दिव्यांगों ने लोहिया आवास की रखी मांग
https://husainijnp.blogspot.com/2016/08/blog-post_646.html
बाराबंकी। धरने के 9वें दिन दिव्यांगों के सघ सोसायटी मे भी नही मनाया
नाग पंचमी गुड़िया का त्योहार, धरना रहा जारी। मीड़िया के दबाव मे हुआ असर
गन्ना संस्थान मे पहुंचा पानी का टेंकर लेकिन मोबाइल शौंचालय व लाईट की
व्यवस्था अभी भी नही हो सकी। गन्ना दफतर मे 9 दिनों से अपनी मांगों को
लेकर भारतीय विकलांग कल्याण सेवा परिषद के बैनर तले दिव्यांगों ने धरना
प्रदर्षन शुरू किया था। धरने मे बैठे विकलांग जनों ने बताया कि गांव मे
भी भूंख व भीग कर मरना है तो गन्ना संस्थान के भूत बंगले मे ही दम तोड़
देंगे। धरने पर बैठे निन्दूरा ब्लाक के मनीष कुमार जिनके दोनों पैर मे
पोलियो है जिसके कारण वो खड़े नही हो सकते। परन्तु उन्हें ट्राई साइकिल तक
नही उपलब्ध कराई गई। विकलांग आफिस मे कहते है कि डीएम ने साइकिल बांटने
की इजाजत नही दी है निःशक्त जनों की समस्याओं से द्रवित वेलफेयर सोसायटी
की प्रबन्धक व समाज सेवी रामदुलारी पटेल भी अपने दर्जनों कार्यकर्ताओं के
साथ धरना स्थल पर पहुंची जहां लाई चना खाकर नाग पंचमी का त्योहार मनाया।
विदित हो कि दिव्यांगजनों द्वारा जारी धरने मे दिव्यांगों ने पात्रता के
आधार पर लोहिया आवास की मांग रखी है। राजनीतिक वैमनुष्यता के चलते गांव
के प्रधानों ने बीपीएल सूची से उन हजारों लोगों से बाहर कर दिया था जो
उनके पक्षधर नही थे परन्तु दो वक्त की रोटी ही नसीब हो पाती है सुबह से
शाम तक खेतों मे पसीना बहाने वाला सिर्फ एक सौ पचास रूपये पाता है जिससे
पूरा परिवार खाता है ऐसे मजदूरों के लिए अपना घर एक सपना ही है। समाजवादी
सरकार ने सत्ता मे आते ही लोहिया के सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया
तो कमजोर तबके लोगों मे आस जगी कि शायद उनका भी घर होगा। शुरूआती दौर मे
जब सूची बनी तो गरीबों को शामिल करने का फरमान जारी हुआ जो 2002 मे बनी
बीपीएल सूची से बाहर थे और पात्रता क्रम मे आते है। जिला अध्यक्ष दिनेश
कुमार वर्मा का कहना है कि सरकार ने केवल नाम बदला है इससे विकलांगों का
जीवन स्तर नही सुधरेगा। दिव्यांग अपने पेट के लिए कुछ नही कर पाता तो उसे
आवास, राशन, पेंशन, अपकरण सरकार ही उपलब्ध करादे। पहले से ही दैवीय
प्रकोप से जूझ रहे हैं अब प्रधानों की राजनीति का शिकार हो रहे है। धरने
पर बैठे विजय बहादुर का कहना था कि उच्च अधिकारियों को भ्रष्टाचारी
कर्मचारी गलत रिपोर्ट देते हैं। बडे़ अधिकारियों के नाम पर धन उगाही करके
सच्चाई को दबा रहे है। उन्होंने दिव्यांग जनों से अपील की है कि गन्ना
दफतर मे चल रहे धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी समस्याओं से जिला प्रशासन को
अवगत करायें। धरने पर रंजीता देवी, रामदुलारी पटेल, परशुराम रावत, आरबी
