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फैक्ट्रियों की गंदगियां, बूचड़खानों के मलबे पर अंकुश लगाने के बाद ही स्वच्छ होंगी नदियांः अजय पाण्डेय

विभाग संयोजक ने कहा- सनातन धर्म के पालक भारत में ही हो रहा है हिन्दू धर्म व आस्था के साथ खिलवाड़
जौनपुर। भारतवर्ष आस्था का प्रधान राष्ट्र है जहां नदियों, वनस्पतियों आदि में आस्था रखकर लोग पूजा करते हैं, क्योंकि यह देश सनातन धर्म का पालक राष्ट्र है। यहां देवालयों के अलावा ग्रहों, पेड़ों, नदियों, पशुओं में आस्था रखी जाती है। उक्त बातें विश्व हिन्दू परिषद के कार्यालयध्यक्ष अजय पाण्डेय ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कही है। उनका कहना है कि आज देश जहां विकास के पथ पर अग्रसर है लेकिन लोग कहीं न कहीं अपने सनातन धर्म को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसके चलते आस्था एवं धर्म के साथ खिलवाड़ हो रहा है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण नदियों में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को विसर्जित न करने का निर्णय है। श्री पाण्डेय ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में आसानी से देखा जा सकता है कि स्लाटर हाउस से निकलने वाले मांस, खून आदि, चमड़ों की कम्पनियों से निकलने वाले मलबे, सोना गलाने वाले रासायनिक, मांस की दुकानों से निकलने वाले मांस के लोथड़े सहित अन्य मलबे नदियों में खुलेआम बहाया जाता है लेकिन उस पर किसी भी ऐसे व्यक्ति का ध्यान नहीं जाता है जो प्रतिमाओं के विसर्जन पर प्रतिबंध लगवाये हैं। इतना ही नहीं, शासनदृप्रशासन का ध्यान इस ओर एकदम नहीं जा रहा है। कार्याध्यक्ष ने कहा कि यह हिन्दू आस्था के विरूद्ध नहीं है तो क्या है? देश के उन जागरूक पहरूओं पर सवाल उठ रही है कि मिट्टी की बनी मूर्ति जो जल में गिरते ही गल कर नष्ट हो जाती है, से नदियां कैसे प्रदूषित होंगी जबकि शहर के सीवर, स्लाटर हाउस के मलबे, रक्त, कारखानों के केमिकल, मीट मार्केट के मलबे आदि उसी नदी में गिरते हैं। क्या इस सबसे नदी प्रदूषित नहीं हो रही है? अन्त में उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में गंगा सहित समस्त नदियों को प्रदूषण मुक्त कराना लोग चाहते हैं तो सबसे पहले उपरोक्त को बंद करें। नदियों में मील फैक्ट्री, सीवर लाइनों के पानी, बूचड़खानों के मलबे आदि को रोका जाय, निश्चित रूप से समस्त नदियां स्वच्छ और निर्मल हो जायेंगी।

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