पभोषा मेला | गिरिराज की परिक्रमा से पूरी होती हैं मनो कामनाएं
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अशोक केसरवानी
कौशाम्बी | यमुना तट पर
पभोषा रोहित गिरिराज विश्व कल्याण के नाम से जाना जाता है । पर्वत की चोटी पर मां बहुला की प्रतिमा स्थापित
की गई है ।
यहां पर गोलोक की भी स्थापना होने के कारण इसे सिद्धपीठ कहा
जाता है।
मान्यता है कि मकर संक्रांति पर पर्वत की एक बार परिक्रमा करने
से मनुष्य
को 33 करोड़ यज्ञ की प्राप्ति होती है। साथ ही मृत्यु के उपरांत आत्मा
को
वैतरणी नदी पार करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है।
दशकों से
हजारों श्रद्धालु मंगल कामना व पुण्य प्राप्ति के लिए मकर संक्रांति पर्व पर गिरिराज की परिक्रमा कर मां बहुला देवी का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पुण्य की प्राप्ति के लिए हजारों श्रद्धालुओं ने बुधवार को गिरिराज पभोषा
की परिक्रमा कर मां बहुला देवी के चरणों में नतमस्तक होकर, विश्व व परिवार के सुख-शांति की कामना की। वेदों व पुराणों में भी गिरिराज का जिक्र किया गया है। इसमें महाभारत व विश्राम सागर ग्रंथ शामिल है। दशकों
से परंपरागत हर मकर संक्रांति को श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। इसके अलावा पर्यटन स्थल का स्थान दिया गया है। मकर संक्रांति के अलावा भी अन्य दिनों देश-विदेश से लोग पर्वतराज की परिक्रमा करने आते हैं। पहले तो यहां पर
कुछ भी नहीं था । राजस्थान के एक संत को मां बहुला देवी ने स्वप्न में मंदिर निर्माण की बात कही थी, फिर मां का आदेश पाकर भक्त ने पहाड़ की चोटी पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया।
हजारों श्रद्धालु मंगल कामना व पुण्य प्राप्ति के लिए मकर संक्रांति पर्व पर गिरिराज की परिक्रमा कर मां बहुला देवी का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पुण्य की प्राप्ति के लिए हजारों श्रद्धालुओं ने बुधवार को गिरिराज पभोषा
की परिक्रमा कर मां बहुला देवी के चरणों में नतमस्तक होकर, विश्व व परिवार के सुख-शांति की कामना की। वेदों व पुराणों में भी गिरिराज का जिक्र किया गया है। इसमें महाभारत व विश्राम सागर ग्रंथ शामिल है। दशकों
से परंपरागत हर मकर संक्रांति को श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। इसके अलावा पर्यटन स्थल का स्थान दिया गया है। मकर संक्रांति के अलावा भी अन्य दिनों देश-विदेश से लोग पर्वतराज की परिक्रमा करने आते हैं। पहले तो यहां पर
कुछ भी नहीं था । राजस्थान के एक संत को मां बहुला देवी ने स्वप्न में मंदिर निर्माण की बात कही थी, फिर मां का आदेश पाकर भक्त ने पहाड़ की चोटी पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया।