सिंह, मनीष कुमार, अंशू जायसवाल आदि तमाम लोग मौजूद रहे।
नाग पंचमी गुड़िया का त्योहार, धरना रहा जारी। मीड़िया के दबाव मे हुआ असर
गन्ना संस्थान मे पहुंचा पानी का टेंकर लेकिन मोबाइल शौंचालय व लाईट की
व्यवस्था अभी भी नही हो सकी। गन्ना दफतर मे 9 दिनों से अपनी मांगों को
लेकर भारतीय विकलांग कल्याण सेवा परिषद के बैनर तले दिव्यांगों ने धरना
प्रदर्षन शुरू किया था। धरने मे बैठे विकलांग जनों ने बताया कि गांव मे
भी भूंख व भीग कर मरना है तो गन्ना संस्थान के भूत बंगले मे ही दम तोड़
देंगे। धरने पर बैठे निन्दूरा ब्लाक के मनीष कुमार जिनके दोनों पैर मे
पोलियो है जिसके कारण वो खड़े नही हो सकते। परन्तु उन्हें ट्राई साइकिल तक
नही उपलब्ध कराई गई। विकलांग आफिस मे कहते है कि डीएम ने साइकिल बांटने
की इजाजत नही दी है निःशक्त जनों की समस्याओं से द्रवित वेलफेयर सोसायटी
की प्रबन्धक व समाज सेवी रामदुलारी पटेल भी अपने दर्जनों कार्यकर्ताओं के
साथ धरना स्थल पर पहुंची जहां लाई चना खाकर नाग पंचमी का त्योहार मनाया।
विदित हो कि दिव्यांगजनों द्वारा जारी धरने मे दिव्यांगों ने पात्रता के
आधार पर लोहिया आवास की मांग रखी है। राजनीतिक वैमनुष्यता के चलते गांव
के प्रधानों ने बीपीएल सूची से उन हजारों लोगों से बाहर कर दिया था जो
उनके पक्षधर नही थे परन्तु दो वक्त की रोटी ही नसीब हो पाती है सुबह से
शाम तक खेतों मे पसीना बहाने वाला सिर्फ एक सौ पचास रूपये पाता है जिससे
पूरा परिवार खाता है ऐसे मजदूरों के लिए अपना घर एक सपना ही है। समाजवादी
सरकार ने सत्ता मे आते ही लोहिया के सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया
तो कमजोर तबके लोगों मे आस जगी कि शायद उनका भी घर होगा। शुरूआती दौर मे
जब सूची बनी तो गरीबों को शामिल करने का फरमान जारी हुआ जो 2002 मे बनी
बीपीएल सूची से बाहर थे और पात्रता क्रम मे आते है। जिला अध्यक्ष दिनेश
कुमार वर्मा का कहना है कि सरकार ने केवल नाम बदला है इससे विकलांगों का
जीवन स्तर नही सुधरेगा। दिव्यांग अपने पेट के लिए कुछ नही कर पाता तो उसे
आवास, राशन, पेंशन, अपकरण सरकार ही उपलब्ध करादे। पहले से ही दैवीय
प्रकोप से जूझ रहे हैं अब प्रधानों की राजनीति का शिकार हो रहे है। धरने
पर बैठे विजय बहादुर का कहना था कि उच्च अधिकारियों को भ्रष्टाचारी
कर्मचारी गलत रिपोर्ट देते हैं। बडे़ अधिकारियों के नाम पर धन उगाही करके
सच्चाई को दबा रहे है। उन्होंने दिव्यांग जनों से अपील की है कि गन्ना
दफतर मे चल रहे धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी समस्याओं से जिला प्रशासन को
अवगत करायें। धरने पर रंजीता देवी, रामदुलारी पटेल, परशुराम रावत, आरबी
सिंह, मनीष कुमार, अंशू जायसवाल आदि तमाम लोग मौजूद रहे।

