हिंदू कैदियों की रिहाई के लिए मुस्लिमों ने जोड़े पैसे
https://husainijnp.blogspot.com/2015/11/blog-post_231.html
बरेली। देश में असहिष्णुता के मुद्दे पर चल रही तीखी बहस के बीच एक मुस्लिम समूह ने 15 हिंदुओं के लिए एक ऐसा काम किया है जो बाकियों के लिए एक नजीर से कम नहीं।
डिस्ट्रिक्ट जेल में बंद हिंदू कैदियों की रिहाई के लिए मुस्लिम युवकों ने 50 हजार रुपए की राशि आपसी कोशिशों से इकट्ठा की ताकि इनका जुर्माना भरा जा सके। ये सभी बिना टिकट ट्रेन में सफर करने के जुर्म में जेल में बंद थे। इनके बाद जुर्माना भरने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उन्हें अतिरिक्त सजा दी गई थी। एक बार जुर्माना भरने पर ये सभी जेल से बाहर आ गए।
जेल के बाहर, उन सभी मुस्लिमों ने इनका स्वागत किया जिन्होंने पैसे इकट्ठा करके इनके जुर्माने की रकम इकट्ठा की। 15 लोग बुधवार शाम जब जेल से बाहर आए तो हर तरफ खुशी थी और आंखों में आंसू थे।
एक साथी, नंद किशोर ने बताया कि बेटिकट यात्रा करने पर पकड़े जाने के बाद 1 हजार रुपए का जुर्माना नहीं भरने पर उसे जेल भेज दिया गया था। जब वह जेल से बाहर आया तो हाजी यासीन कुरैशी और उसके दोस्तों ने उसे गले लगाया और अपने साथ ले गए।
कुरैशी ने कहा कि वह ऊपरवाला ही है जिसे इसके लिए शुक्रिया कहना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन सभी 15 लोगों ने शपथ ली है कि वो दोबारा ऐसी गलती नहीं करेंगे।
इन मुस्लिम युवकों ने नंद किशोर को उसके पैतृक गांव पहुंचाने का प्रबंध भी किया। उसे इतने पैसे और दिए गए कि वो घर जा सके। नंद किशोर के अलावा अजय कुमार, किशन सागर, पप्पू और तिलक की भी यही कहानी थी। जेल से बाहर आने के बाद सभी को गले लगाया गया। यह दृश्य देखकर सभी भावुक हो उठे।
कुरैशी ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जेल अधिकारियों से उन्हें कैदियों के बारे में पता चला।। उन्होंने कहा, ‘इसके बाद हमने फैसला किया कि जो कुछ भी हमारे सामर्थ्य में है, हम करेंगे। हम मानते हैं कि ऐसा करने के लिए अल्लाह ने हमारी मदद की।’
कैदियों की मदद करने वाले एक और शख्स, हाजी मोहम्मद अनीस एक बिजनेसमैन हैं। अनीस ने कहा कि साहब ये तो हमारा वतन है और हिंदू हमारे भाई हैं। हम यहीं पैदा हुए और यहीं खाक में मिल जाएंगे।
बरेली डिस्ट्रिक्ट जेल के सुपरिटेंडेंट बीआर मौर्य ने बताया कि 15 कैदी छोटे अपराध की सजा भुगत रहे थे। इनमें से कुछ को शांति भंग करने के आरोप में भी गिरफ्तार किया गया था। ये सभी 6 महीने से 1 साल तक की सजा भुगत रहे थे। इनमें से अधिकतर ने अपनी सजा पूरी भी कर ली थी लेकिन कोर्ट द्वारा मिली जुर्माने की सजा पूरी नहीं कर पा रहे थे।
डिस्ट्रिक्ट जेल में बंद हिंदू कैदियों की रिहाई के लिए मुस्लिम युवकों ने 50 हजार रुपए की राशि आपसी कोशिशों से इकट्ठा की ताकि इनका जुर्माना भरा जा सके। ये सभी बिना टिकट ट्रेन में सफर करने के जुर्म में जेल में बंद थे। इनके बाद जुर्माना भरने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उन्हें अतिरिक्त सजा दी गई थी। एक बार जुर्माना भरने पर ये सभी जेल से बाहर आ गए।
जेल के बाहर, उन सभी मुस्लिमों ने इनका स्वागत किया जिन्होंने पैसे इकट्ठा करके इनके जुर्माने की रकम इकट्ठा की। 15 लोग बुधवार शाम जब जेल से बाहर आए तो हर तरफ खुशी थी और आंखों में आंसू थे।
एक साथी, नंद किशोर ने बताया कि बेटिकट यात्रा करने पर पकड़े जाने के बाद 1 हजार रुपए का जुर्माना नहीं भरने पर उसे जेल भेज दिया गया था। जब वह जेल से बाहर आया तो हाजी यासीन कुरैशी और उसके दोस्तों ने उसे गले लगाया और अपने साथ ले गए।
कुरैशी ने कहा कि वह ऊपरवाला ही है जिसे इसके लिए शुक्रिया कहना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन सभी 15 लोगों ने शपथ ली है कि वो दोबारा ऐसी गलती नहीं करेंगे।
इन मुस्लिम युवकों ने नंद किशोर को उसके पैतृक गांव पहुंचाने का प्रबंध भी किया। उसे इतने पैसे और दिए गए कि वो घर जा सके। नंद किशोर के अलावा अजय कुमार, किशन सागर, पप्पू और तिलक की भी यही कहानी थी। जेल से बाहर आने के बाद सभी को गले लगाया गया। यह दृश्य देखकर सभी भावुक हो उठे।
कुरैशी ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जेल अधिकारियों से उन्हें कैदियों के बारे में पता चला।। उन्होंने कहा, ‘इसके बाद हमने फैसला किया कि जो कुछ भी हमारे सामर्थ्य में है, हम करेंगे। हम मानते हैं कि ऐसा करने के लिए अल्लाह ने हमारी मदद की।’
कैदियों की मदद करने वाले एक और शख्स, हाजी मोहम्मद अनीस एक बिजनेसमैन हैं। अनीस ने कहा कि साहब ये तो हमारा वतन है और हिंदू हमारे भाई हैं। हम यहीं पैदा हुए और यहीं खाक में मिल जाएंगे।
बरेली डिस्ट्रिक्ट जेल के सुपरिटेंडेंट बीआर मौर्य ने बताया कि 15 कैदी छोटे अपराध की सजा भुगत रहे थे। इनमें से कुछ को शांति भंग करने के आरोप में भी गिरफ्तार किया गया था। ये सभी 6 महीने से 1 साल तक की सजा भुगत रहे थे। इनमें से अधिकतर ने अपनी सजा पूरी भी कर ली थी लेकिन कोर्ट द्वारा मिली जुर्माने की सजा पूरी नहीं कर पा रहे थे।

