राजस्थान में फिर आरक्षण की आग, उग्र हुए गुर्जर पटरियों पर बैठे !
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नई दिल्ली। आरक्षण के मुद्दे पर आज गुर्जरों ने आंदोलन शुरू कर दिया। आरक्षण की मांग कर रहे आंदोलनकारी गुर्जर बयाना और डुमरिया रेलवे स्टेशन के बीच पटरियों पर बैठे गए। वहीं करीब एक हजार रेलवे के जवान और अधिकारी मौके पर पहुंच गए। बयाना और डुमरिया से होकर गुजरने वाली सभी ट्रेनें रुक गईं है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अगले 4 घंटे में 9 ट्रेनें इससे प्रभावित होगी।
आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जरों ने दिल्ली मुंबई रेल मार्ग को पीलूकापुरा में जाम कर दिया। अगले चार घंटे में छह ट्रेंने इससे प्रभावित होगी। गुर्जरों ने हालांकि सरकार को एक घंटे का अल्टीमेटम भी दिया। इससे पहले समोगर गांव में गुर्जर महापंचायत में फैसला किया कि ट्रेक जाम करने के लिए कूच करेंगे | 2008 से चल रहे गुजर आंदोलन में 72 गुर्जरों की पुलिस फायरिंग में मौत हो चुकी। पूर्व में वसुंधराराजे सरकार और फिर अशोक गहलोत सरकार ने गुर्जरों को विशेष पिछड़ा वर्ग में 05 फीसदी आरक्षण दिया था। लेकिन राजस्थान में 49 फीसदी आरक्षण पहले से था। संवैधानिक सीमा 50 फीसदी अधिकतम आरक्षण की है। ऐसे में गुर्जरों के आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
आरक्षण का ये मसला अभी भी राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है। हालांकि पूर्व अशोक गहलोत सरकार ने एक फीसदी आरक्षण लागू कर दिया। राज्य सरकार ने गुर्जरों को भरोसा दिलाया था कि जब भी कोर्ट का फैसला आ जाएगा चार फीसदी आरक्षण लागू कर दिया जाएगा।
इससे पहले आज राजस्थान के भरतपुर के समोगर गांव में गुर्जरों की महापंचायत हुई। वहीं राज्य सरकार ने भरतपुर औऱ करौली जिले के पांच उपखंड में धारा 144 लागू कर दी। शराब की बिक्री पर भी रोक लगा दी। गुर्जरों के ट्रेक जाम करने की आंशका में हिण्डौन से बयाना तक ट्रेक पर आरपीएफ और जीआरपी के जवान तैनात कर दिए। आरएसी की तीन कंपनियां बयान में तैनात की गई।
सभा स्थल के आसपास करीब 1500 पुलिसकर्मी तैनात किए। गुर्जरों को बातचीत के सिए तैयार करने और आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाने के लिए राज्य सरकार ने कई मोर्चे पर कोशिश शुरू कर दी। संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ समेत खई मंत्रियों को गुर्जर बहुल जिलों में अलग-अलग भेजा। जिससे हालात पर निगारनी रखे और आंदोलन से जुड़े लोगों से अनौपचारिक वार्ता हो सके।
गुर्जरों का आरोप है कि सरकार ने आरक्षण दिलाने के लिए कोर्ट में ठीक से पैरवी नहीं की, केंद्र सरकार के अटार्नी जनरल कोर्ट ही नहीं पहुंच रहे हैं। उधर राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने फिर कहा कि गुर्जरों से बातचीत के दरवाजे खुले हैं लेकिन रास्ता कोर्ट से ही निकलेगा

