शहाबुदीन की जमानत रद्द करने पर SC का फैसला कल तक सुरक्षित
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नई दिल्ली (एएनएस )। राजद के पूर्व बाहुबली सांसद शहाबुदीन की जमानत रद्द करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को 10:30 बजे सुनाएगा।
कोर्ट ने बुधवार को कहा था कि शहाबुदीन को चार्जशीट न देना गंभीर बात है और इसका असर हमारी सोच पर पड़ेगा क्योंकि हम तथ्यों और रिकॉर्ड पर जाएंगे केस के परसेप्शन पर नहीं। बिहार सरकार इसका जवाब नहीं दे सकी कि शहाबुदीन को चार्ज शीट क्यों नहीं सर्व की गई। 9 माह तक चार्जशीट अभियुक्त को न देना बेहद गंभीर है।
बुधवार को पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस पीसी घोष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दो आदेश हैं जिनमें उन्हें हिस्ट्रीशीटर माना गया है। क्या ये गलत कहे जा सकते हैं। कोर्ट ने आगे कहा, हम इस बारे में बहुत स्पष्ट हैं कि हिस्ट्रीशीटर को जमानत नहीं दी जा सकती। यह कहकर कोर्ट ने सुनवाई गुरुवार तक स्थगित कर दी।
इससे पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस घोष और जस्टिस अमिताव रॉय की पीठ ने बिहार सरकार से पूछा कि क्या शहाबुदीन की जमानत अर्जी की सुनवाई के समय अभियोजन अधिकारी कोर्ट में गए थे। हाईकोर्ट को क्या यह बताया गया था कि ट्रायल शुरू होने में नौ माह की देरी शहाबुद्दीन के कारण ही हुई है। क्योंकि उन्होंने हत्या के मामले में संज्ञान लेने के फैसले को रिवीजन कोर्ट में चुनौती दे दी थी जिससे पूरा रिकॉर्ड वहां चला गया और ट्रायल शुरू नहीं हो पाया। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया था कि अगस्त में दाखिल जमानत अर्जी 7 सितंबर को सुनवाई के लिए लगी और उसी दिन हाईकोर्ट ने जमानत का आदेश पारित कर दिया।
कोर्ट ने बुधवार को कहा था कि शहाबुदीन को चार्जशीट न देना गंभीर बात है और इसका असर हमारी सोच पर पड़ेगा क्योंकि हम तथ्यों और रिकॉर्ड पर जाएंगे केस के परसेप्शन पर नहीं। बिहार सरकार इसका जवाब नहीं दे सकी कि शहाबुदीन को चार्ज शीट क्यों नहीं सर्व की गई। 9 माह तक चार्जशीट अभियुक्त को न देना बेहद गंभीर है।
बुधवार को पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस पीसी घोष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दो आदेश हैं जिनमें उन्हें हिस्ट्रीशीटर माना गया है। क्या ये गलत कहे जा सकते हैं। कोर्ट ने आगे कहा, हम इस बारे में बहुत स्पष्ट हैं कि हिस्ट्रीशीटर को जमानत नहीं दी जा सकती। यह कहकर कोर्ट ने सुनवाई गुरुवार तक स्थगित कर दी।
इससे पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस घोष और जस्टिस अमिताव रॉय की पीठ ने बिहार सरकार से पूछा कि क्या शहाबुदीन की जमानत अर्जी की सुनवाई के समय अभियोजन अधिकारी कोर्ट में गए थे। हाईकोर्ट को क्या यह बताया गया था कि ट्रायल शुरू होने में नौ माह की देरी शहाबुद्दीन के कारण ही हुई है। क्योंकि उन्होंने हत्या के मामले में संज्ञान लेने के फैसले को रिवीजन कोर्ट में चुनौती दे दी थी जिससे पूरा रिकॉर्ड वहां चला गया और ट्रायल शुरू नहीं हो पाया। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया था कि अगस्त में दाखिल जमानत अर्जी 7 सितंबर को सुनवाई के लिए लगी और उसी दिन हाईकोर्ट ने जमानत का आदेश पारित कर दिया।

