या हुसैन या हुसैन , मुहर्रम का दिखा चाँद , मजलिसों का दौर शुरू
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जौनपुर । मुहर्रम का चाँद रविवार को देखा गया चाँद की तस्दीक धर्मगुरु मौलाना सफ़दर हुसैन ज़ैदी ने की । मोहर्रम का चाँद आसमान पर दीखते ही या हुसैन या हुसैन की ग़मगीन मातमी सदा शहर में गूँजने लगी । लोग मुहर्रम का चाँद देखकर अपने आका हुसैन पर पड़ी मुसीबतों को याद कर दहाड़े मारकर रोने बिलखने लगे । इमामबाड़ो और इमाम चौक पर मजलिसों का आयोजन शुरू हो गया । इमाम हुसैन और उनके 71 साथियो की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम का दिन है। इमाम हुसैन अल्लाह के रसूल पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती थे। यह हिजरी संवत का प्रथम महीना है। मुहर्रम एक महीना है, जिसमें शिया मुस्लिम दस दिन तक इमाम हुसैन की याद में शोक मनाते हैं।

