वयोवृद्ध वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री लाल जी टण्डन ने कहा कि आजादी से पहले जनसंघ ने अखण्ड भारत का जो नारा दिया था उसका बटवारे के बाद शब्द ही बदल गया। अखंड भारत यानी एक राष्ट्र। मतलब भारत, पाकिस्तान को पुनः एक करने का सूत्रधार। लेकिन भारत विभाजन के बाद देश के दो मौलिक चिंतक एवं विचारक डा राममनोहर लोहिया और पं दीन दयाल उपाध्याय जिन्होने अखंड भारत की परिकल्पना से अलग दोनो राष्ट्रों के महासंघ की अवधारणा पर वैचारिक आदन प्रदान हुआ। जिस विचार को धरातल पर उतारने का प्रयास राजनाथ शर्मा पिछले 50 वर्षों से करते चले आ रहे है। श्री टंडन ने कहा कि आजादी के 70 वर्षों में इन तीनों देशो ने बहुत कुछ खोया है। आज जरूरत हमें फिर एक होने की है। अगर भारत और पाकिस्तान के बीच महासंघ बन जाए तो यह इतिहास का एक नया अध्याय होगा। जो तीनों मुल्कों में अमन, चैन और तरक्की का मार्ग दिखाएगा।
विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद उप्र के पूर्व मंत्री डा. अम्मार रिज़वी ने कहा कि सारी दुनिया में विश्व बंधुत्व की यदि कोई बात करता है तो वह हिन्दुस्तान ही है। हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का बंटवारा दिलों का बंटवारा है और दिलों का बंटवारा ज्यादा दिनों तक नहीं चलता। महासंघ बनने के बाद भले ही हमारी हुकूमतें अलग-अलग रहे लेकिन दिलों का मिलना बेहद जरूरी है। महासंघ के इस प्रयास का जिम्मा सिर्फ राजनाथ शर्मा का नही है बल्कि पत्रकारो, साहित्यकारो, लेखकों का भी है जो इस आन्दोलन को आवाम तक ले जाए।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डा. अनीस अंसारी ने कहा कि तीनों मुल्को को एक करने के लिए जमीनी सतह पर काम करने की जरूरत है। तभी दिलों की दूरी को खत्म किया जा सकता है।
संयोजक राजनाथ शर्मा ने कहा कि भारत पाकिस्तान का महासंघ बने इस आन्दोलन को सबसे पहले डा लोहिया के निर्देशन पर सन 1965 में लखनऊ और बाराबंकी में आयोजित किया। इस संबंध में दीनदयाल उपाध्याय से भी मुलाकात हुई। महासंघ के इस प्रयास को गति देने का काम वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय मेरे साथ करतेे रहते है। जो आज वृहत रूप में महासंघ के समर्थक देश में मौजूद है।
स्वामी सच्चिदानंद भारती ने कहा कि वसुदैव कुटुम्ब की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है जब भारत, पाकिस्तान और बंग्लादेश एक हो। जो वर्तमान समय की मांग है।
अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध समाजवादी चिंतक सगीर अहमद ने कहा कि भारत का बंटवारा करने में अहम भूमिका निभाने वाले चौ. खलीकुर्रजमा थे जिनका ताल्लुक बाराबंकी से रहा। वही जनपद के रहने वाले राजनाथ शर्मा आज तीनों मुल्कों को एक करने का जिम्मा उठाए हुए। जो काबीले तारीफ है।
सम्मेलन का संचालन आनन्द नारायण मिश्रा ने किया। इस मौके पर अमीर हैदर, रमाशकर सिंह, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, राजू प्रधान, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद् भारत सरकार के सलाहकार एय.