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छः माह बाद भी नही मिला मनरेगा से काम

लिखित मांग भी रद्दी की टोकरी में
बाराबंकी। गरीब मजदूरो को गांव में रोजगार उपलब्ध कराने के दावे हवा-हवाई
साबित हो रहे है। मजबूरन दिहाड़ी मजदूरों को शहरों में आसरा लेना पड़ रहा
है। मामला घाघरा के तराई इलाके में स्थित विकास खण्ड पूरेडलई का है।
विकास खण्ड के उदईमऊ व सरायं सैफ के दो दर्जन मजदूरों ने जिलाधिकारी सहित
उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायती पत्र भेजकर मजदूरों को कार्य दिये जाने
की मांग की है। मजदूरों का आरोप है कि अप्रैल 2015 से अब तक किसी भी
मजदूर को मनरेगा कार्य व मजदूरी नही दी गयी है। निबहा निवासी मुन्नऊ
रावत, विश्वनाथ रावत, पल्टू रावत, हरी रावत, हरी रावत, पप्पू, सिंघई,
बाबूलाल सहित दो दर्जन मजदूरों ने बताया कि खण्ड विकास अधिकारी पूरेडलई
को 4 मई, 11 जून,  21 सितम्बर 2015 को लिखित प्रार्थना पत्र देकर मजदूरी
कार्य दिये जाने की मांग की गयी। परन्तु छः माह से अधिक का समय बीत जाने
के बाद भी मजदूरों को मनरेगा योजना के तहत मजदूरी कार्य व मजदूरी उपलब्ध
नही करायी गयी है। मजदूरों ने कार्य व मजदूरी उपलब्ध न करा पाने की दशा
में मजदूरी भत्ता दिलाने की गुहार लगायी है। इस सम्बन्ध में खण्ड विकास
अधिकारी पुष्पा वर्मा का कहना है कि मजदूरों की मांग पर उदईमऊ के तालाब
गाटा सं-29 की खुदाई का प्रस्ताव किया गया था। परन्तु धान की फसल लगी
होने के चलते कार्य नही शुरु कराया जा सका है। फसल कटते ही मजदूरों को
रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा।

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