ग्रामीणों ने शुरु कर दिया पलायन
https://husainijnp.blogspot.com/2016/08/blog-post_709.html
बाराबंकी। एल्गिन चरसड़ी तटबंध का करीब दो सौ मीटर बांध का हिस्सा कट चुका
है। जिसके चलते रिंग बाध के चारो तरफ पानी फैल गया है। सोमवार को सुबह
रिंगबाध के पूरब छोर पर कटान हो रही थी। जिस पर सिंचाई विभाग के
अधिकारियो ने अनुरक्षण कार्य कराकर कटान तो रोक ली थी। लेकिन जिस स्थान
से रिंग बाध की शुरूवात हुई है। उससे बीस मीटर पहले ही तेजी से मुख्य
बांध में भी कटान तेज हो रही है। जिससे मुख्य बांध ने बीस मीटर हिस्से मे
आधा तटबंध काट दिया है। अगर मंगलवार को पानी तेजी से बढता है। तो रिंग
बाध से पहले तटबंध का मुख्य हिस्सा भी कटने से इन्कार नही किया जा सकता
है। तटबंध पर अनुरक्षण कार्य कराने के नाम पर सिर्फ तटबंध की ही मिटटी
खोदकर बोरियो में भरकर डलवायी जा रही है। सोमवार को घाघरा नदी का पानी
रिंग बांध के भीतर तेजी से फैल गया है। और सीधे ही रिंग बांध से टकराने
लगा। उसके बाद मुुख्य बांध में भी कटान शुरू हो गयी। उसको भी बचाने की
कवायद शुरु हुई। रिंग बांध में तो रिसाव भी होने लगा। नदी ने मुख्य बांध
में तेजी के साथ कटान करना शुरु कर दिया है। जहां से रिंग बांध का
निर्माण हुआ था। उसके आगे करीब तीस मीटर तक पूरा बांध नदी में समा गया।
इस तरह मुख्य बांध का करीब दो सौ मीटर हिस्सा कट चुका है। तथा रिंग बांध
के भीतर पानी को रोंकने का प्रयास भी विफल है। बांध में कटान होने के
कारण मात्र एक मीटर का हिस्सा रिंग बांध का भी अवशेष है। उधर नदी कटान
करते हुए लगातार अपना दायरा बढ़ा रही है। तथा बांध के बाहरी हिस्से से
अगल-बगल के खेतों में पानी भरने लगा है। घाघरा में पानी सतह से जमीन की
सतह बराबर होने के कारण एकाएक पानी का फैलाव नहीं हो रहा है। यदि नदी का
जलस्तर बढ़ा तो अचानक बाराबंकी जिलो के माझारायपुर, परसावल, नैपुरा,
कमियार, बांसगाव, सहित कई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
टैªक्टर-ट्राली से जा रहे ग्रामीण
बाराबंकी। तटबंध कटने से प्रभावित होने वाले गांवो के लोगो ने अपना पलायन
सुरक्षित स्थानो की ओर कर लिया है। सोमवार को भी तमाम ग्रामीणो ने अपने
रिश्तेदारो के यहां से ट्राली ट्रैक्टर मंगवाकर अपनी गृहस्थी का सामान
सुरक्षित स्थानो पर पहुंचा दिया है। दहशतजदा ग्रामीणों में जल्दी अपना
आशियाना खाली करने की जैसे होड़ लगी हो। गांवों को खाली कराने में प्रशासन
ग्रामीणों की कोई भी मदद नहीं कर रहा है। संसाधनों के अभाव में कोई
बैलगाड़ी से तो कोई टैªक्टर-ट्राली से सामान की ढुलाई कर रहा है। तमाम ऐसे
लोग भी हैं। जिनके पास कोई संसाधन नहीं है तो धीरे-धीरे साइकिल या ठेले
से सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। ग्रामीण अपने आशियाने एंव
खेती बारी को भगवान भरोसे छोड़ने को मजबूर हो गये हैं।
है। जिसके चलते रिंग बाध के चारो तरफ पानी फैल गया है। सोमवार को सुबह
रिंगबाध के पूरब छोर पर कटान हो रही थी। जिस पर सिंचाई विभाग के
अधिकारियो ने अनुरक्षण कार्य कराकर कटान तो रोक ली थी। लेकिन जिस स्थान
से रिंग बाध की शुरूवात हुई है। उससे बीस मीटर पहले ही तेजी से मुख्य
बांध में भी कटान तेज हो रही है। जिससे मुख्य बांध ने बीस मीटर हिस्से मे
आधा तटबंध काट दिया है। अगर मंगलवार को पानी तेजी से बढता है। तो रिंग
बाध से पहले तटबंध का मुख्य हिस्सा भी कटने से इन्कार नही किया जा सकता
है। तटबंध पर अनुरक्षण कार्य कराने के नाम पर सिर्फ तटबंध की ही मिटटी
खोदकर बोरियो में भरकर डलवायी जा रही है। सोमवार को घाघरा नदी का पानी
रिंग बांध के भीतर तेजी से फैल गया है। और सीधे ही रिंग बांध से टकराने
लगा। उसके बाद मुुख्य बांध में भी कटान शुरू हो गयी। उसको भी बचाने की
कवायद शुरु हुई। रिंग बांध में तो रिसाव भी होने लगा। नदी ने मुख्य बांध
में तेजी के साथ कटान करना शुरु कर दिया है। जहां से रिंग बांध का
निर्माण हुआ था। उसके आगे करीब तीस मीटर तक पूरा बांध नदी में समा गया।
इस तरह मुख्य बांध का करीब दो सौ मीटर हिस्सा कट चुका है। तथा रिंग बांध
के भीतर पानी को रोंकने का प्रयास भी विफल है। बांध में कटान होने के
कारण मात्र एक मीटर का हिस्सा रिंग बांध का भी अवशेष है। उधर नदी कटान
करते हुए लगातार अपना दायरा बढ़ा रही है। तथा बांध के बाहरी हिस्से से
अगल-बगल के खेतों में पानी भरने लगा है। घाघरा में पानी सतह से जमीन की
सतह बराबर होने के कारण एकाएक पानी का फैलाव नहीं हो रहा है। यदि नदी का
जलस्तर बढ़ा तो अचानक बाराबंकी जिलो के माझारायपुर, परसावल, नैपुरा,
कमियार, बांसगाव, सहित कई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
टैªक्टर-ट्राली से जा रहे ग्रामीण
बाराबंकी। तटबंध कटने से प्रभावित होने वाले गांवो के लोगो ने अपना पलायन
सुरक्षित स्थानो की ओर कर लिया है। सोमवार को भी तमाम ग्रामीणो ने अपने
रिश्तेदारो के यहां से ट्राली ट्रैक्टर मंगवाकर अपनी गृहस्थी का सामान
सुरक्षित स्थानो पर पहुंचा दिया है। दहशतजदा ग्रामीणों में जल्दी अपना
आशियाना खाली करने की जैसे होड़ लगी हो। गांवों को खाली कराने में प्रशासन
ग्रामीणों की कोई भी मदद नहीं कर रहा है। संसाधनों के अभाव में कोई
बैलगाड़ी से तो कोई टैªक्टर-ट्राली से सामान की ढुलाई कर रहा है। तमाम ऐसे
लोग भी हैं। जिनके पास कोई संसाधन नहीं है तो धीरे-धीरे साइकिल या ठेले
से सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। ग्रामीण अपने आशियाने एंव
खेती बारी को भगवान भरोसे छोड़ने को मजबूर हो गये हैं।

