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मनुष्य को धर्म व ईमान कभी नहीं छोड़ना चाहियेः विजयानन्द महाराज


जौनपुर। बिना गुरू ज्ञान के किसी भी जीव का जीवन अधूरा है, इसलिये किसी के भी जीवन में गुरू ज्ञान अति आवश्यक है। इंसान को अपना धर्म एवं ईमान कभी नहीं छोड़ना चाहिये, क्योंकि यही उसकी मूल पहचान होती है। यह संसार माया है तभी तो कोई भी अपने लिये, नहीं बल्कि दूसरों के लिये जीता है। यदि माया नहीं होती तो वह केवल अपने लिये जीता। उक्त विचार अखिल विश्व कल्याणार्थ शतचण्डी महायज्ञ एवं संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथामृत पान में उमड़ी भक्तों की भीड़ में गुरूदेव भगवान के परमशिष्य संत श्री विजयानन्द जी महाराज त्यागी ने व्यक्त किया। यह धार्मिक अनुष्ठान श्री शिवराम जानकी चारधाम बैकुण्ठपुरी मंदिर जनकल्याण समिति वृंदावन द्वारा नगर के नखास स्थित गोपी घाट (शाही पुल) पर आयोजित है। बीते 10 मई से शुरू श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को अंतिम दिन रहा जहां हजारों नर-नारियों ने कथा का लाभ उठाया। इसी क्रम में वृजबिहारी शास्त्री वृंदावन ने कहा कि कथा वही है जिससे व्यथा दूर हो जाय। हानि व ग्लानि में बड़ा अन्तर होता है। हानि 100 प्रतिशत गिर जाय तो हानि है परन्तु शराब पीकर मंदिर में प्रवचन किया जाय तो धर्म की ग्लानि है। जब तक जीवन है तब तक खान-पान सत्य है तथा मरने के बाद राम नाम सत्य है। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण व प्रभु श्रीराम की सुन्दर कथा का व्याख्यान भी किया। परमपूज्य सद्गुरूदेव भगवान श्री श्री 1008 स्वामी हौसलानन्द जी महाराज महात्यागी निःस्वार्थ कर्मयोगी के प्रेरणा से आयोजित कथा में हजारों नर, नारी, युवा, वृद्ध मौजूद रहे। अन्त में आयोजक अखिलेश चन्द्र विश्वकर्मा ने समस्त संतों व श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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