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10 साल तक कहां थी कांग्रेस की पूर्व सैनिकों के प्रति सहानुभूति: जेटली


नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल की आत्महत्या को लेकर कांग्रेस पर सिर्फ राजनीति करने का आरोप लगाते हुए आज उससे पूछा कि 10 साल सरकार में रहने के दौरान पूर्व सैनिकों के प्रति उनकी सहानुभूति कहां चली गई थी जब पूरे दस साल तक उन्हें वन रैंक वन पेंशन का झूठा दिलासा देते रहें। जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि उसकी जवानों के प्रति कोई सहानुभूति कभी नहीं थी। आज भी वह इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही है।

उन्होंने कहा कि कई दशकों से वन रैंक वन पेंशन की मांग की जा रही है। वर्ष 2004 से 2014 तक 10 साल तक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार रही। संप्रग सरकार ने इस मांग को लागू करने के लिए एक भी कारगर कदम नहीं उठाया। केवल चुनावों में झूठा वादा किया और बाद में संसद में उसकी जटिलताओं का जिक्र करके उसके क्रियान्वयन को असंभव करार दे दिया। आम चुनाव के पहले सरकार ने सिर्फ चुनावी संदेश देने के लिए एक समिति बनाने घोषणा की और बजट में उसके लिये केवल 500 करोड़ रुपए का प्रावधान कर दिया।


वित्त मंत्री ने कहा कि उस वक्त एक संसदीय समिति की रिपोर्ट मे कहा गया कि इसके लिए कई हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। कई विकल्प देखे गए। अंत में वन रैंक वन पेंशन की मांग सरकार ने स्वीकार कर ली। ये तय किया गया कि जो पेंशन राशि होगी उसकी हर पांच वर्ष बाद समीक्षा की जाएगी। पूर्व सैनिक पेंशन राशि की समीक्षा हर वर्ष चाहते थे पर चूंकि सरकारी कर्मचारियों के मामले में 10 वर्ष बाद समीक्षा होती है। इसलिए पूर्व सैनिकों के मामले में इसे पांच वर्ष किया गया।

जेटली ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जब से इसे लागू किया गया है, इसमें कुछ चुनौतियां है। इसी को आसान बनाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से पेंशन दी जाती है। हर एक सेवानिवृत्त सैनिक को इस आधार के रूप में उसकी पेंशन दी गई। कुछ लोगों की शिकायत पर न्यायमूर्ति रेड्डी का एक सदस्यीय आयोग बनाया गया जिसने अपनी रिपोर्ट दे दी है। उस पर सरकार विचार करेगी। लाखों की तादाद में लोगों को ये पेंशन मिल रही है। जिन लोगों के मामले में कोई विवाद है, उन्हें भी सुलझाया जा रहा है।

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