नागपंचमी पर श्रद्धालुओं ने किया पूजन-अर्चन, गूंज उठे शिवालय
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जौनपुर। नागों के देवता आस्तिक व वासुकी का त्योहार नागपंचमी रविवार को परम्परागत ढंग से मनाया गया। मंदिरों में भगवान शिव की कृपा पाने के लिये जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक किया गया, वहीं रुद्राभिषेक के साथ कालसर्प योग निवारण हवन भी किया गया। सपेरों ने नाग का दर्शन कराकर लोगों को शुभ बताया तो शिव मंदिरों के पास डेरा जमा करके श्रद्धालुओं को लुभाया। सनातन धर्म की परम्परा के अनुसार महिलाएं घरों के मुख्य दरवाजे पर गोबर से नाग की आकृति बतायीं और अच्छे पकवान बनाकर भोग भी लगायीं। गाय या भैंस का दूध पिलाकर आरती उतारने के साथ ही प्रार्थना भी किया गया कि आस्तिक बाबा परिवार पर कृपा बनाये रखना। घरों में पूड़ी, कचौड़ी, खीर, सब्जी बनायी गयी जहां पुराने कपड़ों से गुड़िया भी बनायी गयी। देर शाम को महिलाओं व बालिकाओं ने मेहंदी रचनाकर झूला झूल करके सावन का आनन्द लिया। श्रद्धालुओं ने भांग, धतूरा, बेलपत्र, गंगाजल, गाय का दूध, शहद, लावा आदि से शिवालयांे में पूजा किया। मान्यता के अनुसार घर की महिलाएं नये वस्त्र धारण कर सेंवई व चावल का भोजन बनाकर घर की दीवार पर गेरू पोत करके पूजन कीं जिसके बाद कच्चे दूधमें कोयला घिसकर उससे गेरू पुती दीवार पर घर जैसी आकृति बनायीं। इसके बाद दीवार पर बनाये गये नाग देवता को कच्चा दूध, दही, दुर्वा, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, जल, रोली, चावल से पूजा की गयी। नागपंचमी नाग देवता का पूजन एवं जलाभिषेक तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के दिन दंगल के आयोजन का भी परम्परा है। इस बाबत सप्ताह भर पहले से ही कुश्ती, कबड्डी का खेल शुरू हो जाता है और आज के दिन जगह-जगह दंगल स्थल पर दो पहलवानों में जोर आजमाइश होता है। देखा गया कि जनपद के त्रिलोचन महादेव, साईंनाथ मंदिर शम्भूगंज, गोमतेश्वर महादेव केराकत, बेलवाई महादेव मंदिर, करशूलनाथ मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, अजोसी महावीर, बिजेथुआ महावीरन के अलावा नगर के नवदुर्गा शिव मंदिर विसर्जन घाट, गोमतेश्वर महादेव, ओलन्दगंज, जागेश्वरनाथ, पांचो शिवाला मंदिर, लाइन बाजार, सिपाह, पालिटेक्निक चौराहा, चहारसू चौराहा, कोतवाली चौराहे के शिव मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहा।

