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पंचायत सचिवों के ‘घर की शोभा’

नादौन: पंचायत सचिवों को सरकार द्वारा दिए गए लैपटॉप सचिवों के घर की शोभा बने हुए हैं। एक तरफ  तो सरकार डिजिटल इंडिया का कार्यक्रम चलाए हुए है तो दूसरी तरफ  ऐसे कर्मचारी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके सरकार के कार्यक्रमों को पीछे धकेल रहे हैं। क्षेत्र के कुछ प्रधानों ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी पंचायतों के सचिव लैपटॉप को पंचायत कार्यालय में यह कह कर नहीं रखते कि नैटवर्क नहीं है अपने साथ घर ले जाते हैं कि वे घर पर कार्य पूरा करेंगे।

दिलचस्प बात है कि पंचायतों में नैट की व्यवस्था है तथा इक्का-दुक्का दिनों को छोड़कर नैट कनैक्टिविटी फेल नहीं होती, ऐसे में रोजाना लैपटॉप घरों को ले जाने से सरकारी डाटे की चोरी की संभावना भी बनी रहती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सचिव लैपटॉप अपने घरों को ले जाते हैं तथा अपना निजी काम इन लैपटॉप पर करते हैं। सचिवों के बच्चे लैपटॉप पर गेम खेलते रहते हैं। सचिवों की इस कारगुजारी से पंचायत प्रधान परेशान हैं। प्रधानों का कहना है कि कई बार उन्हें कोई जरूरी काम पड़ जाते हैं, जिस पर लैपटॉप में स्टोर डाटा की जरूरत पड़ती है परंतु लैपटॉप पंचायत कार्यालय में रहने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

जब पंचायत सचिवों से जानकारी देने को कहा जाता है तो वे अभी कार्यालय न पहुंच पाने की बात कह देते हैं। सरकार ने पंचायत सचिवों की तैनाती तो पंचायत के स्मूथ कार्य के लिए की थी परंतु अब पंचायत सचिव जिस तरह से अकुशलता दिखा रहे हैं, ऐसे में वे पंचायतीराज प्रणाली में बाधा बन रहे हैं। पंचायत प्रधानों ने सरकार व विभाग से मांग की है कि सरकारी लैपटॉप सहित अन्य उपकरणों को किसी को भी घर ले जाने की अनुमति न
दी जाए।

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