जौनपुर : बालिका के हाथ में पकड़ा दिया फरसा
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जौनपुर। गरीबी की मार झेल रहे परिवारों में बाल
श्रमिक बनने की मजबूरी है। इसमें पुत्र और पुत्रियों का फर्क नहीं किया जाता। इस
समय हाइवे का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसमें मासूम बच्चियों को भी अभिभावक अपने
साथ काम में हाथ बंटाने के लिए लगा दिये हैं। जिन हाथों में किताब और कापियां होनी
चाहिए उन्हे फरसा पकड़ा दिया गया है। बालिकाओं की शिक्षा के लिए राजनेता और समाजसेवी
बड़े बड़े व्याख्यान देते हैं और उन्हे हर हालत में शिक्षित करने की बात करते हैं
लेकिन जिस परिवार में भरपेट भोजन की व्यवस्था न होती हो वे अपनी लड़कियों को कैसे
शिक्षा दिलवा सकते है ? चाहे सरकार बालिकाओं के शिक्षा के लिए कितना भी प्रचार
प्रसार व धन खर्च करे लेकिन सबसे पहले गरीबी को समाप्त करना होगा। हालत यह है कि
जिले के अनेक होटल व ढाबों पर बच्चे काम कर रहे है। ईट भट्टों पर बच्चे और
बच्चियां मजदूरी में तल्लीन है । न तो भाषण और जागरूकता से बालिकाओं को शिक्षित
बनाया जा सकता है और न ही सरकारी सहायता से ही। जब तक गरीबी रहेगी बालश्रम की
समाप्ति होना कठिन है।
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