एम साहिल, चौधरी कुलवीर उर्फ कुल्ली, उमानाथ यादव, अशोक शुक्ला, पाटेष्वरी प्रसाद, नासिर खान, विजयपाल गौतम, बबलू असलम, मौलाना फहीम अहमद, आफताब आलम, साकेत मौर्या, आसिफ हुसैन, ओंकार सिंह, हुमायूं नईम खान, रवि प्रताप सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि वयोवृद्ध वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री लाल जी टण्डन ने कहा कि आजादी से पहले जनसंघ ने अखण्ड भारत का जो नारा दिया था उसका बटवारे के बाद शब्द ही बदल गया। अखंड भारत यानी एक राष्ट्र। मतलब भारत, पाकिस्तान को पुनः एक करने का सूत्रधार। लेकिन भारत विभाजन के बाद देश के दो मौलिक चिंतक एवं विचारक डा राममनोहर लोहिया और पं दीन दयाल उपाध्याय जिन्होने अखंड भारत की परिकल्पना से अलग दोनो राष्ट्रों के महासंघ की अवधारणा पर वैचारिक आदन प्रदान हुआ। जिस विचार को धरातल पर उतारने का प्रयास राजनाथ शर्मा पिछले 50 वर्षों से करते चले आ रहे है। श्री टंडन ने कहा कि आजादी के 70 वर्षों में इन तीनों देशो ने बहुत कुछ खोया है। आज जरूरत हमें फिर एक होने की है। अगर भारत और पाकिस्तान के बीच महासंघ बन जाए तो यह इतिहास का एक नया अध्याय होगा। जो तीनों मुल्कों में अमन, चैन और तरक्की का मार्ग दिखाएगा।
विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद उप्र के पूर्व मंत्री डा. अम्मार रिज़वी ने कहा कि सारी दुनिया में विश्व बंधुत्व की यदि कोई बात करता है तो वह हिन्दुस्तान ही है। हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का बंटवारा दिलों का बंटवारा है और दिलों का बंटवारा ज्यादा दिनों तक नहीं चलता। महासंघ बनने के बाद भले ही हमारी हुकूमतें अलग-अलग रहे लेकिन दिलों का मिलना बेहद जरूरी है। महासंघ के इस प्रयास का जिम्मा सिर्फ राजनाथ शर्मा का नही है बल्कि पत्रकारो, साहित्यकारो, लेखकों का भी है जो इस आन्दोलन को आवाम तक ले जाए।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डा. अनीस अंसारी ने कहा कि तीनों मुल्को को एक करने के लिए जमीनी सतह पर काम करने की जरूरत है। तभी दिलों की दूरी को खत्म किया जा सकता है।
संयोजक राजनाथ शर्मा ने कहा कि भारत पाकिस्तान का महासंघ बने इस आन्दोलन को सबसे पहले डा लोहिया के निर्देशन पर सन 1965 में लखनऊ और बाराबंकी में आयोजित किया। इस संबंध में दीनदयाल उपाध्याय से भी मुलाकात हुई। महासंघ के इस प्रयास को गति देने का काम वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय मेरे साथ करतेे रहते है। जो आज वृहत रूप में महासंघ के समर्थक देश में मौजूद है।
स्वामी सच्चिदानंद भारती ने कहा कि वसुदैव कुटुम्ब की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है जब भारत, पाकिस्तान और बंग्लादेश एक हो। जो वर्तमान समय की मांग है।
अध्यक्षता कर रहे वयोवृद्ध समाजवादी चिंतक सगीर अहमद ने कहा कि भारत का बंटवारा करने में अहम भूमिका निभाने वाले चौ. खलीकुर्रजमा थे जिनका ताल्लुक बाराबंकी से रहा। वही जनपद के रहने वाले राजनाथ शर्मा आज तीनों मुल्कों को एक करने का जिम्मा उठाए हुए। जो काबीले तारीफ है।
सम्मेलन का संचालन आनन्द नारायण मिश्रा ने किया। इस मौके पर अमीर हैदर, रमाशकर सिंह, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, राजू प्रधान, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद् भारत सरकार के सलाहकार एय.एम साहिल, चौधरी कुलवीर उर्फ कुल्ली, उमानाथ यादव, अशोक शुक्ला, पाटेष्वरी प्रसाद, नासिर खान, विजयपाल गौतम, बबलू असलम, मौलाना फहीम अहमद, आफताब आलम, साकेत मौर्या, आसिफ हुसैन, ओंकार सिंह, हुमायूं नईम खान, रवि प्रताप सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।
