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रिश्वतखोरी, सत्तानशीनों की गुलामी के लिए है मशहूर


अजमी रिज़वी
सुमंगल दीप त्रिवेदी...
बाराबंकी। वर्तमान समय में देश की परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। एक
वक्त था जब लोग न्यायपालिका को सर्वोच्च मानते थे। लेकिन दुर्भाग्य कि आज
सरकारी मुलाजिम न्यायपालिका को कुछ नहीं समझते। जातिवाद का जहर कहें या
फिर सत्ता के मद में चूर ऊंची पकड़ और अहंकार की पराकाष्ठा, बाराबंकी जनपद
का सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी पूरे तौर निरंकुश हो चला है। सहायक
सम्भागीय परिवहन अधिकारी राजेश्वर यादव ने न्यायालय मुख्य न्यायिक
मजिस्ट्रेट के आदेश की अवमानना कर डाली। अपने रूतबे और खादीधारियों की
गुलामी में मशगूल एआरटीओ बाराबंकी ने न्यायालय के आदेशों का भी जमकर मखौल
उड़ाया। इस बेलगाम एआरटीओ के विरूद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक
मामले में नोटिस जारी की है। हर माह ट्रक आपरेटर्स से कागजी जांच और
रोटीन दबिश के नाम पर लाखों रूपये बतौर सुविधा शुल्क वसूलने वाले इस
रिश्वतखोर एआरटीओ द्वारा बीती दिनांक 26 जुलाई 2016 को धर्मेन्द्र शुक्ला
पुत्र स्व. सूरज प्रसाद का वाहन संख्या यूपी 41 टी 0915 धारा 113 एमवी
एक्ट के तहत थाना सतरिख क्षेत्र में सीज किया था। इसके बाद पीड़ित से
विभाग के एक कर्मचारी अंशुमान सिंह द्वारा हजारों रूपये की मांग की गई।
जिस पर भुक्तभोगी ने रिश्वत दे पाने में असमर्थता जताई और न्यायालय की
शरण में जा पहुंचा। जहां न्यायालय द्वारा एआरटीओ राजेश्वर यादव से इस
मामले में आख्या मांगी गई। लेकिन इस निरंकुश और भ्रष्टाचारी एआरटीओ ने कई
तिथियां बीत जाने के बाद भी आज तक कोई आख्या न्यायालय के समक्ष प्रेषित
नहीं की। न्यायाधीश द्वारा दी गई नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि
यह आपत्तिजनक है और न्यायालय आदेश की अवहेलना है। इतना ही नहीं आगामी 22
अगस्त को न्यायालय ने कारण स्पष्ट करने और अपने स्पष्टीकरण सहित स्पष्ट
आख्या प्रस्तुत करने को आदेशित किया है। बताते चलें कि वर्तमान समय में
तैनात एआरटीओ राजेश्वर यादव स्वयं को सत्तानशीन दल के मुखिया का करीबी
बताता है। इतना ही नहीं, लोगों की बात सुनकर अनसुनी करना इसकी न सिर्फ
आदत है बल्कि लोगों को अपने रौब के चलते अपशब्दों से भी नवाजता है।
विभागीय सूत्रों की माने तो, न्यायालय के आदेश की अवमानना पर भी इसको
तनिक भी खेद नहीं है। सूत्रों के अनुसार, एआरटीओ राजेश्वर यादव अपने
कार्यालय के कुछ चुने हुए नुमाइंदों, जिनमें प्रमुख रूप से प्राविधिक
निरीक्षक दयाशंकर कनौजिया, एआरटीओ प्रवर्तन व दो अन्य लोगों सहित पूरे
जनपद में वाहन के कागजी जांच एवं चालान के नाम पर लाखों रूपये हर महीने
गबन करता है। आरआई द्वारा फिटनेस के नाम पर जो रूपया अवैध रूप से वसूला
जाता है, उसका बंदरबांट भी एआरटीओ द्वारा किया जाता है। शायद रिश्वत के
दम पर ही इस भ्रष्ट अधिकारी के घर के बच्चों के पेट पलते हैं। इस एआरटीओ
द्वारा की जा रही अवैध धन उगाही से ट्रक आपरेटर्स, ट्रांसपोर्टर्स,
विद्यालयों के प्रबंध तंत्र सहित सभी लोगों में जबरदस्त रोष व्याप्त है।

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