सस्ता आलू बना किसानों के लिए मुसीबत
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जौनपुर। गर्मियों के समय 35 रूपये किलो मिलने वाला आलू अब फुटकर में आठ से दस रूपये मिल रहा है। थोक मण्डियों में भाव और कम है। जबकि किसान अपने आलू की उपज को 600 रूपये प्रति कुन्तल बेचने को मजबूर हो रहा है। किसानों का कहना है कि आलू अब सस्ता हो रहा है जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। मंहगे बीज, खाद और सिचाई के बाद आलू लागत से कम मूल्य पर बेचना पड़ रहा है। उनका कहना है कि पिछले साल आलू के अच्छे रेट को देखते हुए इस बाद अधिक आलू बोया गया अब कौड़ियों के भाव बेचने की विवशता आ गयी है। कुछ महीने तक उपभोक्ताओं का दम निकालने वाला आलू अब किसानों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। मण्डियों में आलू के दाम लगातार घटते जा रहे हैं। कुछ किसान रोग लगने के कारण तो कुछ दूसरी फसल और अन्य जरूरतों के लिए कच्चा आलू बेच रहे हैं। कुछ किसान आलू खोदकर प्याज लगा रहे हैं। कुछ किसानों का कहना है कि आगे चलकर जो किसान कोल्ड स्टोर आलू रखेगा उसके ही कुछ लाभ कमाने की संभावना है। आलू के जानकार इसके लिए किसान और सरकार दोनों को जिम्मेदार मान रहे है। बागवानी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि विदेशों में किसान कौन सी और कितनी जमीन पर फसल बो रहा है इसकी सरकार को जानकारी होती है उसी के हिसाब से योजना बनती है जबकि यहां अधिक होने पर किसान थोक भाव से एक ही फसल बो देते हैं आलू का पूरा गणित मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है। आलू की खपत लगभग निश्चित होती है रेट कम होने पर लोग आलू ज्यादा या मंहगा होने पर कम खाना शुरू कर देते है। इसलिये अधिक पैदावार होने पर रेट गिर जाते है।

