डांस बारः SC ने रोक हटाई, CM फडणवीस अब भी बैन के समर्थन में
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मुंबई। डांस बार बंद करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद नया विवाद पैदा होता दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछली सरकार के बनाए गए कानून को सही ठहराते हुए कोर्ट के फैसले के अध्ययन की बात कही है। सीएम ने बार पर बैन का समर्थन भी किया। डांस बार असोसिएशन को मुख्यमंत्री का यह बयान पसंद नहीं आया। डांस बार मालिक मंजीत सेठी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अगर सरकार बार को शुरू नहीं करेगी तो असोसिएशन उसके खिलाफ मुकदमा दायर करेगी।
सेठी ने कहा कि हर बार सरकार की हार हुई है लेकिन इस बार इन्हें कोर्ट का आदेश मानना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र में डांस बार पर लगी रोक हटा दी। अब राज्य में भोजनालयों, बीयर बार और रेस्तरां में डांस की इजाजत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस कानून में 2014 में किये गये संशोधन के कार्यान्वयन पर आज रोक लगा दी। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत की पीठ ने इस मामले में न्यायिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि और इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस कानून में किए गए संशोधन का जिक्र करते हुये कहा, ‘हम महाराष्ट्र पुलिस (द्वितीय संशोधन) कानून की धारा 33 (ए) (1) के प्रावधानों पर रोक लगाना उचित समझते हैं।’ इसके साथ ही न्यायालय ने अपने अंतिम आदेश में एक शर्त भी लगा दी और राज्य में लाइसेंसिंग प्राधिकारियों को बार तथा दूसरे स्थलों पर अश्लील डांस प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की भी अनुमति प्रदान कर दी।
पीठ ने कहा, ‘हालांकि, हम शर्त भी लगा रहे हैं कि डांस प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की अश्लीलता वाली भाव भंगिमा नहीं होगी। लाइसेंसिग प्राधिकारी ऐसे डांस प्रदर्शन को नियंत्रित कर सकते हैं ताकि इसका प्रदर्शन करने वाली महिला की गरिमा को किसी प्रकार की ठेस नहीं पहुंचे।’ शीर्ष अदालत ने इस संशोधन को लेकर इंडियन होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन की याचिका अंतिम सुनवाई हेतु पांच नवंबर को सूचीबद्ध कर दी और कहा कि इसी मसले से संबंधित मामले में यह न्यायालय 2013 में पहले ही निर्णय कर चुकी है।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि एसोसिएशन को अंतरिम राहत दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि कानून में 2014 का संशोधन अलग किस्म का है। राज्य सरकार ने बंबई पुलिस कानून में 2005 में संशोधन किया था जिसे रेस्तरां और बार का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट ने 2006 में सरकार के फैसले को रद्द करते हुए इस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया था और कहा था कि यह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के खिलाफ है लेकिन राज्य सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी। शीर्ष अदालत ने 16 जुलाई, 2013 को हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा था कि इस तरह के प्रतिबंध से आजीविका अर्जित करने के सांविधानिक अधिकार का हनन होता है।
इसके बाद राज्य विधानसभा ने 13 जून, 2014 को महाराष्ट्र पुलिस (द्वितीय संशोधन) विधेयक पारित किया जिसके तहत तीन सितारा और पांच सितारा होटलों में डांस प्रदर्शन के लिये लाइसेंस देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस प्रतिबंध के दायरे में ड्रामा थिएटर, सिनेमाघर, प्रेक्षालय, स्पोर्ट्स क्लब और जिमखाना को भी ले आया गया था जहां प्रवेश सिर्फ सदस्यों के लिए ही था।
इस संशोधन को इंडियन होटल एंड रेस्तरां एसेासिएशन तथा अन्य ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।

