या हुसैन-या हुसैन की सदाओं के बीच निकला अलम ताबूत का जुलूस
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अजमी रिज़वी
बाराबंकी। या हुसैन या हुसैन की सदाओं के साथ निकला अलम ताबूत व जुलजनाह का जुलूस निकाला गया। जिसमें लखनऊ की मशहूर अन्जुमन गुलदस्ताये हैदरी मुहसाबगंज लखनऊ के साहबे बयाज ने नोहाख्वानी व सीनाजनी की। लाइनपुरवा स्थित स्व. अली शब्बर के अजाखाने में दस दिनो तक चलने वाली अशराये की मजलिस की आखिरी दिन मदरसा नाजमियां लखनऊ प्रोफेसर आगा अली ने मजलिस को खिताब करते हुये कहा कि इस्लाम अमनोचैन का नाम है। इस्लाम ने कभी दहशतगदी की इजाजत नही दी है। इस्लाम एख्लाक व मोहब्बत का नाम है। एक दूसरे से मोहब्बत करने का नाम है। उन्होने आगे कहा कि कुछ दहशतगर्द हैं जो इस्लाम का चेहरा ओढ़कर इस्लाम धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
जिहाद के नाम पर आईएसआईएस के खुंखार आतंकवादी इंसानियत को मिटाने पर तुला हुआ है। मौलाना ने बताया जब फ्रांस के पेरिस में आईएसआईएस ने खूनखराबा किया तो पूरी दुनिया एक सुर में विरोध प्रकट किया। काश यह देश उस समय आवाज उठाते जब आईएसआईएस के खुंखार आतंकवादियों ने इराक व सीरिया में दहशत मचा रखी थी। मौलाना ने कहा कि आज वक्त आ गया है कि हर धर्म के लोग एक मंच पर आयें और आईएस, अलकायदा, तालिबान के खिलाफ जमकर मजम्मत करें। अन्त में मौलाना ने कर्बला के इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास की वफा बयान करते हुये कहा कि हजरत अब्बास को अपनी भतीजी से बहुत उलफत थी। इसीलिये जब पानी लेने नहर पर गये तो जालिमों ने घेर लिया। लेकिन अब्बास की ख्वाहिश थी कि किसी तरह पानी खैमे के दर पर बैठी भतीजी सकीना तक पहुंच जाये। लेकिन अब्बास कर्बला के मैदान में दोनो शाने कटवाकर शहीद हो गये। लखनऊ से आयी गुलदस्तये हैदरी के साहबे बयाज शानू, दिलावर हुसैन, दिलदार हुसैन व साबिर हुसैन ने नोहा पढ़ा-या अली मुश्किल कुशा अपनी तमन्ना एक है, वो अकीदा चाहते हैं जिसका चेहरा एक है। पूछिये शब्बीर के दिल से आयेगा जवाब, है भाई लाखों में मगर अब्बास मेरा एक है। इसके बाद जुलूस निकाला गया। जिसमें अलम, ताबूत, जुलजनाह की जियारत करायी गयी। जुलूस देवा रोड रफीनगर होता हुआ मौलाना गुलाम अस्करी हाल में देर रात पहुंचा। जहां पर अलविदाई मजलिस को मौलाना मोहम्मद रजा जैदपुरी ने खिताब किया। मजलिस से पहले कशिश सण्डीलवी, मुजफ्फर इमाम, भल्लू व कामयाब सण्डीलवी ने नजरानये अकीदत पेश किया। जुलूस समाप्ति के बाद नजरे मौला ‘‘दस्तरख्वान‘‘ का इंतजाम भी किया गया। जुलूस में आये सभी मोमीनों का कल्बे आबिद, कल्बे अब्बास, कल्बे अली रजा, कल्बे जावेद ने शुक्रिया अदा किया।
