मकर संक्रांन्ति की तैयारी जोरो पर
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शहर में मकर संक्रान्ति पर सजी दुकानें।
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जौनपुर। जिले में मकर संक्रान्ति का पर्व अर्थात खिचड़ी का त्योहार मनाने की तैयारी जोरों पर चल रही है। इस पर्व को लेकर बाजारो मे चहल पहल बढ़ गयी है। जगह-जगह लाई,
चूड़े की दुकान सज गई है। जहां लाई,
चूड़ा,
तिलवा,
गुड़ और चीनी की पपड़ी,
गट्टा,
सहित अन्य दुकानों पर खरीददारों का ताता लगा हुआ है। अभिभावक पुरानी परम्पराओ का बखूबी निर्वहन करते हुए अपने बहन बेटियो के घर खिचड़ी भिजवाने का कार्य तेज कर दिये है। बाजारो में लाई चूड़े के साथ-साथ पतंग की बाजारें भी सज गयी हैं। प्रतिबन्ध के बावजूद चायनीज मंझा बाजारों में बिक रहा है। बच्चे ठंड के कारण स्कूल बन्द होने के कारण पतंगबाजी का जमकर लुत्फ उठा रहे है। सूर्य भगवान की उपासना और दान के इस पर्व को ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति एक सप्ताह शेष है। लोगों ने अपने-अपने रिश्तेदारों के यहां खिचड़ी पहुंचाने का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। गांव में बच्चे खिचड़ी के अवसर पर अलाव जलाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। शहर के ओलंदगंज,
पालीटेक्निक चौराहा,
बदलापुर पड़ाव,
कोतवाली,
चहारसू,
सब्जीमंडी,
कचहरी रोड,
लाइन बाजार सहित देहात क्षेत्र की सभी बाजारों में एक सप्ताह पहले ही लाई चूड़ा की बिक्री शुरू हो गई। महंगाई के बावजूद बाजार में खरीदारों की भीड़ देखी जा रही है। गट्टा 60,
चूड़ा 30 से 40,
लाई 40,
लाई का ढुंढा 80,
गुड़ का तिलकुट 120,
तिल की पट्टी 120,
लाई पट्टी 80,
बजरी का ढुंढा 100,
तिल्ली की बर्फी 240 और बादाम की पट्टी 120 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है।। अपने खेतों में उत्पादिन धान से लाई चूड़ा कुटाकर तथा गन्ने से तैयार गुड़ से विभिन्न प्रकार के सामान बनाये जाते है। जबकि शहर में दुकानों से यह सभी चीजें खरीदकर पर्व के मौके पर उसका सेवन करते हैं। ज्ञात हो कि अब भी अनेक लोग अपने पुत्रियों के ससुराल में खिचड़ी भेजने की प्रथा कायम रखे हैं और उनके घर तक अभी से पर्व में उपयोग करने वाली सामग्रियां पहुंचाते है। हालांकि अब इस परंपरा का अब खात्मा हो रहा है कुछ लोग रूपया भेजकर रस्म अदायगी करते हैं।