4500 दीपों के साथ मनाया गया देव दीपावली का त्योहार
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। देव दीपावली का त्योहार दीपावली के 14 दिन बाद कार्तिक
पूर्णिमा को धूमधाम से मनाया गया। इस त्योहार में शहर के प्राचीन
नागेश्वरनाथ प्रांगण व सरोवर को 4500 दीप प्रज्जवलित किये गये। इन दीपों
से सम्पूर्ण प्रांगण व सरोवर जगमगा उठा और आरती के साथ बज रहे घण्टे व
शंखनाद से पूरा पं्रागण हर्ष एवं उल्लास से भर गया। बब्बी ने बताया कि
देव दीपावली के दिन नींद से जागते हैं भगवान विष्णु। इसी तिथि से पहले
कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु नींद
से जागते हैं। यह भी माना जाता है कि देव दीपावली पर महालक्ष्मी अपने
स्वामी भगवान विष्णु से पहलेे जाग जाती हैं, इसलिए दीपावली के 14 दिन के
बाद देवताओं की दीपावली मनायी जाती है। देव दीपावली की पृष्ठभूमि पौराणिक
कथाओं से भरी हुई है, इस कथा के अनुसार भगवान शंकर ने देवताओं की
प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया,
जिसके उल्लास में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे आगे चलकर देव दीपावली के
रूप में मान्यता मिली। इसी संदर्भ में एक अन्य कथानक भी है- त्रिशंकु को
राजर्षि विश्वामित्र ने अपने तपोबल से स्वर्ग पहुँचा दिया। देवतागण इससे
उद्विग्न हो गए और त्रिशंकु को देवताओं ने स्वर्ग से भगा दिया। शापग्रस्त
त्रिशंकु अधर में लटके रहे। त्रिशंकु को स्वर्ग से निष्कासित किए जाने से
क्षुब्ध विश्वामित्र ने पृथ्वी व स्वर्ग आदि से मुक्त एक नीय समूची
सृष्टि की ही अपने तपोबल से रचना प्रारम्भ कर दी। उन्होंने कुश, मिट्टी,
ऊँट, भेड़-बकरी, नारियल, कोहड़ा, सिंघाड़ा आदि की रचना का क्रम प्रारम्भ कर
दिया। इसी क्रम में विश्वामित्र ने वर्तमान ब्रह्म-विष्णु-महेश की
प्रतिमा बनाकर उन्हे अभिमंत्रित कर उनमें प्राण फूँकना आरम्भ किया तभी
सारी सृष्टि डाँवाडोल हो उठी, हर ओर कोहराम मच गया, हाहाकार के बीच
देवताओं ने राजर्षि विश्वामित्र की अभ्यर्थना की। तब महर्षि प्रसन्न हो
गए और उन्होंने नई सृष्टि की रचना का अपना संकल्प वापस ले लिया। देवताओं
और ऋषि मुनियों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। पृथ्वी, स्वर्ग, पाताल सभी
जगह इस अवसर पर दीपावली मनाई गयी, यही अवसर अब देव दीपावली के रूप में
विख्यात है।
इस अवसर पर शहर से भारी संख्या में महिलाओं व पुरूषों ने दीपदान किया और
मुख्य रूप से रईस अंसारी, महेश जायसवाल, संजय निगम, राजेश गुप्ता पिंकू,
अमर गुप्ता, राजेश चौबे, मोहित सैनी, सोनू, सर्वेश निगम, राजू पटेल,
राजेश कृष्णा, शिव कुमार वर्मा, बबली गुप्ता, ओसामा अंसारी, बालेश
मौर्या, गुड्डू सिंह, सोनू जायसवाल, उमेश गुप्ता, संतोष जायसवाल, अमित
गुप्ता, संजू जायसवाल, देशदीपक मिश्रा आदि लोग मौजूद रहें।
बाराबंकी। देव दीपावली का त्योहार दीपावली के 14 दिन बाद कार्तिक
पूर्णिमा को धूमधाम से मनाया गया। इस त्योहार में शहर के प्राचीन
नागेश्वरनाथ प्रांगण व सरोवर को 4500 दीप प्रज्जवलित किये गये। इन दीपों
से सम्पूर्ण प्रांगण व सरोवर जगमगा उठा और आरती के साथ बज रहे घण्टे व
शंखनाद से पूरा पं्रागण हर्ष एवं उल्लास से भर गया। बब्बी ने बताया कि
देव दीपावली के दिन नींद से जागते हैं भगवान विष्णु। इसी तिथि से पहले
कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि देवउठनी एकादशी भगवान विष्णु नींद
से जागते हैं। यह भी माना जाता है कि देव दीपावली पर महालक्ष्मी अपने
स्वामी भगवान विष्णु से पहलेे जाग जाती हैं, इसलिए दीपावली के 14 दिन के
बाद देवताओं की दीपावली मनायी जाती है। देव दीपावली की पृष्ठभूमि पौराणिक
कथाओं से भरी हुई है, इस कथा के अनुसार भगवान शंकर ने देवताओं की
प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया,
जिसके उल्लास में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे आगे चलकर देव दीपावली के
रूप में मान्यता मिली। इसी संदर्भ में एक अन्य कथानक भी है- त्रिशंकु को
राजर्षि विश्वामित्र ने अपने तपोबल से स्वर्ग पहुँचा दिया। देवतागण इससे
उद्विग्न हो गए और त्रिशंकु को देवताओं ने स्वर्ग से भगा दिया। शापग्रस्त
त्रिशंकु अधर में लटके रहे। त्रिशंकु को स्वर्ग से निष्कासित किए जाने से
क्षुब्ध विश्वामित्र ने पृथ्वी व स्वर्ग आदि से मुक्त एक नीय समूची
सृष्टि की ही अपने तपोबल से रचना प्रारम्भ कर दी। उन्होंने कुश, मिट्टी,
ऊँट, भेड़-बकरी, नारियल, कोहड़ा, सिंघाड़ा आदि की रचना का क्रम प्रारम्भ कर
दिया। इसी क्रम में विश्वामित्र ने वर्तमान ब्रह्म-विष्णु-महेश की
प्रतिमा बनाकर उन्हे अभिमंत्रित कर उनमें प्राण फूँकना आरम्भ किया तभी
सारी सृष्टि डाँवाडोल हो उठी, हर ओर कोहराम मच गया, हाहाकार के बीच
देवताओं ने राजर्षि विश्वामित्र की अभ्यर्थना की। तब महर्षि प्रसन्न हो
गए और उन्होंने नई सृष्टि की रचना का अपना संकल्प वापस ले लिया। देवताओं
और ऋषि मुनियों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। पृथ्वी, स्वर्ग, पाताल सभी
जगह इस अवसर पर दीपावली मनाई गयी, यही अवसर अब देव दीपावली के रूप में
विख्यात है।
इस अवसर पर शहर से भारी संख्या में महिलाओं व पुरूषों ने दीपदान किया और
मुख्य रूप से रईस अंसारी, महेश जायसवाल, संजय निगम, राजेश गुप्ता पिंकू,
अमर गुप्ता, राजेश चौबे, मोहित सैनी, सोनू, सर्वेश निगम, राजू पटेल,
राजेश कृष्णा, शिव कुमार वर्मा, बबली गुप्ता, ओसामा अंसारी, बालेश
मौर्या, गुड्डू सिंह, सोनू जायसवाल, उमेश गुप्ता, संतोष जायसवाल, अमित
गुप्ता, संजू जायसवाल, देशदीपक मिश्रा आदि लोग मौजूद रहें।

