या हुसैन या हुसैन , ग़मगीन माहौल में ताज़िये सुपुर्दे ख़ाक
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vo 1- हाथो में अलम लिए हुवे ये अज़ादार आज उस मजलूम इमाम हुसैन का गम मानाने के लिए निकले है जिन्हें 1400 साल पहले यज़ीदी हुकूमत ने तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया था यहाँ तक की 6 माह के बच्चे अली असगर को भी ज़लीमो ने प्यासा ही शहीद कर दिया था ,अज़ादार या हुसैन या हुसैन की सदा लगते हुवे ताजियों को कंधो व सर पर रख कर सदर इमामबाड़े ले गए जहा पूरी अकीदत के साथ सुपुर्दे खाक केर दिया गया ,बच्चे हो या फिर महिलाये सभी इमाम हुसैन के गम में डूबे नज़र आए यहाँ लोग ज़ंजीर व छुरियो से मातम कर अपना लहू बहा रहे थे ,हिन्दू अज़ादार भी यहाँ मोजूद थे

